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रुद्रप्रयाग के नगरासु गुरुद्वारे में तनाव कम, निहंगों ने सेवादार को छोड़ाउत्तराखंड
22 जून 2026, 11:10 am (128 दिन पहले)· 5

रुद्रप्रयाग के नगरासु गुरुद्वारे में तनाव कम, निहंगों ने सेवादार को छोड़ा

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में नगरासु गुरुद्वारे में चल रहा विवाद अब शांत हो रहा है, जहां निहंग सिखों ने बंधक सेवादार को रिहा कर दिया है लेकिन वे अभी भी शीर्ष मंजिल पर बने हुए हैं।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित नगरासु गुरुद्वारे में बीते कुछ समय से चला आ रहा तनाव अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। शनिवार से गुरुद्वारे के ऊपरी हिस्से पर डटे निहंग सिखों ने बंधक बनाए गए सेवादार को अब रिहा कर दिया है। हालांकि, विवाद को पूरी तरह शांत करने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन अभी भी निहंगों से बातचीत की कोशिशों में जुटा हुआ है।

निहंग सिखों की मांग और विवाद की वजह

इस पूरे विवाद की जड़ 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक तलवारबाजी की घटना है। नगरासु गुरुद्वारे की सबसे ऊपरी मंजिल पर मौजूद निहंग सिख मांग कर रहे हैं कि कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार किए गए उनके साथियों को तुरंत रिहा किया जाए। इसके साथ ही, वे इस पूरे घटनाक्रम में शामिल स्थानीय व्यापारियों और लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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गुरुद्वारा प्रबंधन का पक्ष और नुकसान का दावा

नगरासु गुरुद्वारे के बाबा बेअंत सिंह ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि निहंग सिख दो दिन पहले यहां आए और सेवादारों के साथ गाली-कॉलेज व मारपीट करने लगे। प्रबंधन ने उन्हें रात में ठहरने की जगह और भोजन दिया, लेकिन अगली सुबह उन्होंने फिर विवाद शुरू कर दिया। बाहर खड़ी पुलिस को देखकर वे घबरा गए और सीधे पांचवीं मंजिल पर चले गए। बाबा बेअंत सिंह का आरोप है कि वहां जाकर उन्होंने दीवारों को तोड़ा, सोलर पैनल खराब कर दिए और पानी की सप्लाई भी काट दी। उन्होंने पुलिस, स्थानीय दुकानदारों और लोगों पर पथराव भी किया, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उनका यह भी कहना है कि जहर मिलाए जाने के शक में निहंगों ने कल से गुरुद्वारे का भोजन लेने से इनकार कर दिया है।

प्रशासनिक कार्रवाई और इंटरनेट सेवा की बहाली

इलाके में तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार शाम को एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। लगभग 12 घंटे तक बंद रहने के बाद, रविवार शाम करीब 5 बजकर 20 मिनट पर इंटरनेट सेवा दोबारा चालू कर दी गई। रुद्रप्रयाग के DM विशाल मिश्रा और SP निहारिका तोमर लगातार निहंगों से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि समस्या का शांतिपूर्ण हल निकाला जा सके।

DM विशाल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि गुरुद्वारे पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं है और न ही अब कोई बंधक है। गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और नियमित प्रार्थनाएं बिल्कुल सामान्य और शांतिपूर्ण तरीके से चल रही हैं। श्रद्धालु और यात्री बिना किसी डर के वहां आ-जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे बंधक बनाए जाने या हिंसा से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।

मुख्यमंत्रियों की बातचीत और सुलह की कोशिशें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से इस विषय पर बातचीत की है। उन्होंने दोनों पक्षों की बात सुनकर शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड की सिख संगत से भी शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि पंजाब सरकार हर संभव मदद के लिए तैयार है। इस बीच, एक निहंग सिख का बयान भी सामने आया है जिसमें उन्होंने प्रबंधन से विवाद की बात स्वीकार करते हुए आज ही वापस लौटने का संकेत दिया है।

सवाल-जवाब

नगरासु गुरुद्वारे में निहंग सिख क्यों विरोध कर रहे हैं?
वे 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई तलवारबाजी की घटना में गिरफ्तार अपने साथियों की रिहाई और स्थानीय लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
क्या गुरुद्वारे में बंधक बनाए गए सेवादार का मामला सुलझ गया है?
हां, निहंग सिखों ने बंधक बनाए गए गुरुद्वारे के सेवादार को छोड़ दिया है, हालांकि वे अब भी इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर डटे हुए हैं।
गुरुद्वारे में किस तरह के नुकसान की बात कही गई है?
गुरुद्वारे के बाबा बेअंत सिंह के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सोलर पैनलों को नष्ट किया, पानी की सप्लाई काटी और पथराव किया जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
क्या रुद्रप्रयाग में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं?
हां, शनिवार शाम से एहतियात के तौर पर लगभग 12 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं, जिन्हें रविवार शाम करीब 5:20 बजे दोबारा बहाल किया गया।
क्या गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया गया है?
नहीं, DM विशाल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि गुरुद्वारे पर कोई कब्जा नहीं हुआ है और अरदास तथा लंगर जैसी गतिविधियां हमेशा की तरह शांतिपूर्वक चल रही हैं।
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