उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य प्रशासन ने बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य इंतजाम लागू किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर H1N1 की जांच पूरी तरह निशुल्क की जाएगी। इसके साथ ही, जिन जिलों में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, वहां निगरानी नेटवर्क और चिकित्सीय सुविधाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।
निजी लैब पर नकेल और अस्पतालों में ICU वार्ड की तैयारी
राज्य में इन्फ्लूएंजा-A और मौसमी फ्लू की वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत दी कि निजी स्वास्थ्य संस्थान H1N1 जांच के लिए सरकार द्वारा निर्धारित दर से ज्यादा फीस न वसूलें। उन्होंने अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, जांच किट तथा पृथक वास (आइसोलेशन) सुविधाएं उपलब्ध रखने का आदेश दिया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों के त्वरित उपचार के लिए चिकित्सा संस्थानों में अलग से आईसीयू (ICU) वार्ड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आशा और ANM कर्मियों से डोर-टू-डोर स्क्रीन, टेली-कंसल्टेशन सेवा
बैठक के दौरान H1N1 संक्रमण से बचाव और उपचार से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करने के लिए एएनएम (ANM), आशा कार्यकर्ताओं और अन्य मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से घर-घर जाकर जांच व स्क्रीनिंग प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, घर पर उपचार ले रहे मरीजों के लिए प्रभावी टेली-कंसल्टेशन सेवाएं शुरू की जा रही हैं ताकि उन्हें घर बैठे डॉक्टरी सलाह मिल सके।
राज्य में 685 मामलों की पुष्टि, जानें लक्षण और फैलाव का तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समीक्षा के दौरान बताया कि बुधवार तक उत्तर प्रदेश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) के कुल 685 मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। यह श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रामक बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के दौरान हवा में फैलने वाली सूक्ष्म बूंदों से प्रसारित होती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में ऐंठन व दर्द, ठंड लगना और आंखों का लाल होना शामिल है।
हाई-रिस्क समूहों की सुरक्षा और ओपीडी में अलग काउंटर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हल्के लक्षण वाले मरीजों को चिकित्सीय परामर्श के अनुसार घर पर विश्राम करने और स्वयं को आइसोलेट रखने की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मरीजों को बिना किसी देरी के अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जाए। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखते हुए विशेष देखभाल देने के आदेश दिए गए हैं। अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाए जा रहे हैं और मरीजों की स्थिति के अनुसार रेफरल प्रणाली लागू की जा रही है ताकि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर: डिप्टी सीएम ब्रिजेश पाठक
स्वाइन फ्लू की स्थिति पर उपमुख्यमंत्री ब्रिजेश पाठक ने भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सा अधिकारी अपने जिलों में दवाइयों की उपलब्धता और वार्डों की तैयारियों पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।





















