ऋषिकेश और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश शुरू होते ही झरनों की तरफ पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगती है, लेकिन यही खूबसूरत नजारा जानलेवा भी साबित हो सकता है अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए। मानसून में पहाड़ों से गिरने वाले झरनों में पानी का बहाव तेज हो जाता है और चारों तरफ हरियाली के बीच ठंडी फुहारें लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले सैलानी भी बड़ी संख्या में इन झरनों का रुख करते हैं।
दोस्तों संग मस्ती के बीच बढ़ जाता है खतरा
बारिश के दिनों में झरनों के इर्द-गिर्द लोगों की चहल-पहल कई गुना बढ़ जाती है। कोई परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचता है तो कोई दोस्तों की टोली के साथ मोबाइल में तस्वीरें और वीडियो कैद करने में जुट जाता है। यह नजारा देखने में जितना सुहावना लगता है, हकीकत में उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि पानी के पास मौजूद हर पल सतर्कता मांगता है।
चंद मिनटों में बदल सकती है झरने की धारा
पहाड़ी इलाकों में मौसम का मिजाज बेहद अनिश्चित होता है। ऊपरी पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी कुछ ही देर में नीचे झरने तक पहुंच जाता है, जिससे धारा अचानक तेज हो जाती है। जो जगह थोड़ी देर पहले तक शांत नजर आ रही होती है, वहां देखते ही देखते तेज बहाव आ सकता है, जिससे पानी के करीब या बीच में खड़े लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
फिसलन भरी चट्टानें और अनजान गहराई बनती हैं खतरा
बारिश के मौसम में झरनों के इर्द-गिर्द मौजूद पत्थर काफी फिसलन भरे हो जाते हैं। दूर से चट्टान मजबूत और सुरक्षित दिख सकती है, मगर पैर टिकाते ही संतुलन बिगड़ने का डर बना रहता है। बच्चों और तैराकी न जानने वालों के लिए पानी के नजदीक जाना और भी खतरनाक हो जाता है, क्योंकि झरने के नीचे पानी असल में कितना गहरा है, यह ऊपर से देखकर बता पाना मुमकिन नहीं होता।
स्थानीय निवासी ने दी सतर्क रहने की सलाह
स्थानीय निवासी वकील चंद्र जैन का कहना है कि बारिश में झरनों की तरफ जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उनका मानना है कि खूबसूरत तस्वीर खींचने के चक्कर में पर्यटक अक्सर पानी के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जबकि पहाड़ों में मौसम पल भर में बदल सकता है और ऊपर बरसी बारिश नीचे झरने के बहाव को प्रभावित कर देती है। उन्होंने प्रशासन की तरफ से लगाए गए संकेत बोर्ड और घेराबंदी को नजरअंदाज न करने की सलाह भी दी।
बरतें ये जरूरी सावधानियां
झरने तक पहुंचने पर पानी से कुछ दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी कदम है। तेज बहाव दिखने पर उसमें कदम रखने की भूल कभी न करें और पत्थरों पर चढ़कर तस्वीर या रील बनाने से भी परहेज करें। बच्चों को पानी के आसपास अकेला बिल्कुल न छोड़ें और मौसम बिगड़ते ही वहां रुकने के बजाय तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर लौट जाएं। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का हाल जरूर जान लें और अगर लगातार बारिश हो रही है या प्रशासन ने किसी क्षेत्र में जाने पर रोक या चेतावनी जारी कर रखी है, तो वहां जाने का जोखिम कतई न उठाएं।





















