घर बनाते वक्त ज्यादातर परिवार कमरों की साज-सज्जा, रसोई, बाथरूम और सीढ़ियों की दिशा पर बारीकी से ध्यान देते हैं, मगर छत पर लगने वाली पानी की टंकी को अक्सर सिर्फ इसलिए एक कोने में टिका दिया जाता है क्योंकि वहां थोड़ी खाली जगह बच गई होती है। वास्तु शास्त्र में मगर इस टंकी की दिशा को लेकर स्पष्ट नियम दिए गए हैं। मान्यता यह है कि टंकी गलत कोने में लग जाए तो घर के सदस्यों के बीच आपसी तनाव बढ़ने लगता है और पैसों से जुड़ी उलझनें भी सामने आने लगती हैं, जबकि सही दिशा में टिकी टंकी घर के माहौल को शांत और सकारात्मक बनाए रखने में मदद करती है।
जल स्रोत के लिए ईशान कोण शुभ, टंकी का हिसाब अलग
बल्लभगढ़ स्थित उदासीन साधु आश्रम के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के मुताबिक वास्तु शास्त्र में जल तत्व को हमेशा से खास दर्जा दिया गया है। घर में बोरिंग करानी हो या पानी का कोई और स्रोत बनवाना हो, तो पूर्व और उत्तर के बीच का हिस्सा यानी ईशान कोण इसके लिए सबसे उपयुक्त बताया जाता है, क्योंकि यही कोना पूजा-पाठ के साथ-साथ जल तत्व के लिहाज से भी सबसे शुभ फल देने वाला माना गया है। लेकिन छत पर टिकाई जाने वाली टंकी को इसी कसौटी पर नहीं परखा जा सकता, क्योंकि वह ऊंचाई पर रखी होती है और उसका पूरा वजन ढांचे को झेलना पड़ता है, इसी वजह से इसके लिए बिल्कुल अलग गणना अपनाई जाती है।
इन कोनों में भूलकर भी न टिकाएं टंकी
महंत का मानना है कि टंकी को ईशान या अग्नि कोण में रखने से घर में आपसी कलह और मनमुटाव बढ़ने लगता है। उनके मुताबिक टंकी दक्षिण-पश्चिम के कोने में रखना सबसे बेहतर रहता है। जिन घरों की बनावट में ठीक वही कोना उपलब्ध नहीं हो पाता, वहां सिर्फ पश्चिम दिशा में भी टंकी टिकाई जा सकती है, और वास्तु के हिसाब से यह विकल्प भी पूरी तरह स्वीकार्य माना गया है। इस तरह घर बनवाते समय अगर नक्शे में ही टंकी की जगह तय कर ली जाए, तो आगे चलकर दिक्कत नहीं आती।
पहले से बनी गलत दिशा की टंकी का क्या इलाज है
बहुत से घरों में टंकी की जगह पहले से तय हो चुकी होती है और अब उसे तोड़कर दूसरी दिशा में लगवाना न तो आसान होता है और न ही व्यावहारिक। ऐसी स्थिति के लिए महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य एक आसान तरीका सुझाते हैं, टंकी को ऊपर से सफेद रंग करवा दिया जाए या शुरुआत से ही सफेद रंग की टंकी खरीदी जाए। उनके अनुसार वास्तु शास्त्र में सफेद के अलावा पीला रंग भी टंकी के लिए शुभ माना गया है, और इन रंगों को अपनाने से गलत दिशा का असर काफी हद तक कम हो जाता है। यानी जिन घरों में दिशा बदलना संभव नहीं, वहां सिर्फ रंग बदलकर भी दोष घटाया जा सकता है।
सफेद रंग और सही दिशा का मेल लाता है सुख-समृद्धि
वास्तु की मान्यताओं के अनुसार अगर टंकी दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगी हो और उसका रंग भी सफेद रखा जाए, तो यह जोड़ घर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। ऐसे घरों में आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं, पारिवारिक माहौल में सुख-समृद्धि बनी रहती है, और मां लक्ष्मी की कृपा बने रहने की मान्यता भी इससे जुड़ी हुई है। यही वजह है कि छत बनवाते समय टंकी की दिशा और रंग, दोनों को लेकर सजगता बरतने की सलाह दी जाती है।




















