उत्तराखंड के सीमांत पर्वतीय जिलों में आवागमन को सुगम बनाने और संकरी सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लोक निर्माण विभाग ने पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से होकर गुजरने वाले स्टेट हाईवे पर 33 ऐसे पुलों की पहचान की है, जिन्हें चौड़ा करके डबल लेन में तब्दील किया जाएगा। पर्वतीय मार्गों पर बने ये पुल दशकों से सिंगल लेन ढांचे के रूप में काम कर रहे थे, जिसके चलते बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच यहां लगातार जाम की स्थिति बन रही थी। इन पुलों के चौड़ीकरण से न सिर्फ यात्रा का समय काफी कम होगा, बल्कि संकरे मोड़ों और बॉटलनेक पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
दो पहाड़ी जिलों में 33 संकरे पुलों का हुआ चयन
सीमावर्ती इलाकों में हाल के वर्षों में आम नागरिकों के वाहनों, पर्यटन और निर्माण गतिविधियों के चलते यातायात में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौजूदा समय में जब भी कोई भारी वाहन या बस इन सिंगल लेन पुलों से गुजरती है, तो दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने पूरी कार्ययोजना तैयार की है। तय योजना के तहत कुल 33 पुलों का कायाकल्प किया जाएगा। इनमें से पिथौरागढ़ जिले के भौगोलिक क्षेत्र में पड़ने वाले 22 पुल शामिल हैं, जबकि चंपावत जिले में स्थित 11 संकरे पुलों को डबल लेन बनाने के लिए चयनित किया गया है।
लोडिंग क्षमता को बी क्लास से बढ़ाकर ए क्लास किया जाएगा
पीडब्ल्यूडी के एसई एचसी ह्यांकी ने योजना की तकनीकी बारीकियों को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि स्टेट हाईवे पर मौजूद पुराने पुल वर्तमान में बी क्लास लोडिंग क्षमता के अनुसार बने हैं। बदलते दौर में भारी निर्माण उपकरणों और बड़े ट्रकों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए अब इन्हें ए क्लास लोडिंग क्षमता वाले मजबूत पुलों में बदला जा रहा है। इस संरचनात्मक बदलाव से भारी भार ले जाने वाले वाहन बिना किसी तकनीकी रुकावट, वजन की पाबंदी या पुल को नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे।
एडीबी और नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से तैयार होंगी परियोजनाएं
इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए वित्तीय पोषण की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है। चंपावत जिले के सभी 11 पुलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर पूरी करके शासन को सौंप दी गई है। चंपावत के इन निर्माण कार्यों के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक आवश्यक आर्थिक मदद उपलब्ध कराएगा, जिससे जमीनी स्तर पर टेंडर और निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। वहीं दूसरी ओर, पिथौरागढ़ जिले के 22 पुलों में से एक दर्जन से अधिक पुलों की डीपीआर पहले ही तैयार हो चुकी है, जबकि शेष 9 पुलों की डीपीआर भी जल्द शासन को भेज दी जाएगी। पिथौरागढ़ के पुलों के चौड़ीकरण का कार्य नाबार्ड की वित्तीय सहायता से पूरा किया जाएगा।
सीमांत व्यापार, पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार
राजमार्ग के इन महत्वपूर्ण ढांचों को मजबूत बनाने की पहल का स्थानीय लोगों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने खुले दिल से स्वागत किया है। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर खड़ायत के अनुसार, पिथौरागढ़ में 22 पुलों को चौड़ा करने का फैसला सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस समय कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जिनके लिए भारी निर्माण सामग्री की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी है। इन पुलों के डबल लेन होने से जहां आम जनता और मरीजों को आपात स्थिति में सुगम सफर मिलेगा, वहीं स्थानीय कारोबारियों को माल ढुलाई में समय और खर्च दोनों की सीधी बचत होगी।
























