भारतीय सिनेमा के जाने-माने अभिनेता सनी देओल और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर सिनेमाघरों में साथ वापसी कर रहे हैं। दोनों की नई ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म बंटवारा 1947 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 अगस्त 2026 को रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म का ट्रेलर हाल ही में सामने आया, जिसके बाद मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्माताओं, निर्देशक और कलाकारों ने फिल्म के कथानक, किरदारों तथा निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया।
तीन दशकों का इंतजार और पुरानी हिट फिल्मों की यादें
सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने 1990 के दशक में घायल, दामिनी और घातक जैसी कई यादगार और सुपरहिट फिल्में दी थीं। हालांकि, इन ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद दोनों ने लंबे समय तक किसी प्रोजेक्ट में साथ काम नहीं किया। इस लंबे अंतराल के बारे में बात करते हुए सनी देओल ने स्पष्ट किया कि उनके और निर्देशक के बीच कभी कोई व्यक्तिगत मनमुटाव नहीं रहा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 के शुरुआती दौर से ही वे साथ में नया काम शुरू करने की कोशिश कर रहे थे। उस दौरान राजकुमार संतोषी ने सम्राट अशोक और महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान जैसे विषयों पर आधारित कहानियां तैयार की थीं। हालांकि, उस समय फिल्म निर्माताओं को लगता था कि यह विषय व्यावसायिक रूप से उतने बिक्री योग्य नहीं हैं, जिसके कारण वे प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सके।
'गदर 2' की सफलता और आमिर खान की भूमिका
साल 2023 में बॉक्स ऑफिस पर आई फिल्म गदर 2 की अभूतपूर्व सफलता ने सनी देओल के करियर में एक नया मोड़ लाया। इस सफलता के बाद उद्योग में परिस्थितियों में बदलाव आया और अभिनेता आमिर खान इस प्रोजेक्ट से बतौर निर्माता जुड़ गए। आमिर खान ने इस कहानी को काफी पहले सुना था और वे इसे बड़े पर्दे पर लाने के लिए बेहद उत्सुक थे। इसके बाद उन्होंने सनी देओल को फिल्म में मुख्य किरदार सिकंदर मिर्जा की भूमिका के लिए चुना। सनी देओल ने बताया कि यह कहानी वर्ष 2010 से ही तैयार रखी हुई थी, लेकिन सही समय और आमिर खान के समर्थन के कारण अब यह दर्शकों के सामने आ पा रही है।
'गदर' के तारा सिंह और 'बंटवारा 1947' के सिकंदर मिर्जा में अंतर
फिल्म का ट्रेलर जारी होने के बाद, जिसमें सनी देओल का किरदार पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में संघर्ष करता दिखता है, कई लोगों ने इसकी तुलना गदर से करनी शुरू कर दी। हालांकि, सनी देओल ने इस तुलना को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गदर का तारा सिंह एक मस्तमौला, संगीत प्रेमी और रोमांटिक स्वभाव का व्यक्ति था, जिसकी कहानी विभाजन की पृष्ठभूमि में रची गई एक प्रेम कथा थी। इसके विपरीत, बंटवारा 1947 में उन्हें कोई रोमांटिक पहलू निभाने का अवसर नहीं मिला है। यह फिल्म उन परिवारों के दर्द, संघर्ष और त्रासदी को दर्शाती है जो विभाजन के दौरान अपने घरों से बेघर हो गए थे और विस्थापन का गहरा मानसिक आघात झेल रहे थे।
किरदार की बहादुरी और सामाजिक कट्टरता के खिलाफ लड़ाई
निर्देशक राजकुमार संतोषी ने सनी देओल के किरदार सिकंदर मिर्जा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उसकी तुलना दुनिया के सबसे बड़े काल्पनिक सुपरहीरो से की। उनका कहना है कि उन्होंने अपने करियर में घायल और घातक जैसी फिल्मों के लिए कई मजबूत एक्शन किरदार लिखे हैं, लेकिन बंटवारा 1947 का सिकंदर मिर्जा उन सब में सबसे बहादुर और नैतिक रूप से सशक्त इंसान है। उन्होंने कहा कि यदि आयरन मैन और सुपरमैन की ताकतों को भी मिला दिया जाए, तो भी यह किरदार अपनी आतंरिक ताकत और दृढ़ता में उनसे कहीं आगे खड़ा नजर आता है।
राजकुमार संतोषी के अनुसार, एक सामान्य इंसान किसी दूसरे व्यक्ति, समूह या सेना से तो शारीरिक रूप से लड़ सकता है, लेकिन समाज में फैली कट्टरता और नफरत के खिलाफ खड़े होना सबसे कठिन काम होता है। इस फिल्म में सनी देओल का किरदार किसी शारीरिक शत्रु से लड़ने के बजाय कट्टरपंथी सोच और नैतिक संकट के खिलाफ खड़ा होता है। इसके लिए अत्यधिक शारीरिक क्षमता के साथ-साथ अटूट नैतिक साहस की आवश्यकता होती है, जो इस चरित्र को बेहद खास बनाता है।
प्रसिद्ध नाटक पर आधारित कहानी और शबाना आजमी की मुख्य भूमिका
फिल्म बंटवारा 1947 की मूल कहानी असगर वजाहत के बहुचर्चित और ऐतिहासिक नाटक जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जमया नई पर आधारित है। फिल्म की पटकथा एक ऐसे मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जो विभाजन के बाद भारत छोड़ कर लाहौर चला जाता है। वहां यह परिवार एक परित्यक्त हिंदू मकान में रहने लगता है। हालांकि, उस घर में उन्हें एक बुजुर्ग हिंदू महिला मिलती है, जिनका किरदार वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने निभाया है। वह महिला अपना पुराना घर छोड़कर कहीं भी जाने से साफ इनकार कर देती है। फिल्म में सनी देओल का किरदार सिकंदर मिर्जा उस बुजुर्ग महिला की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाता है और इसके लिए वह अपने ही परिवार के विरोध और खतरों का सामना करने से पीछे नहीं हटता।
देओल परिवार का व्यक्तिगत जुड़ाव और धर्मेंद्र की प्रतिक्रिया
सनी देओल के लिए यह फिल्म केवल एक व्यावसायिक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इसका उनके पारिवारिक इतिहास से भी गहरा संबंध है। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब से ताल्लुक रखता है, जहां विभाजन का प्रभाव और दर्द सबसे ज्यादा महसूस किया गया था। सनी देओल ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों से विभाजन के समय की कई सच्ची कहानियां सुनी थीं। जब राजकुमार संतोषी इस कहानी का विवरण देने उनके घर आए थे, तब उनके पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र भी वहां मौजूद थे। कहानी सुनते समय धर्मेंद्र बेहद भावुक हो गए थे। धर्मेंद्र ने पिछले वर्ष नवंबर में अपने निधन से पहले इस फिल्म का पूरा शो देखा था और इसके संदेश तथा प्रस्तुति की काफी सराहना की थी।
मनोरंजन, मानवीय संवेदनाएं और तकनीकी टीम
राजकुमार संतोषी ने अपनी सिनेमाई सोच को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे दर्शकों को कोई उपदेश या संदेश देने के उद्देश्य से फिल्में नहीं बनाते। उनका प्राथमिक लक्ष्य दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बंटवारा 1947 एक अत्यधिक भावनात्मक और इंसानी संवेदनाओं से भरी फिल्म है, जिसे देखते समय दर्शक धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर केवल किरदार के इंसानी पहलू और उसके संघर्ष से जुड़ेंगे।
फिल्म के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो इसमें संगीत निर्देशन ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने किया है, जबकि गीतों की रचना प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने की है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म को बिना किसी दृश्य या संवाद कटौती के 'ए' (A) प्रमाण पत्र देकर पास किया है। यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।


















