जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र इंसान के जीवन से जुड़े सबसे जरूरी दस्तावेजों में गिने जाते हैं। बच्चों के स्कूल में दाखिले से लेकर किसी व्यक्ति के निधन के बाद जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने तक इन कागजातों की हर कदम पर जरूरत पड़ती है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद नगर निगम में इन दिनों यही प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि लोग पिछले छह महीने से दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आवेदन करने के महीनों बीत जाने के बाद भी प्रमाणपत्र हाथ नहीं लग रहे हैं, जिससे अभिभावकों और परिजनों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा निगम में लागू हुए नए नियमों ने भी इस प्रक्रिया को और अधिक पेचीदा बना दिया है, जिसके कारण आम नागरिकों को दफ्तर के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बच्चों के स्कूल दाखिले के लिए महीनों से लग रहे हैं चक्कर
फिरोजाबाद नगर निगम कार्यालय में इन प्रमाण पत्रों को लेकर मची अफरा-तफरी और लोगों की समस्याओं की जब जमीनी हकीकत टटोली गई, तो कई गंभीर मामले सामने आए। नई बस्ती से निगम कार्यालय पहुंची किरण देवी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उनकी पोती का स्कूल में एडमिशन होना है, जिसके लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से मांगा गया है। इस दस्तावेज को हासिल करने के लिए वह पिछले छह महीने से लगातार निगम के चक्कर काट रही हैं। उनका आरोप है कि पहले उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने दोबारा प्रक्रिया पूरी की। दोबारा आवेदन जमा करने के बाद से वह हर महीने नियमित रूप से दफ्तर के फेरे लगा रही हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। महिला का कहना है कि घर से नगर निगम तक आने-जाने में हर बार बीस रुपये का किराया खर्च होता है।
मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाले लोगों के लिए यह खर्च भी भारी पड़ रहा है। किरण देवी ने सवाल उठाया कि रोजाना मजदूरी छोड़कर निगम में आने के लिए वे लोग पैसे कहां से लाएं। अधिकारी हर बार उन्हें अगली तारीख दे देते हैं, लेकिन उनके कागजातों में क्या कमी है, यह कभी स्पष्ट नहीं बताया जाता। इसके बावजूद इतने लंबे समय बाद भी उनकी पोती का जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। सिर्फ किरण देवी ही नहीं, बल्कि अपनी भतीजी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे प्रशांत गौतम का भी यही दर्द है। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार महीनों से दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। कभी उन्हें यह कहकर टरका दिया जाता है कि नगर आयुक्त साहब मौजूद नहीं हैं, तो कभी एसडीएम साहब के न होने का बहाना बना दिया जाता है। उन्हें अपने आवेदन को लेकर कोई भी सटीक अपडेट नहीं मिल पाता है, जिससे उन्हें भयंकर मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यालय में मौजूद अन्य लोगों ने भी इसी तरह की व्यवस्थागत कमियों और अपनी पीड़ा के बारे में खुलकर बात की।
पिता के डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी दौड़ रहे हैं लोग
यह समस्या सिर्फ जन्म प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोग भी बुरी तरह परेशान हैं। देव नाम के एक स्थानीय निवासी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि छह महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया था। वह अपने पिता का डेथ सर्टिफिकेट यानी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगातार निगम कार्यालय आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। देव का कहना है कि वह हर महीने दफ्तर आकर अपने पिता का प्रमाण पत्र मांगते हैं, मगर हर बार उन्हें सिर्फ अगली तारीख थमा दी जाती है। इस ढीले-ढाले रवैये के कारण उन्हें और उनके परिवार को तमाम तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी तरह सैलीना नाम की एक महिला अपने बच्चे के स्कूल में दाखिले के सिलसिले में पिछले छह महीने से नगर निगम के चक्कर काट रही हैं। उनके बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में नाम को ठीक करवाया जाना है, लेकिन इस छोटे से काम के लिए भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जब वह कर्मचारियों से इस बारे में ज्यादा पूछताछ करती हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि उच्च अधिकारियों की वजह से देरी हो रही है और ये दस्तावेज ऊपर से बनकर नहीं आ रहे हैं। इसके साथ ही महिला ने यह भी खुलासा किया कि निगम में अब एक नया नियम भी लागू कर दिया गया है, जिसके तहत दो साल से पुराने जन्म प्रमाण पत्र अब यहां नहीं बनाए जाएंगे। हालात यह हैं कि यदि किसी चार साल के बच्चे का प्रमाण पत्र बनवाना हो, तो उसके लिए पीड़ित परिवार को मजबूरन अदालतों और कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे।



















