धार्मिक नगरी अयोध्या में भगवान हनुमान के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को सुखद बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अहम बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने वाले आगंतुकों को तेज चिलचिलाती धूप, उमस और मूसलाधार बारिश से सुरक्षित रखने के मकसद से लगभग 500 मीटर लंबाई वाले एक सुदृढ़ शेड का निर्माण अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। इस पूरे निर्माण कार्य का तकरीबन नब्बे प्रतिशत हिस्सा धरातल पर उतारा जा चुका है, जिस पर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है।
भक्ति पथ पर श्रंगार हाट से सीधे जुड़ेगा सुरक्षित गलियारा
यह महत्वपूर्ण छायादार ढांचा श्रंगार हाट से हनुमानगढ़ी तक जाने वाले प्रसिद्ध भक्ति पथ पर स्थापित किया जा रहा है। यहां सामान्य दिनों के अलावा विशेष पर्वों, त्योहारों और मेलों के अवसर पर भारी जनसैलाब उमड़ता है। पूर्व में कतार में लगे दर्शनार्थियों को खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े रहना पड़ता था, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को गंभीर शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसी कष्ट को दूर करने के लिए दर्शन मार्ग के ऊपर मजबूत ट्रस तैयार कर शेड बिछाने का निर्णय लिया गया।
वेंटिलेशन और मिस्टिंग पंखों से मिलेगी भीषण गर्मी में राहत
इस गलियारे को केवल साधारण छत देने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि वातावरण को ठंडा और अनुकूल बनाए रखने के आधुनिक इंतजाम भी किए जा रहे हैं। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया, "भक्ति पथ पर श्रंगार हाट से हनुमानगढ़ी तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन को देखते हुए उनके ऊपर ट्रस का निर्माण कराया गया है." गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए यहां पानी की फुहार छोड़ने वाले मिस्टिंग पंखे लगाए जाने की रूपरेखा बनाई गई है। इसके अतिरिक्त हवा की सुचारू आवाजाही के लिए बेहतर वेंटिलेशन प्रणाली का संयोजन किया गया है, ताकि किसी भी भक्त को घुटन या बेचैनी का अनुभव न हो।
ड्रेनेज और तकनीकी मजबूती पर जोर, जल्द खुलेगा गलियारा
मानसून के दौरान जलभराव को रोकने के लिए उचित ड्रेनेज प्रणाली भी विकसित की जा रही है। नगर आयुक्त के अनुसार, इस पूरे कार्य को श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की पिछले साल तय की गई कार्ययोजना के तहत शामिल किया गया था और परियोजना पर करीब एक साल से निर्माण चल रहा है। इलाका बेहद संकरा और श्रद्धालुओं की आवाजाही से अत्यधिक व्यस्त होने की वजह से रफ्तार पर थोड़ा असर पड़ा, मगर अब अगले 2 से 3 महीने की समयसीमा में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। आरंभ में अनुमानित बजट 5 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन ढांचे की स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु तीसरे पक्ष द्वारा तकनीकी निरीक्षण कराने तथा कुछ आवश्यक संशोधनों के चलते खर्च 5 करोड़ रुपये से कुछ अधिक हो गया है। इस सुविधा से दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित बनेगी।



















