अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में कथित दान राशि की चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। TrendKia के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन शीर्ष पदाधिकारी खुद को इस जिम्मेदारी से अलग करने की तैयारी में हैं। वहीं दूसरी तरफ, दान राशि की गिनती करने वाले और इस हेरफेर में शामिल कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ बैंक कर्मियों पर भी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इस मामले में टिन्नू यादव समेत कई अन्य लोगों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
SIT की जांच का छठवां दिन और सीसीटीवी से छेड़छाड़ की आशंका
TrendKia के सूत्रों के मुताबिक, मामले की तह तक जाने के लिए गठित की गई SIT आज छठवें दिन भी राम मंदिर परिसर के भीतर जांच में जुटी हुई है। जांच के दौरान मंदिर के सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ किए जाने के संकेत मिलने के बाद अब इसकी फोरेंसिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। SIT की टीम पुराने डिलीट किए गए रिकॉर्ड्स को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सीसीटीवी तकनीकी विशेषज्ञों को विशेष रूप से राम जन्मभूमि परिसर में बुलाया गया है।
इससे पहले, जांच के पांचवें दिन भी पूछताछ का दौर जारी रहा था। मंदिर परिसर के भीतर अलग-अलग कमरों में गहन पूछताछ की जा रही है, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। जांच एजेंसी ने ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, राम शंकर यादव टिल्लू, गोपाल राव और कई बैंक कर्मचारियों से अलग-अलग कमरों में बिठाकर पूछताछ की है।
अखिलेश यादव का तीखा हमला और अयोध्या सांसद का दौरा
सपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने मांग की है कि चंदा चोरी की चल रही जांच की प्रगति को लेकर नियमित रूप से आधिकारिक ब्रीफिंग की जानी चाहिए। उन्होंने मथुरा से सामने आई वित्तीय गड़बड़ी की खबरों को भी अत्यंत गंभीर बताते हुए उसकी उच्चस्तरीय और विश्वसनीय जांच कराने की मांग की।
उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी। भाजपा की राजनीति की शुरुआत यहीं से हुई थी और इसका अंत भी यहीं होगा। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि चढ़ावे, चंदे, दान और शिला की चोरी जैसी घटनाओं के बाद से अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, जिसका सीधा नुकसान अयोध्या के स्थानीय व्यापारियों और आम जनता की रोजी-रोटी को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की इस बड़ी नाकामी का खामियाजा यहां के आम नागरिक क्यों भुगतें।
इस बीच, राजनीतिक सरगर्मियों के बीच अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद आज दोपहर करीब 12:00 बजे राम मंदिर पहुंचेंगे। वे वहां भगवान राम के दर्शन करेंगे और उनका आशीर्वाद लेंगे।
मुख्यमंत्री का दौरा और इकबाल अंसारी का भरोसा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर के भ्रमण के दौरान ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने उन्हें विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी दी। दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपनी जेब से एक लिफाफा निकाला और उसे पूरी श्रद्धा के साथ राम मंदिर के दान पात्र में समर्पित किया।
दूसरी तरफ, बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व पक्षकार रहे और अयोध्या के सम्मानित नागरिक इकबाल अंसारी ने इस मामले में हो रही SIT जांच की सराहना की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान यह साफ कर दिया है कि निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। अंसारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है और अयोध्या के सभी नागरिकों को भी उन पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि वे दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और सच जल्द ही सबके सामने आएगा।
जमीन खरीद के दस्तावेजों की भी होगी जांच
SIT की नजर सिर्फ दान के पैसे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जांच का दायरा काफी बड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने दान राशि के अलावा हाल ही में हुई जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तलब किए हैं। विशेष रूप से रामकोट क्षेत्र में खरीदी गई संपत्तियों, उनके बैंक लेन-देन और इसमें शामिल बिचौलियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक की गई पूछताछ में जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।













