उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से चढ़ने के कारण स्थानीय प्रशासन ने नौका संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मानसून के दौरान नदी के बढ़ते बहाव और तेज लहरों को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह एहतियाती कदम उठाया गया है। जलस्तर में अचानक आई इस तेजी के बाद प्रशासन ने सभी नाविकों को निर्देश जारी कर अपनी नावें किनारे बांधने और जान जोखिम में न डालने की अपील की है।
गंगा के जलस्तर के आंकड़े और वर्तमान स्थिति
मिर्जापुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 66.850 मीटर तक पहुंच गया है। यद्यपि वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से लगभग 10 मीटर नीचे बना हुआ है, फिर भी जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार को देखते हुए सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में गंगा नदी का चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर निर्धारित है, जबकि खतरे का निशान 77.774 मीटर पर दर्ज है। हालांकि जलस्तर अभी खतरे के निशान से काफी दूर है, लेकिन नदी की धारा में आए उफान और लहरों की तीव्रता के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ गया है, जिसके चलते नौका संचालन स्थगित करना पड़ा है।
सावन माह में नाविकों की आजीविका पर असर
नौका संचालन बंद होने से स्थानीय नाविक समुदाय की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। सावन का पवित्र महीना नाविकों की आमदनी का सबसे मुख्य समय माना जाता है, जब दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। इस अवधि में नावों की मांग सबसे अधिक रहती है, जिससे नाविकों को पूरे साल के लिए आर्थिक सहारा मिलता है। ऐसे समय में नौकाओं का चक्का जाम होने से नाविकों के सामने दैनिक जीवन के खर्च चलाना कठिन हो गया है।
सुरक्षा और समाधान को लेकर नाविकों की मांग
स्थानीय नाविक बनवारी लाल ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के बाद गंगा में तेज लहरें उठ रही हैं, जिससे हादसे का जोखिम बना रहता है। उन्होंने माना कि एहतियात के तौर पर नौका संचालन रोकना जरूरी कदम है, लेकिन साथ ही उन्होंने प्रशासन से नाविकों की आजीविका का ध्यान रखने की अपील भी की। वहीं एक अन्य नाविक अमरलाल ने कहा कि काम बंद होने से उनके रोजमर्रा के खर्चों पर संकट खड़ा हो गया है। अमरलाल का कहना है कि शासन और प्रशासन को कोई ऐसा बीच का रास्ता निकालना चाहिए, जिससे सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके और नाविकों को भी राहत मिल सके।



















