पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बैंकिंग नेटवर्क में जाली नोटों की आवाजाही को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े मामले के बाद अब मेरठ के मंगलपांडे नगर में स्थित एक्सिस बैंक के मुख्य करेंसी चेस्ट में बड़ी तादाद में नकली मुद्रा मिलने का गंभीर मामला सामने आया है। बैंक के आंतरिक मिलान और ऑडिट के दौरान 4 लाख 63 हजार 650 रुपये मूल्य के जाली नोट पाए गए हैं। इस करेंसी चेस्ट से एक्सिस बैंक की लगभग 186 शाखाएं सीधे जुड़ी हुई हैं, जहां दैनिक कामकाज में एकत्र होने वाली नकदी को अंतिम मिलान और सुरक्षा जांच के लिए भेजा जाता है। इतनी बड़ी तादाद में नकली नोटों का सीधे करेंसी चेस्ट तक पहुंच जाना बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े कर रहा है।
13 महीने की जमा राशि के ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी
इस पूरे मामले का खुलासा बैंक के आंतरिक ऑडिट और जांच प्रक्रिया के दौरान हुआ। हरियाणा के हिसार निवासी और एक्सिस बैंक करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सरताज सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बीबीजीटीएस मूर्ति को इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पत्र के अनुसार, बैंक प्रबंधन ने 1 दिसंबर 2024 से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक, यानी कुल 13 महीनों के दौरान विभिन्न बैंक शाखाओं से चेस्ट में जमा कराई गई पूरी नकदी का सिलसिलेवार परीक्षण किया। इस लंबी अवधि के दौरान जमा हुई भारी नकदी की गहन छंटनी के बाद अलग-अलग मूल्य वर्ग के जाली नोट पकड़े गए।
500 से लेकर 10 रुपये तक के कुल 1323 जाली नोट बरामद
आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के मुताबिक चेस्ट से कुल 1,323 जाली नोट बरामद किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य 4,63,650 रुपये बैठता है। बरामद नकदी में सबसे बड़ा हिस्सा 500 रुपये के नोटों का है, जिनकी संख्या 805 है। इसके अलावा 200 रुपये मूल्य वर्ग के 142 नोट, 100 रुपये के 279 नोट और 50 रुपये के 97 नोट पकड़े गए हैं। जांच में 10 रुपये समेत अन्य छोटे मूल्य वर्ग की जाली मुद्रा मिलने की बात भी सामने आई है। नोटों के भौतिक निरीक्षण में पाया गया कि इनमें से कई नोट काफी पुराने और घिसे हुए थे, जबकि कुछ नोट दो हिस्सों में फटे हुए थे जिन्हें सेलोटेप या गोंद की मदद से दोबारा चिपकाकर जमा कराया गया था।
शाखा स्तर की जांच प्रणाली और कर्मियों की भूमिका पर सवाल
नियमों के तहत किसी भी वाणिज्यिक बैंक की शाखा में जब कोई ग्राहक नकद जमा करता है, तो काउंटर पर ही कैश सॉर्टिंग मशीन और पराबैंगनी किरणों वाली प्रणाली से उसकी प्रामाणिकता जांची जाती है। इसके बाद शाखा स्तर से करेंसी चेस्ट भेजे जाने से पहले भी मिलान किया जाता है। ऐसे में कई स्तरों की अनिवार्य जांच को पार कर इतनी बड़ी संख्या में नकली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंच जाना गंभीर लापरवाही या साठगांठ की ओर इशारा करता है। पुलिस अब 186 संबंधित शाखाओं के नकदी जमा रजिस्टर, दैनिक वाउचर और सीसीटीवी रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नकली खेप किस विशेष शाखा से और किस खातेदार के जरिए बैंक तक पहुंची।
संगठित गिरोह और बैंकिंग मिलीभगत की पड़ताल में जुटी पुलिस
मामले की तफ्तीश कर रहे अधिकारियों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय कोई संगठित जाली नोट गिरोह सीधे बैंकों के तंत्र में सेंध लगाने में सफल हो गया है। आम नागरिकों के लिए जाली और असली नोट के बारीक अंतर को पहचानना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन यदि अत्याधुनिक मशीनों से लैस बैंक कर्मी भी इन्हें नहीं पकड़ पा रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा खामी है। पुलिस इस बिंदु पर भी पड़ताल कर रही है कि क्या बैंक के किसी कर्मचारी ने जानबूझकर इन नोटों को स्वीकार किया या फिर यह केवल शाखा कर्मियों की लापरवाही का नतीजा था। जमा रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल खंगालने के बाद ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।

















