कानपुर के उत्तर प्रदेश स्थित चिड़ियाघर में लंबे समय से सिरदर्द बने चूहों के उत्पात से अब मुक्ति मिलने की उम्मीद बंध गई है। उद्यान प्रबंधन लगातार बढ़ती इस समस्या से खासे परेशान थे क्योंकि ये चूहे पक्षियों के बाड़ों के भीतर सुरंग बनाकर घुसपैठ कर जाते थे और बहुमूल्य अंडों को तहस-नहस कर देते थे। इस हरकत की वजह से कई संवेदनशील प्रजातियों के ब्रीडिंग प्रोग्राम पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस गंभीर संकट का पक्का और स्थायी हल ढूंढने के लिए प्रशासन ने पहली बार एक विशेष रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत सभी पक्षी घरों तथा बाड़ों के फर्श को पूरी तरह से पक्का और सीमेंटेड किया जा रहा है जिससे चूहे बिल खोदकर भीतर दाखिल न हो सकें।
अंडों और चूजों की सुरक्षा को मिल रही है प्राथमिकता
इस प्राणी उद्यान में तमाम दुर्लभ और विदेशी किस्म के पक्षियों का संरक्षण किया जाता है। इनके प्रजनन के नाजुक दौर में अंडों की हिफाजत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता और चुनौती होती है। चूहे बाड़ों में घुसकर न केवल अंडों को नुकसान पहुंचाते थे बल्कि चिड़ियाघर में पक्षियों की आबादी बढ़ाने के प्रयासों को भी पलीता लगा रहे थे। अब जब बाड़ों की सतह सीमेंटेड हो जाएगी तो चूहों के लिए जमीन खोदकर अंदर घुसना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। इससे न सिर्फ अंडे बल्कि हाल ही में निकले चूजे भी ज्यादा सुरक्षित माहौल में रह सकेंगे।
शुरुआती चरण में पक्षी बाड़ों को किया जा रहा है मजबूत
प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी योजना का श्रीगणेश पहले चरण के तहत सभी पक्षी बाड़ों से किया है। जिन-जिन बाड़ों में अब तक कच्ची मिट्टी का फर्श था, उसे हटाकर मजबूत कंक्रीट और सीमेंट की सतह डाली जा रही है। जिम्मेदारों का मानना है कि इस कदम से चूहों के आतंक पर काफी हद तक लगाम लग जाएगी। इसके साथ ही इन बाड़ों की साफ-सफाई रखना भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा और विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैलने का जोखिम भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
पर्यटकों की सुविधा और बेहतर दीदार का इंतजाम
यहाँ आने वाले सैलानी अक्सर इस बात की शिकायत करते थे कि बाड़ों के भीतर अत्यधिक झाड़ियां और घने पेड़ होने की वजह से पक्षी और अन्य वन्यजीव अपनी स्वाभाविक अवस्था में ठीक से नजर नहीं आते हैं। अब प्रशासन इस दिशा में भी सक्रियता से काम कर रहा है। आवश्यकता के अनुसार वनस्पतियों और हरियाली को संतुलित किया जा रहा है ताकि परिंदों और जानवरों को उनका प्राकृतिक परिवेश भी मिलता रहे और पर्यटकों को उनके बिना किसी बाधा के स्पष्ट दीदार हो सकें।
संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा और बेहतर होगा माहौल
उद्यान प्रशासन का साफ कहना है कि यह पूरा कदम महज चूहों से निजात पाने भर के लिए नहीं उठाया गया है, बल्कि इसका उद्देश्य वन्यजीवों के समग्र संरक्षण को अधिक सुदृढ़ बनाना है। सुरक्षित बाड़ों की मौजूदगी से पक्षियों का प्रजनन सुगम होगा और उनकी देखभाल करना भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा कानपुर चिड़ियाघर का समग्र वातावरण पहले से अधिक व्यवस्थित और मनमोहक रूप में दिखाई देगा। इस अनूठी पहल से आने वाले समय में यहाँ पक्षियों की सुरक्षा कवच मजबूत होगी, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण आसान बनेगा और हर साल आने वाले हजारों पर्यटकों को एक शानदार अनुभव प्राप्त होगा।


















