उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग द्वारा केले की खेती पर विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। एकीकृत बागवानी फसल योजना के तहत केले के पौधे लगाने वाले किसानों को दो किस्तों में वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह के अनुसार, इस योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों की शुरुआती लागत को कम करना है ताकि वे व्यावसायिक स्तर पर खेती करके बेहतर मुनाफा अर्जित कर सकें। केले की फसल बाजार में साल भर मांग में बनी रहती है, जिससे किसानों को उपज बेचने में जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता।
केले की खेती के लिए दो चरणों में सब्सिडी का प्रावधान
उद्यान विभाग द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता को दो वर्षों में विभाजित किया गया है। योजना के नियमों के अनुसार, खेती के पहले वर्ष में किसानों को प्रति पौधा 9.84 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसके बाद फसल की बेहतर देखभाल और रखरखाव को जारी रखने के लिए दूसरे वर्ष में भी विभाग द्वारा लगभग 3.87 रुपये प्रति पौधा की दर से सब्सिडी दी जाती है। यह दोहरी सहायता व्यवस्था किसानों को फसल के पूरे चक्र के दौरान आर्थिक संबल प्रदान करती है, जिससे वे बिना किसी वित्तीय तनाव के बागवानी को आगे बढ़ा सकते हैं।
लागत और कमाई का गणित: एक बीघा में कितनी होगी बचत?
व्यावसायिक दृष्टिकोण से केले की खेती बेहद फायदेमंद साबित होती है। यदि कोई किसान एक बीघा जमीन पर केले की फसल लगाता है, तो शुरुआत से लेकर फसल तैयार होने तक लगभग 1 लाख रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये की लागत आती है। सही कृषि तकनीकों और उचित प्रबंधन का पालन करने पर इसी एक बीघा जमीन से 3 लाख रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक की कुल उपज प्राप्त की जा सकती है। सभी खर्चों को निकालने के बाद, किसान 12 से 14 महीने की अवधि में आसानी से 1.5 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत या शुद्ध मुनाफा हासिल कर सकते हैं।
तकनीक और कीट प्रबंधन: खेती शुरू करने से पहले जरूरी बातें
केले की खेती में कमाई की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए सही तकनीकी जानकारी होना बहुत आवश्यक है। केले के पौधों में कीटों और बीमारियों का प्रकोप तेजी से हो सकता है, इसलिए समय पर कीटनाशकों का छिड़काव और नियमित देखभाल बेहद जरूरी होती है। नए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेती शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र के उन अनुभवी किसानों के खेतों का दौरा अवश्य करें जो पहले से सफलतापूर्वक केले की पैदावार कर रहे हैं। व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही पौधरोपण की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि नुकसान की संभावना शून्य हो सके।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पंजीकरण प्रक्रिया
एकीकृत बागवानी फसल योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इच्छुक किसानों को आवेदन के समय कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। इनमें आवेदक का आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, जमीन की खतौनी और हालिया पासपोर्ट आकार की फोटो शामिल हैं। किसान इन दस्तावेजों के साथ उद्यान विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। जो किसान ऑनलाइन प्रक्रिया करने में सक्षम नहीं हैं, वे जिला उद्यान विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क करके अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करवा सकते हैं। पंजीकरण स्वीकृत होने के बाद विभाग द्वारा तय मानकों के अनुसार सब्सिडी की राशि सीधे पात्र किसानों को उपलब्ध कराई जाती है।


















