बैंक ऑफ कनाडा के फैसले से पहले कनाडाई डॉलर पस्त, बीएनवाई ने कमजोर फंडामेंटल्स और विदेशी मुद्रा बाजार के रुख पर जताया संशयभागलपुर के बाढ़ प्रभावित किसान छत पर ऐसे तैयार करें नेनुआ की पौध, मिलेगा अगात फसल का ज्यादा दामश्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर मोरपंख के 4 आसान उपाय दूर करेंगे घर की नकारात्मकता और वास्तु दोषकृत्रिम बुद्धिमत्ता से बढ़ता मानसिक तनाव, एचआर विभाग इन 5 तरीकों से कम कर सकता है कर्मचारियों का बोझमिस वर्ल्ड 2026 में ट्रिविया एल मुहोज़ा ने पहना अनोखा गाउन, सी-सेक्शन सर्जरी की 7 परतों से दिया मातृत्व को खास सम्मानकार में बार-बार बैटरी डिस्चार्ज होने का असली कारण हो सकता है अल्टरनेटर, इन 5 लक्षणों और तरीकों से करें जांचसीकर के लक्ष्मणगढ़ में 3 ग्रामीण पक्की सड़कों को मिली मंजूरी, 1.97 करोड़ रुपये होंगे खर्चअश्लेषा नक्षत्र में गुरु गोचर से 7 राशियों के लिए खुलेंगे प्रगति के मार्ग, 18 दिनों तक रहेगा शुभ समयमणिपुर म्यांमार सीमा पर 2028 तक पूरी होगी 398 किलोमीटर की बाड़बंदी, गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने विधानसभा में दी जानकारीजन्माष्टमी 2026: कान्हा के आगमन से पहले घर ले आएं ये 5 खास चीजें, बनी रहेगी भगवान श्रीकृष्ण की कृपा
अयोध्या राम मंदिर के नए CEO बने जितेंद्र मिश्रा, 1999 कारगिल युद्ध में 12 दिन के तकनीकी चमत्कार से पलटा था जंग का पासाउत्तर प्रदेश
2 सित॰ 2026, 6:00 pm (39 मिनट पहले)· 2

अयोध्या राम मंदिर के नए CEO बने जितेंद्र मिश्रा, 1999 कारगिल युद्ध में 12 दिन के तकनीकी चमत्कार से पलटा था जंग का पासा

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए गए जितेंद्र मिश्रा की पहचान केवल एक कुशल प्रशासक की नहीं है, बल्कि 1999 के कारगिल युद्ध में मिराज 2000 विमानों को लेजर बम प्रणाली से लैस करने वाले उस जांबाज तकनीकी pilot की है जिन्होंने महज 12 दिनों में इतिहास रच दिया था।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद से ही हर तरफ इस अनुभवी सैन्य अधिकारी की चर्चा हो रही है। देश की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र मिश्रा के नाम से भली-भांति परिचित हैं। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पर्दे के पीछे रहकर एक ऐसा अभूतपूर्व तकनीकी कारनामा अंजाम दिया गया था, जिसने युद्ध की पूरी दिशा ही बदल दी थी। उच्च तकनीकी दक्षता और रणनीतिक सूझबूझ के बल पर एक असंभव दिखने वाले मिशन को पूरा करके भारतीय वायुसेना को निर्णायक बढ़त दिलाई गई थी।

1999 कारगिल युद्ध और दुर्गम चोटियों की चुनौती

यह ऐतिहासिक घटनाक्रम वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान का है, जब कारगिल की ऊंची और पथरीली चोटियों पर तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे जा चुका था। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने भारतीय सीमा के भीतर अवैध प्रवेश करके टाइगर हिल, तोलोलिंग और मुंथो ढालो जैसी सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चोटियों पर अपने मजबूत कंक्रीट बंकर बना लिए थे। दुश्मन ऊंचाई वाले स्थानों पर कब्जा जमाकर बैठा था, जिससे नीचे से ऊपर की ओर बढ़ रहे भारतीय सेना के जांबाज जवानों को सीधी गोलाबारी का सामना करना पड़ रहा था। पारंपरिक तोपखाने और सामान्य बमबारी से उन दुर्गम चोटियों पर बने बंकरों को नष्ट करना लगभग असंभव साबित हो रहा था, जिससे भारतीय सीमाओं की रक्षा में एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।

ये भी पढ़ें

ऑपरेशन सफेद सागर और शुरुआती मोर्चे की अड़चनें

इस नाजुक स्थिति में भारतीय वायुसेना ने हवाई हमलों के जरिए दुश्मन का सफाया करने की जिम्मेदारी संभाली और 'ऑपरेशन सफेद सागर' का आगाज किया गया। शुरुआत में श्रीनगर एयर बेस पर उपलब्ध मिग फाइटर जेट्स के जरिए अभियान चलाया गया। हालांकि, दुश्मन ऊंचाई पर स्थित होने के कारण विमानरोधी मिसाइलों से लैस था, जिसके कारण शुरुआती चरण में वायुसेना को अपने कुछ फाइटर जेट खोने पड़े। इस शुरुआती क्षति के बाद सैन्य रणनीतिकारों ने हमले की योजना में बदलाव किया और अचूक निशाना साधने वाले लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल का फैसला लिया गया। उस समय भारतीय वायुसेना के बेड़े में सबसे आधुनिक और शक्तिशाली फाइटर जेट के रूप में मिराज 2000 मौजूद था।

मिराज 2000 और लेजर बम एकीकरण का संकट

नई रणनीति के तहत ग्वालियर एयर बेस पर तैनात मिराज 2000 विमानों से दुश्मन के ठिकानों पर लेजर गाइडेड बम गिराने की योजना तैयार की गई। लेजर गाइडेड बम एक विशेष लेजर बीम के सहारे सीधे दुश्मन के बंकर के प्रवेश द्वार में घुसकर विस्फोट करते हैं और सटीक निशाना साधते हैं। लेकिन इस योजना के सामने एक बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया, क्योंकि मिराज 2000 विमानों में लेजर गाइडेड बमों को फिट करने का काम अधूरा था। वायुसेना पिछले दो वर्षों से इस प्रणाली पर काम कर रही थी, लेकिन बम के फ्यूज को केबल और विमान के ऑनबोर्ड सॉफ्टवेयर सिस्टम से जोड़ने में लगातार अड़चनें आ रही थीं। युद्ध शुरू हो चुका था और हर बीतते दिन के साथ हमारे जवान शहीद हो रहे थे, इसलिए महीनों का समय गंवाने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं थी। इस आपातकालीन मिशन को पूरा करने के लिए एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया, जिसकी कमान स्क्वाड्रन लीडर जितेंद्र मिश्रा के हाथों में सौंपी गई।

अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियां और इजराइल से मिला तकनीकी सहयोग

जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए थे। उड़ान भरने में निपुण होने के साथ-साथ उनके पास वैमानिकी इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों की असाधारण समझ थी। ग्वालियर एयर बेस के हैंगर में दिन-रात एक करके काम शुरू किया गया। इसी बीच अमेरिका ने इस संकट की घड़ी में भारत को तकनीकी सहायता देने से इनकार कर दिया। ऐसे समय में इजराइल भारत के सहयोग के लिए आगे आया। एक इजराइली रक्षा कंपनी ने 'लिटनिंग टारगेटिंग पॉड' विकसित किया था, जो एक उच्च तकनीक वाली इलेक्ट्रॉनिक आंख की तरह काम करता था और जमीन पर स्थित लक्ष्य पर लेजर रोशनी डालकर उसे लॉक कर देता था। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इजराइल के इस पॉड और लेजर बमों को फ्रांस निर्मित मिराज 2000 के कंप्यूटर सिस्टम से कैसे जोड़ा जाए, क्योंकि तीनों की तकनीक, सॉफ्टवेयर कोड और भाषाएं एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न थीं।

स्क्वाड्रन लीडर जितेंद्र मिश्रा का 12 दिनों का तकनीकी चमत्कार

स्क्वाड्रन लीडर जितेंद्र मिश्रा ने इजराइली इंजीनियरों और भारतीय वायुसेना की तकनीकी टीम के साथ मिलकर हैंगर के भीतर मोर्चा संभाला। तारों के जटिल जाल, सर्किट बोर्ड्स और कंप्यूटर कोड्स के बीच बिना सोए लगातार काम जारी रहा। जिस जटिल तकनीकी एकीकरण को पूरा करने में सामान्य परिस्थितियों में 6 महीने से लेकर एक साल तक का समय लगता है, उसे जितेंद्र मिश्रा और उनकी टीम ने अपने तकनीकी कौशल और अटूट समर्पण के बल पर रिकॉर्ड 12 दिनों के भीतर पूरा कर दिखाया। यह भारतीय सैन्य इतिहास का पहला ऐसा अवसर था जब किसी सक्रिय लड़ाकू विमान को इतनी तेजी से संशोधित करके युद्ध के मैदान में उतारा गया था।

24 जून 1999: ऐतिहासिक सटीक हवाई हमला

12 दिनों की दिन-रात की कड़ी मेहनत का वास्तविक परीक्षण 24 जून 1999 की सुबह हुआ। ग्वालियर एयर बेस से संशोधित मिराज 2000 विमानों ने उड़ान भरी और कारगिल के आसमान में प्रवेश किया। टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर दुश्मन अपने बंकरों में खुद को सुरक्षित मानकर बैठा था। तभी जितेंद्र मिश्रा की टीम द्वारा तैयार की गई प्रणाली ने काम करना शुरू किया। लिटनिंग पॉड ने लेजर बीम से दुश्मन के बंकरों को लॉक किया और मिराज विमान से लेजर गाइडेड बम दागे गए। सैकड़ों फीट की ऊंचाई से गिरे इन बमों ने पलक झपकते ही पाकिस्तानी ठिकानों और गोला-बारूद के भंडारों को मलबे में तब्दील कर दिया। भारतीय वायुसेना के इतिहास में युद्ध के दौरान लेजर गाइडेड बमों का यह पहला सफल प्रयोग था, जिसने दुश्मन की कमर तोड़ दी।

युद्ध पर प्रभाव और प्रशासनिक अनुभव

इस सटीक हवाई हमले ने कारगिल युद्ध का पूरा पासा पलट दिया और भारतीय थल सेना को चोटियों पर पुनः कब्जा जमाने में निर्णायक मदद दी। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने भी बाद में स्वीकार किया था कि मिराज 2000 के इन अचूक हमलों और वायुसेना-थल सेना के बेहतरीन समन्वय ने ही 1999 की जंग का रुख मोड़ा था। कारगिल की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद जितेंद्र मिश्रा का करियर निरंतर नई ऊंचाइयों को छूता गया। उन्हें 18 से अधिक विभिन्न प्रकार के फाइटर जेट उड़ाने का अनुभव प्राप्त है और उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक समय तक लड़ाकू विमानों में उड़ान भरी है। एयर मार्शल के पद तक पहुंचे जितेंद्र मिश्रा अब अयोध्या राम मंदिर के नए सीईओ के रूप में अपनी उच्च रणनीतिक और प्रशासनिक क्षमताओं का योगदान देंगे।

सवाल-जवाब

अयोध्या राम मंदिर के नए सीईओ कौन बने हैं?
भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या के राम मंदिर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है।
1999 के कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा का क्या योगदान था?
कारगिल युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन लीडर के रूप में जितेंद्र मिश्रा ने रिकॉर्ड 12 दिनों में मिराज 2000 विमानों में लेजर गाइडेड बम प्रणाली का सफल एकीकरण किया था।
कारगिल युद्ध के समय लेजर गाइडेड बम क्यों जरूरी थे?
टाइगर हिल और मुंथो ढालो की ऊंची चोटियों पर पाकिस्तानी बंकरों को पारंपरिक बमबारी से नष्ट करना असंभव था, जिसके लिए लेजर गाइडेड बमों के सटीक निशाने की जरूरत थी।
मिराज 2000 के संशोधन में किन देशों की तकनीक शामिल थी?
इस आपातकालीन तकनीकी एकीकरण में फ्रांस निर्मित मिराज 2000 विमान, इजराइल का लिटनिंग टारगेटिंग पॉड और लेजर गाइडेड बम शामिल थे।
24 जून 1999 को मिराज 2000 ने क्या ऐतिहासिक कारनामा किया?
24 जून 1999 को ग्वालियर से उड़ान भरकर मिराज 2000 विमानों ने पहली बार युद्ध के दौरान लेजर गाइडेड बमों से कारगिल में दुश्मन के बंकरों और डिपो को पूरी तरह तबाह कर दिया था।
जितेंद्र मिश्रा को फाइटर जेट उड़ाने का कितना अनुभव है?
जितेंद्र मिश्रा के पास 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान उड़ाने का अनुभव है और उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

जितेंद्र मिश्रा की यह पृष्ठभूमि दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील तकनीकी अनुभव वाले अधिकारियों को अब प्रशासनिक और प्रबंधन के बड़े पदों पर तैनात किया जा रहा है। एक सैन्य और तकनीकी रणनीतिकार से अयोध्या राम मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका में जाना प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन के बीच एक नया और अनूठा संतुलन स्थापित करता है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

जितेंद्र मिश्रा की यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले धार्मिक स्थल के प्रबंधन में एक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनके द्वारा दिखाए गए असाधारण तकनीकी कौशल और संकट प्रबंधन की क्षमता का अब अयोध्या में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास को संभालने में सीधा लाभ मिलेगा। यह कदम प्रशासनिक दक्षता और उन्नत सुरक्षा प्रबंधन के बीच एक मजबूत समन्वय स्थापित करेगा, जिसके आने वाले समय में दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR