देश में आम लोगों के कर्ज की ब्याज दरों से लेकर महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास दर की रफ्तार तय करने की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC संभालती है। 5 अगस्त बुधवार को जब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की रेपो दर को स्थिर बनाए रखने के फैसले का ऐलान किया, तो यह किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। इस फैसले के पीछे 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति के गहन मंथन और तर्कों की सहमति शामिल थी। इसी प्रभावशाली समिति में शामिल डॉ पूनम गुप्ता मौजूदा समय में इकलौती महिला सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। बैंकिंग और आर्थिक नीतियों की दुनिया में पूनम गुप्ता एक ऐसा नाम हैं, जिनकी विशेषज्ञता का लोहा देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है।
आरबीआई डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्ति और कार्यकाल
पूनम गुप्ता केवल मौद्रिक नीति समिति की सदस्य ही नहीं हैं, बल्कि उनके पास भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर पद की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में उन्हें 3 साल के तय कार्यकाल के लिए आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया था। उन्होंने इस पद पर पूर्व डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा का स्थान लिया था, जिन्होंने साल 1985 से रिजर्व बैंक के साथ जुड़ने के बाद 2020 से 2025 तक डिप्टी गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। रिजर्व बैंक में यह शीर्ष जिम्मेदारी संभालने से ठीक पहले पूनम गुप्ता देश के प्रमुख आर्थिक नीति थिंक टैंक नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च यानी NCAER की महानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। उनकी अंतरराष्ट्रीय वित्त और मैक्रोइकनॉमिक नीतियों की गहरी समझ को देखते हुए ही रिजर्व बैंक के नेतृत्व दल में उन्हें शामिल किया गया।
वॉशिंगटन में विश्व बैंक और आईएमएफ के साथ दो दशकों का अनुभव
पूनम गुप्ता की वैश्विक साख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में करीब 20 वर्षों तक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में कार्य किया है। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF में अपनी लंबी सेवाओं के दौरान उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नीतिगत ढांचे तैयार करने पर केंद्रित होकर काम किया। NCAER की महानिदेशक के रूप में भी उन्होंने देश के आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली, समष्टि आर्थिक स्थिरता और विभिन्न भारतीय राज्यों की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कई रिसर्च स्टडीज का नेतृत्व किया था।
प्रधानमंत्री की सलाहकार परिषद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व
केंद्रीय बैंक में आने से पहले पूनम गुप्ता ने भारत सरकार के शीर्ष नीतिगत मंचों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद यानी PM-EAC की सदस्य रह चुकी हैं और उन्होंने 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के समन्वयक का प्रभार भी संभाला है। पिछले वर्ष आयोजित हुए जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने मैक्रोइकनॉमिक्स एंड ट्रेड विषय पर गठित अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता की थी। इन शीर्ष संस्थाओं में उनके सुझावों ने देश की व्यापारिक और वित्तीय नीतियों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है।
शिक्षण संस्थान, शोध पत्र और प्रतिष्ठित सम्मान
नीति निर्माण के अलावा पूनम गुप्ता का शैक्षणिक जगत में भी एक प्रतिष्ठित करियर रहा है। उन्होंने इकोनॉमिक्स में पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में कई वर्षों तक प्रोफेसर के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दिल्ली स्थित इंडियन स्टैटिसटिकल इंस्टीट्यूट में विजिटिंग फैकल्टी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में आरबीआई चेयर प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।
रिसर्च के क्षेत्र में उनका योगदान बेहद उल्लेखनीय है। अब तक उनके 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, जो द इकोनॉमिस्ट, द फाइनेंशियल टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और जर्नल्स में स्थान पा चुके हैं। माइक्रोइकनॉमिक्स, इंटरनेशनल ट्रेड और ग्लोबल फाइनेंस पर उनके असाधारण डॉक्टरेट शोध के लिए उन्हें वर्ष 1998 में प्रतिष्ठित एक्जिम बैंक अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।


















