उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित पौराणिक बाबा बागनाथ मंदिर न केवल आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि यहां की एक नई पहचान लोगों को अपनी ओर खींच रही है। मंदिर परिसर के ठीक बाहर स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा अपनी सुनहरी चमक के कारण आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित करती है। इस भव्य कलाकृति के साथ तस्वीर खिंचवाने का आकर्षण ऐसा है कि भक्त अपनी पूजा-अर्चना संपन्न करने के बाद इस जगह पर जरूर पहुंचते हैं। दिन ढलने के बाद जब संध्या आरती का समय होता है और सूर्यास्त के पश्चात पूरा मंदिर क्षेत्र रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा उठता है, तब इस प्रतिमा का सौंदर्य और अधिक निखर कर सामने आता है, जिसे कैमरे में कैद करने के लिए लोग बेताब रहते हैं।
सेल्फी पॉइंट और प्राकृतिक सौंदर्य
स्थानीय जानकारों के अनुसार इस मूर्ति के आसपास का क्षेत्र हमेशा सैलानियों से गुलजार रहता है और सेल्फी लेने वालों की कतारें आम बात हैं। बागेश्वर की यात्रा पर आने वाला शायद ही कोई ऐसा मुसाफिल्ट होगा जो इस जगह की यादों को अपने साथ न समेटे। प्रतिमा के बिल्कुल पास में बने बागनाथ पुल के कारण अब लोगों को सीढ़ियों पर खड़े होकर इसके साथ बेहतरीन फ्रेम में तस्वीरें लेने का अनूठा अवसर मिलता है। इस फ्रेम की खूबी यह है कि जब कोई व्यक्ति तस्वीर खिंचवाता है, तो उसके पीछे पृष्ठभूमि में लहलहाते हुए हरे-भरे पहाड़ और कलकल करती नदियां प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत नजारा पेश करती हैं, जो हर किसी का मन मोह लेता है।
एक जन प्रतिनिधि का खास सपना
इस आकर्षक मूर्ति के निर्माण के पीछे एक खास राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है। यह विशाल कलाकृति तत्कालीन विधायक के विशेष प्रयासों का परिणाम है और उनके प्रमुख सपनों के प्रोजेक्ट्स में से एक थी। इस भव्य शिव मूर्ति को तैयार करने में विधायक निधि से कुल 11 लाख रुपये की राशि खर्च की गई थी। इस मूर्ति का अनावरण नवंबर 2016 में किया गया था। इस कलाकृति में भगवान शिव को अत्यंत शांत और ध्यान की मुद्रा में दर्शाया गया है। प्रतिमा के निचले हिस्से में बाघ का आसन बनाया गया है और उसके ऊपर साक्षात शिव जी ध्यानमग्न अवस्था में विराजमान हैं। उनके गले में नाग लिपटा हुआ है और एक हाथ में त्रिशूल सुशोभित है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान अपने भक्तों को साक्षात दर्शन दे रहे हैं। इस पूरी संरचना को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित किया गया है ताकि वहां की विशाल प्रतिमाओं की तरह ही बागेश्वर आने वाले सैलानियों को भी एक भव्य धार्मिक अनुभव मिल सके।
पौराणिक महत्व और शिवनगरी का इतिहास
बागनाथ मंदिर का प्रांगण उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शुमार है। इस संपूर्ण क्षेत्र को शिवनगरी के नाम से भी पुकारा जाता है, जिसके पीछे एक गहरा पौराणिक इतिहास छिपा हुआ है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में मारकंडेय ऋषि ने इसी पवित्र भूमि पर कठोर तपस्या की थी। उस दौरान सरयू नदी को अयोध्या की ओर बहकर जाना था, लेकिन ऋषि की साधना में कोई बाधा न आए और उनके तप के प्रभाव से नदी आगे नहीं बढ़ पा रही थी, इसलिए उन्होंने देवों के देव महादेव से सहायता की गुहार लगाई थी। तब भगवान शिव ने इस धरती पर एक बाघ के रूप में और माता पार्वती ने एक गाय के रूप में अपने अलौकिक दर्शन दिए थे। उसी पौराणिक काल से लेकर आज तक इस स्थान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अनवरत बना हुआ है।
पर्यटन को बढ़ावा और सोशल मीडिया का क्रेज
इन प्राचीन और लोक प्रसिद्ध मान्यताओं के कारण देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस पावन धाम में पहुंचते हैं और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थान पर इतनी विशाल शिव प्रतिमा का स्थापित होना यहां आने वाले भक्तों की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ करता है। इसके साथ ही इस प्रतिमा के कारण स्थानीय पर्यटन को भी अभूतपूर्व मजबूती मिली है और क्षेत्र की आर्थिकी में सुधार हुआ है। आज के दौर में युवाओं के बीच इस मूर्ति के वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने का भारी क्रेज देखा जा सकता है। आए दिन इंटरनेट पर इस प्रतिमा के अलग-अलग एंगल से बनाए गए वीडियो खूब वायरल होते रहते हैं। खासतौर पर जब मौसम सुहाना होता है, हल्की बारिश हो रही होती है या फिर आसमान में तेज धूप खिली होती है, उस वक्त इस लोकेशन के वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में पसंद किए जाते हैं। दूर-दराज के अन्य शहरों और जिलों से लोग विशेष तौर पर इस मूर्ति के दर्शन करने और इसके साथ फ्रेम में कैद होने के लिए बागेश्वर की यात्रा करते हैं। अक्सर यात्रियों को यह पूछते हुए सुना जाता है कि वह प्रसिद्ध बड़ी सी शिवमूर्ति कहां है जिसके साथ उन्हें तस्वीर लेनी है। इन तमाम बातों से यह स्पष्ट है कि यह प्रतिमा आज बागेश्वर में पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने में एक विशेष और निर्णायक भूमिका निभा रही है।





















