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उत्तराखंड में मानसून का कहर जारी, बागेश्वर में हाईवे समेत 12 रास्ते बंद और 13 जिलों में भारी बारिश की चेतावनीउत्तराखंड
9 सित॰ 2026, 5:56 am (2 घंटे पहले)· 2

उत्तराखंड में मानसून का कहर जारी, बागेश्वर में हाईवे समेत 12 रास्ते बंद और 13 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जहां मौसम विभाग ने 14 सितंबर तक कई जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया है।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून के आक्रामक रुख के कारण जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है। पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी जिलों तक लगातार हो रही बारिश और दरकती पहाड़ियों ने आम लोगों की चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं। देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 9 सितंबर के संदर्भ में नया अपडेट जारी करते हुए राज्य के सभी पर्वतीय जनपदों के लिए अलर्ट घोषित किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में गरज और चमक के साथ बादलों के तेज दौर आने तथा बिजली गिरने की तीव्र संभावना बनी हुई है। विशेष रूप से बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी तथा नैनीताल जैसे अति-संवेदनशील ढलानों वाले इलाकों में निवास करने वाली आबादी को बेहद सावधान रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़कों पर आ रहे मलबे ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ मुसाफिरों की राह भी मुश्किल कर दी है।

बागेश्वर में तबाही: नेशनल हाईवे ठप, कई गांवों का कटा संपर्क

बागेश्वर जिले में मूसलाधार बारिश के चलते हालात सबसे अधिक चिंताजनक बने हुए हैं। देहरादून-गरुड़-बागेश्वर को जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109K) पर रवाइंखाल के समीप पहाड़ी से भारी-भरकम बोल्डर और भारी मात्रा में मलबे का सैलाब आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क मार्ग को दुरुस्त करने के काम में बीआरओ की पोकलेन और जेसीबी मशीनें निरंतर जुटी हुई हैं, किंतु ऊपर पहाड़ी से रुक-रुक कर गिर रहे पत्थरों के कारण राहत कर्मियों को अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि यह मार्ग पिछले एक सप्ताह से खतरनाक लैंडस्लाइड जोन बना हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग के अतिरिक्त, जिले के अंदरूनी ग्रामीण इलाकों की 12 अन्य सड़कें भी भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी हैं। सड़कों पर आवागमन बंद होने के कारण दूरदराज के गांवों तक दूध, राशन और हरी सब्जियों जैसी बुनियादी चीजों की आपूर्ति बाधित हो गई है, जबकि सड़कों के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं और लोग घंटों से मार्ग सुचारू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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कपकोट के बघर में जमीन धंसने से दहशत, पैदल निकलने को मजबूर लोग

बागेश्वर जिले के अंतर्गत आने वाली कपकोट तहसील के बघर गांव में परिस्थितियां बेहद विकट रूप ले चुकी हैं। गांव को तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले तमाम मुख्य संपर्क मार्ग जगह-जगह भूस्खलन होने से बह गए हैं। संपर्क कट जाने के अलावा गांव के कई हिस्सों से जमीन धंसने की डरावनी खबरें आई हैं। भू-धंसाव के कारण कई मकानों की दीवारों में दरारें आने की आशंका उत्पन्न हो गई है, जिससे ग्रामीणों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल है। सुरक्षा का कोई अन्य उपाय न देखकर लोग अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक पैदल पगडंडियों के जरिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को विवश हैं।

कुमाऊं की लाइफलाइन पर ब्रेक: अल्मोड़ा-खैरना हाईवे पर भारी वाहनों पर रोक

कुमाऊं क्षेत्र की मुख्य जीवन रेखा माने जाने वाले अल्मोड़ा-खैरना हाईवे पर क्वारब के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा लगातार दरक रहा है, जिससे सफर जानलेवा साबित हो सकता है। खतरे की भयावहता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए हैं। 8 और 9 सितंबर को इस मुख्य मार्ग के साथ-साथ इसके बाईपास से भी भारी व्यावसायिक वाहनों और उत्तराखंड रोडवेज की बसों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केवल छोटे निजी वाहनों को ही पूरी सतर्कता बरतते हुए गुजरने की अनुमति दी जा रही है।

मैदानी इलाकों में बादलों का पहरा, 10 सितंबर से पलटेगा मौसम

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित आसपास के मैदानी क्षेत्रों में 9 सितंबर को धूप और छांव का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिल रहा है। दिन के समय देहरादून के अधिकांश भागों में हल्के बादल छाए रहने के साथ हल्की धूप खिली रही, हालांकि शाम के वक्त कुछ हिस्सों में तेज बौछारें पड़ने की उम्मीद जताई गई है। दूसरी तरफ हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे तराई वाले जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। इसके बावजूद मैदानी क्षेत्रों के निवासियों को उमस भरी गर्मी से खास राहत नहीं मिली है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि देहरादून में 10 सितंबर से मौसम का रुख अचानक ज्यादा कठोर हो जाएगा और 12 सितंबर तक भारी वर्षा का नया दौर जारी रह सकता है।

सरोवर नगरी और सीमांत इलाकों में अलर्ट, नदी-नालों से दूर रहने की सलाह

पर्यटन नगरी नैनीताल और भारत के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में 9 सितंबर को पूरे दिन बादलों का कड़ा पहरा रहने की संभावना है। इन दोनों जिलों के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम श्रेणी की वर्षा दर्ज की जा सकती है। मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में 10 और 11 सितंबर को मूसलाधार बारिश होने की प्रबल आशंका है, जिससे पहाड़ी रास्तों पर अचानक पत्थर गिरने की घटनाएं कई गुना बढ़ सकती हैं। अल्मोड़ा शहर तथा आसपास की निचली घाटियों में भी हल्की बारिश होने से तापमान में नरमी आएगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीमांत इलाकों के प्रशासन ने नदियों और बरसाती नालों के करीब रहने वाले लोगों को जलस्तर में बढ़ोतरी होते ही तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की सलाह दी है।

चारधाम यात्रा मार्ग पर कुदरत का इम्तिहान: 10 से 12 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट

गढ़वाल मंडल में स्थित पवित्र चारधाम यात्रा मार्ग से जुड़े चार प्रमुख जिलों टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 9 सितंबर को स्थानीय स्तर पर बादलों की गर्जना के साथ बारिश के एक से दो दौर देखने को मिल सकते हैं। परंतु असली परीक्षा 10 सितंबर से आरंभ होगी। मौसम विभाग के शेड्यूल के मुताबिक, 10 सितंबर को टिहरी जिले में, 11 सितंबर को टिहरी, रुद्रप्रयाग एवं चमोली में, और 12 सितंबर को उत्तरकाशी जिले में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे राज्य में 14 सितंबर तक मानसूनी हवाएं पूर्ण रूप से सक्रिय रहेंगी, जिसके चलते लगभग सभी 13 जिलों के अधिकांश इलाकों में समय-समय पर हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन के साथ बौछारें गिरती रहेंगी।

सवाल-जवाब

9 सितंबर को उत्तराखंड के किन जिलों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है?
बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी और नैनीताल जिलों में संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले लोगों को सावधान रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बागेश्वर में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109K) क्यों बंद है?
देहरादून-गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रवाइंखाल के पास पहाड़ी से विशालकाय बोल्डर और मलबा गिरने के कारण यातायात पूरी तरह ठप पड़ा है।
कपकोट तहसील के बघर गांव में क्या स्थिति है?
बघर गांव को जोड़ने वाले सड़क मार्ग भूस्खलन से बह गए हैं और गांव में जमीन धंसने की घटनाओं से मकानों में दरारें पड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
अल्मोड़ा-खैरना हाईवे पर भारी वाहनों पर कब तक रोक लगाई गई है?
क्वारब के पास पहाड़ी दरकने के कारण प्रशासन ने 8 और 9 सितंबर को भारी वाहनों और रोडवेज बसों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था।
चारधाम यात्रा रूट के जिलों में भारी बारिश का अलर्ट कब-कब है?
10 सितंबर को टिहरी में, 11 सितंबर को टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली में, तथा 12 सितंबर को उत्तरकाशी जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और राष्ट्रीय राजमार्गों का ठप होना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा सवालिया निशान है। बार-बार अवरुद्ध होने वाले मार्ग और भू-धंसाव की घटनाओं से यह स्पष्ट है कि संवेदनशील क्षेत्रों में ढांचागत विकास और समय पर राहत कार्यों की रणनीति को नए सिरे से परखने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा जनजीवन और सार्वजनिक सुरक्षा को ऐसे ही गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह संकट केवल पर्वतीय भूगोल और भारी बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह भी साफ है कि पहाड़ी जनपदों में कनेक्टिविटी टूटने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति चेन बुरी तरह चरमरा जाती है। जब बागेश्वर जैसे जिलों में हाईवे और ग्रामीण संपर्क मार्ग ठप होते हैं, तो दूरदराज के गांवों में राशन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं तक पहुंचना असंभव हो जाता है। यदि समय रहते संवेदनशील ढलानों पर वैज्ञानिक स्थायी समाधान और मजबूत वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किए गए, तो मानसून के दौरान पहाड़ी अर्थव्यवस्था और जनजीवन को हर साल इसी प्रकार के गंभीर व्यवधानों का सामना करना पड़ेगा।

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