पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही वातावरण में तेजी से ठंडक घुलने लगी है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से साझा की गई ताजा जानकारी के अनुसार, राज्य के आठ प्रमुख जनपदों में मौसम करवट ले रहा है। पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी वापसी के दौर के बीच वायुमंडल में आए बदलावों के चलते घाटी से लेकर मैदानी भागों तक बादलों की सक्रियता बढ़ने लगी है। इसी क्रम में 6 से 09 अक्टूबर की अवधि के लिए येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है, ताकि स्थानीय नागरिक, प्रशासनिक एजेंसियां और यात्रा पर निकले श्रद्धालु पहले से आवश्यक सावधानी बरत सकें।
मैदानी भागों में धूल भरी हवाएं और आकाशीय बिजली का साया
राजधानी देहरादून सहित हरिद्वार जिले में तेज मौसमी हलचल दर्ज की जा सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान व्यक्त किया है कि इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही आसमान में बादलों की तेज गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका बनी हुई है। धर्मनगरी हरिद्वार और आसपास के तराई वाले इलाकों में इस मौसमी बदलाव से उमस भरी गर्मी का असर तो थमा है, लेकिन अचानक तापमान में आई गिरावट के कारण सुबह और शाम के समय सिहरन महसूस होने लगी है। तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भी सुबह से ही घटाएं घिरी हुई हैं और देर शाम गरज के साथ बौछारें पड़ने का क्रम जारी है।
कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा से बढ़ी ठिठुरन
कुमाऊं मंडल के अंतर्गत आने वाले नैनीताल, अल्मोड़ा और चम्पावत जनपदों में भी मौसमी परिस्थितियों के प्रतिकूल बने रहने की चेतावनी दी गई है। नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और निचली घाटियों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा रही है। अचानक हुई इस बारिश के कारण वादियों में पारे का स्तर तेजी से लुढ़का है, जिससे स्थानीय बाशिंदों के साथ-साथ घूमने पहुंचे सैलानियों को भी गर्म ऊनी कपड़े निकालने पड़े हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इन पर्वतीय जिलों में कई स्थानों पर तेज झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम बना हुआ है, जिससे पहाड़ी मार्गों पर फिसलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
गढ़वाल के ऊंचाई वाले इलाकों में सतर्कता के निर्देश
गढ़वाल संभाग के दो प्रमुख जनपदों टिहरी और पौड़ी में भी वायुमंडलीय अस्थिरता का प्रभाव साफ देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने इन दोनों पर्वतीय जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से आंधी चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अनुमान जारी किया है। टिहरी झील के जलक्षेत्र और आसपास की ऊंची पहाड़ियों पर बादलों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम दर्जे की फुहारें पड़ रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 09 अक्टूबर को भी टिहरी और पौड़ी सहित गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों में मौसमी तेवर ऐसे ही बने रहने की संभावना है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है।
तराई में आंधी का अंदेशा, हिमालयी चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर
तराई क्षेत्र के जनपद उधम सिंह नगर में आज बिजली कड़कने के साथ-साथ तेज गति की झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच 11 और 12 अक्टूबर के आसपास हरिद्वार और उधम सिंह नगर में मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना भी जताई गई है। दूसरी तरफ, उच्च हिमालयी श्रृंखलाओं में बसे जनपदों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में स्थित 4200 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले शिखरों पर ताजा हिमपात होने की पूरी संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "9 से 12 अक्टूबर के बीच करीब 3800 मीटर की ऊंचाई तक भी बर्फबारी का दायरा नीचे आ सकता है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 24 घंटों में मैदानी क्षेत्रों में पारा सामान्य से ऊपर रहा जबकि पहाड़ों पर सामान्य या उससे कम दर्ज हुआ, जिससे आने वाले दिनों में कड़ाके की सर्दी तेजी से पांव पसारेगी।
























