उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर एक दिलचस्प बयान दिया है। शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं मिली है, और अगर उन्हें यह जैकेट मिल जाती है, तो वह उसे किसी पत्रकार को सौंप देंगे। उनके इस बयान से साफ जाहिर होता है कि भले ही उत्तर प्रदेश सरकार उनकी सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराने की योजना बना रही हो, लेकिन उनका इसे पहनने का कोई इरादा नहीं है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती समेत राज्य के 44 प्रमुख नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटी है। सुरक्षा मुख्यालय की ओर से करीब 10 लाख रुपये की लागत से इन विशेष जैकेट्स की खरीद की गई है। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ सरकार के 11 मंत्रियों को भी सुरक्षा के लिहाज से बुलेटप्रूफ जैकेट दी जाएंगी।
जापानी बच्चों के दौरे और बीजेपी पर तंज
हाल ही में जापान से 13 बच्चों का एक दल उत्तर प्रदेश आया था, जिन्होंने मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी ली थी। इस पर कटाक्ष करते हुए अखिलेश ने कहा कि उन बच्चों ने शायद कोई रिसर्च नहीं की होगी, वरना वे कभी सेल्फी नहीं लेते, हालांकि उन्हें इस तरह की गतिविधियां करने के लिए भविष्य में और भी कई अवसर मिलने वाले हैं। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए उसका एक नया फुल फॉर्म भी सुझाया और कहा कि बीजेपी का मतलब 'भाग जा पाकिस्तान' है।
मेरठ की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां एक अधिकारी ने उनके कार्यालय पहुंचे लोगों को डांट लगाई थी। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश ने कहा कि वे सभी लोग पीडीए समाज से ताल्लुक रखते थे, इसलिए उस अधिकारी ने इस तरह का अनुचित जवाब दिया कि वे लोग उनके दफ्तर के अंदर कैसे आ गए। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस की बर्बरता के मामले लगातार हर जगह देखने को मिल रहे हैं।
जयंत चौधरी और गठबंधन पर तीखी टिप्पणी
राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी पर पलटवार करते हुए अखिलेश ने कहा कि दिक्कत यह है कि जब आप सच बोलते हैं तो लोग नाराज हो जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय जनता पार्टी को अपने सभी सहयोगियों को पर्याप्त संख्या में सीटें देनी चाहिए और उनका पूरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बीजेपी को अपने सहयोगियों को चार गुना सीटें देनी चाहिए, और यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह चौधरी चरण सिंह का सीधा अपमान होगा। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि यदि बीजेपी उन्हें उचित सम्मान नहीं देती है, तो वे लोग निंदा प्रस्ताव पास करेंगे। अपने स्वयं के राजनीतिक गठबंधन को लेकर उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनका जो गठबंधन है, वह आगे भी वैसा ही रहेगा और उसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
परिवारवाद को लेकर दिया बड़ा तर्क
राजनीति में परिवारवाद के मुद्दे पर खुलकर बोलते हुए अखिलेश ने कहा कि लोगों को कभी-कभी यह भी सोचना चाहिए कि परिवारवाद से आखिरकार क्या लाभ मिलते हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि चर्चाएं थीं कि कैसे सांसदों को तोड़ा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी जो काम चुनाव से पहले करना चाहती थी, यानी संविधान में बदलाव लाना, उसे देश की आम जनता ने बार-बार मतदान करके पूरी तरह विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश की जनता और समाजवादियों की भूमिका सबसे अहम रही।
अखिलेश ने आगे सवाल उठाया कि कई राजनीतिक दल टूट गए, लेकिन क्या किसी ने कभी यह सोचा कि समाजवादी पार्टी क्यों नहीं टूटी? इस पर उन्होंने खुद ही जवाब देते हुए कहा कि क्योंकि पार्टी में एक ही परिवार से पांच सांसद शामिल थे, इसके अलावा कई मुस्लिम सांसद थे और कुछ पक्के समाजवादी नेता थे, जिसके चलते पार्टी का दायरा और संख्या इस तरह से जुड़ी थी कि उसमें सेंधमारी संभव नहीं थी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि कभी-कभी परिवारवाद के अपने फायदे होते हैं। हालांकि, जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या समाजवादी पार्टी को तोड़ने की कोई कोशिश की गई थी, तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था।




















