जामुन खाने के बाद ज्यादातर लोग उसकी गुठली फेंक देते हैं, लेकिन आयुर्वेद और पारंपरिक इलाज की दुनिया में इस गुठली को सुखाकर उसका पाउडर बनाने का चलन सदियों पुराना है. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर को काबू में रखने में मदद कर सकते हैं, यही वजह है कि डायबिटीज से जूझ रहे लोग इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर आजमाते रहे हैं. लेकिन डॉक्टरों की सलाह है कि इसे किसी दवा का विकल्प समझने की गलती न करें.
ब्लड शुगर पर कैसे होता है असर
जामुन की गुठली में मौजूद प्राकृतिक यौगिक रक्त शर्करा को संतुलित रखने में सहायक भूमिका निभा सकते हैं, इसी वजह से मधुमेह की परेशानी झेल रहे लोग परंपरागत रूप से इसका इस्तेमाल करते आए हैं. मगर यह किसी भी सूरत में मधुमेह की दवा की जगह नहीं ले सकती. बागेश्वर में प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल का कहना है कि इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की राय लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि हर मरीज के शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है.
पेट और पाचन के लिए भी मददगार
गुठली का फायदा सिर्फ शुगर तक सीमित नहीं है. सूखी गुठली से तैयार पाउडर को थोड़ी मात्रा में लिया जाता है और इसमें मौजूद फाइबर तथा अन्य प्राकृतिक तत्व पेट को दुरुस्त रखने में योगदान देते हैं. इससे पाचन तंत्र सामान्य ढंग से काम करता रहता है, ऐसा माना जाता है. हालांकि हर इंसान का शरीर अलग होता है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि सबको इसका फायदा एक जैसा ही मिले.
शरीर को मिलते हैं एंटीऑक्सीडेंट
जामुन की गुठली में कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर के भीतर बनने वाले फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को घटाने में काम आते हैं. सदियों से आयुर्वेद में जामुन के पेड़ के अलग-अलग हिस्सों का उपयोग होता रहा है, और गुठली को सुखाकर पाउडर बनाना भी उसी पुरानी परंपरा की एक कड़ी है. फिर भी डॉक्टर आगाह करते हैं कि इसे किसी गंभीर बीमारी की दवा मान लेना सही नहीं होगा.
वजन नियंत्रण में परोक्ष भूमिका
वजन कम करने की कोशिश में लगे लोगों के लिए भी जामुन की गुठली अप्रत्यक्ष तौर पर काम आ सकती है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन को सुधारने के साथ-साथ खाना खाने के बाद देर तक पेट भरा महसूस कराता है, जिससे बार-बार खाने की आदत पर लगाम लगती है. लेकिन इसका पाउडर वजन घटाने की कोई प्रमाणित दवा नहीं है. वजन घटाना है तो संतुलित खानपान, पूरी नींद और रोजाना की शारीरिक गतिविधि ही सबसे भरोसेमंद रास्ता है, अकेले गुठली के पाउडर पर टिके रहना समझदारी नहीं.
पाउडर घर पर कैसे तैयार होता है
पाउडर बनाने के लिए सबसे पहले गुठलियों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखाया जाता है, फिर उन्हें पीसकर बारीक पाउडर बना लिया जाता है. परंपरा के मुताबिक इसे बहुत सीमित मात्रा में ही खाया जाता है. कितनी मात्रा लेनी चाहिए और किस तरह लेनी चाहिए, यह हर व्यक्ति की उम्र, सेहत और पहले से चल रही दवाओं पर निर्भर करता है. जरूरत से ज्यादा खा लेने पर फायदे की जगह नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए इसे रोजाना की आदत बनाने से पहले डॉक्टर या किसी योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय जरूर लें.
डायबिटीज के मरीजों के लिए खास सावधानी
गुठली का पाउडर शुगर कंट्रोल में सहायक जरूर हो सकता है, लेकिन जो लोग पहले से दवाओं या इंसुलिन के सहारे डायबिटीज मैनेज कर रहे हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना इसे शुरू नहीं करना चाहिए. शुगर घटाने वाली दवाओं के साथ इसका सेवन करने पर ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा नीचे गिरने का खतरा रहता है. इसलिए मरीजों को अपने डॉक्टर को हर घरेलू नुस्खे और खानपान में किए जा रहे बदलाव की जानकारी जरूर देनी चाहिए.
खून साफ करने के दावों पर भरोसा करने से पहले सोचें
जामुन की गुठली को लेकर यह भी कहा जाता है कि यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालती है और खून साफ करती है. लेकिन इन दावों को पुख्ता करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत अभी मौजूद नहीं हैं. गुठली में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक सेहत के लिए उपयोगी हो सकते हैं, मगर इससे यह साबित नहीं होता कि यह खून साफ करने की कोई दवा है. ऐसे बड़े-बड़े दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए.
किन लोगों को सलाह के बिना सेवन नहीं करना चाहिए
पारंपरिक तौर पर जामुन की गुठली के कई फायदे गिनाए जाते हैं, लेकिन इसे सावधानी से ही अपनाना चाहिए क्योंकि हर शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है. गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और लंबे समय से किसी बीमारी की दवा ले रहे लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें. डायबिटीज के मरीजों को नियमित ब्लड शुगर जांच के साथ किसी विशेषज्ञ की राय भी जरूर लेनी चाहिए. आखिर में, जामुन की गुठली को संतुलित आहार और सेहतमंद जीवनशैली का विकल्प नहीं माना जा सकता.



















