शिकागो अदालत का फैसला, इथियोपियन एयरलाइंस हादसे में जान गंवाने वाले संयुक्त राष्ट्र इंजीनियर के परिवार को बोइंग देगा 29 मिलियन डॉलरनांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला, राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाना हालफगवाड़ा में कैलाश खेर के शिव भजनों ने जीता दिल, अरविंद केजरीवाल ने पंजाब सरकार के भक्ति आयोजनों को सराहायूरोप में भीषण गर्मी के चलते डैन्यूब नदी का जलस्तर 30 साल के निचले स्तर पर, रोमानिया का इकलौता परमाणु संयंत्र हुआ बंदबिहार के मुजफ्फरपुर में बेखौफ अपराधियों का दुस्साहस, रेड के दौरान पुलिस पर बरसाईं गोलियां और बाइक छीनकर भागेऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के ऊपर मजबूती तलाश रहा है, आरबीआई नीति और CFTC आंकड़े तय करेंगे आगे की चालघर में बजरंगबली के पांच मुखी स्वरूप की स्थापना से मिटेंगे संकट, जानिए किस दिशा में चित्र लगाना माना जाता है श्रेष्ठनेक्टर लक्स हाइब्रिड गद्दे का विस्तृत विश्लेषण और परफॉर्मेंस टेस्टस्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ पर अमेरिका के पूर्ण नियंत्रण के दावे को ईरान ने किया खारिज, कहा हमारी सुरक्षा में है जलमार्गसुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में महिला की हत्या के दोषी बालकू ओराम की उम्रकैद रखी बरकरार, कहा अंधविश्वास से खतरे में पड़ जाएगा लोकतंत्र
घर में बजरंगबली के पांच मुखी स्वरूप की स्थापना से मिटेंगे संकट, जानिए किस दिशा में चित्र लगाना माना जाता है श्रेष्ठवास्तु
14 अग॰ 2026, 12:15 am (2 घंटे पहले)· 2

घर में बजरंगबली के पांच मुखी स्वरूप की स्थापना से मिटेंगे संकट, जानिए किस दिशा में चित्र लगाना माना जाता है श्रेष्ठ

शास्त्रों में हनुमान जी के पंचमुखी रूप को अत्यंत कल्याणकारी और शक्तिशाली माना गया है। जानिए पाताल लोक की वह पौराणिक कथा और वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इस पावन चित्र को लगाने की सही दिशा।

सनातन परंपरा में पवनपुत्र हनुमान जी की भक्ति को संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। शास्त्रों में उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें पंचमुखी अवतार को अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि पंचमुखी रूप की आराधना करने से जीवन में आने वाली हर बाधा दूर होती है और साधक को साहस, आरोग्य, ज्ञान तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थ जीवन में सुख और शांति बनाए रखने के लिए घर में पंचमुखी हनुमान जी का चित्र स्थापित करना बेहद शुभ परिणाम देने वाला माना गया है।

अहिरावन के वध के लिए धारण किया गया था पंचमुखी स्वरूप

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राम-रावण युद्ध के समय रावण का भाई अहिरावन छल से भगवान राम और उनके अनुज लक्ष्मण को बंदी बनाकर पाताल लोक ले गया था। पाताल लोक में अहिरावन ने दोनों भाइयों की बलि देने की पूरी तैयारी कर ली थी। जब हनुमान जी को इस घटना की जानकारी मिली, तो वे तुरंत प्रभु राम और लक्ष्मण जी की सहायता के लिए पाताल लोक पहुंच गए।

ये भी पढ़ें

वहां पहुंचकर हनुमान जी को ज्ञात हुआ कि मायावी अहिरावन का अंत केवल तभी संभव है जब पांच अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पांचों दीपकों को एक साथ बुझा दिया जाए। अहिरावन की इस मायावी शक्ति का काट निकालने के लिए हनुमान जी ने तुरंत पंचमुखी स्वरूप धारण किया। उन्होंने एक ही समय में अपने पांचों मुखों से पांचों दिशाओं में जल रहे दीपकों को बुझा दिया। दीपकों के बुझते ही अहिरावन की शक्ति समाप्त हो गई और हनुमान जी ने उसका संहार कर दिया। इस तरह अपनी अद्भुत बुद्धि, सूझबूझ और असीम पराक्रम से उन्होंने श्री राम और लक्ष्मण जी को सुरक्षित मुक्त कराया।

पंचमुखी हनुमान के पांचों मुखों का विशेष धार्मिक महत्व

पंचमुखी हनुमान के प्रत्येक मुख का एक विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है और हर मुख एक अलग दिशा तथा दिव्य अवतार का प्रतिनिधित्व करता है।

  • वानर मुख: यह पंचमुखी हनुमान जी का मुख्य मुख है, जो पूर्व दिशा की ओर निर्देशित माना जाता है। यह स्वरूप भक्ति, यश, पवित्रता और असीम साहस से जुड़ा हुआ है। यह मुख हनुमान जी के अपने स्वामी के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
  • नरसिंह मुख: दक्षिण दिशा की ओर स्थित मुख भगवान नरसिंह का प्रतिनिधित्व करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रूप की आराधना करने से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और सभी प्रकार की नकारात्मक ताकतों से सुरक्षा मिलती है।
  • गरुड़ मुख: पश्चिम दिशा से संबंध रखने वाला मुख भगवान गरुड़ का स्वरूप है। यह रूप जीवन में आने वाली विषैली बाधाओं, तंत्र-मंत्र के प्रभावों और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है।
  • वराह मुख: उत्तर दिशा की ओर लक्षित मुख भगवान विष्णु के वराह अवतार का प्रतीक माना जाता है। यह स्वरूप उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, जीवन में स्थिरता और धन-धान्य तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता है।
  • हयग्रीव मुख: ऊपर यानी आकाश की ओर उठा हुआ मुख भगवान हयग्रीव का स्वरूप माना जाता है। यह रूप ज्ञान, तीव्र बुद्धि, विद्या और विजय का प्रतीक है। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और ज्ञान प्राप्ति में लगे साधकों के लिए इस स्वरूप का विशेष महत्व माना गया है।

वास्तु अनुसार घर में पंचमुखी हनुमान की तस्वीर लगाने के नियम

घर में पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। सही दिशा में लगाई गई तस्वीर घर के माहौल को सकारात्मक बनाती है और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश रोकती है।

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान घर का मुख्य द्वार माना जाता है। मुख्य द्वार पर यह चित्र लगाने से घर के भीतर किसी भी प्रकार की बुरी नजर या नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। इसके अतिरिक्त, इस चित्र को घर के लिविंग रूम या ड्रॉइंग रूम में भी स्थापित किया जा सकता है।

दिशाओं की बात करें तो पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा को विशेष रूप से फलदायी और शुभ माना गया है। इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण में भी पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाना अत्यंत लाभदायक माना जाता है। ऐसा करने से घर के सदस्यों पर आने वाले संकट टलते हैं और परिवार में सुरक्षा तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।

सवाल-जवाब

पंचमुखी हनुमान जी का रूप क्यों प्रकट हुआ था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पाताल लोक में अहिरावन का वध करने और भगवान राम व लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए हनुमान जी ने पांचों दिशाओं के दीपक एक साथ बुझाने हेतु पंचमुखी रूप धारण किया था।
पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख कौन-कौन से हैं?
पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख हैं: वानर मुख, नरसिंह मुख, गरुड़ मुख, वराह मुख और हयग्रीव मुख।
घर में पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर किस दिशा में लगानी चाहिए?
पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाने के लिए दक्षिण दिशा और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोण को विशेष रूप से शुभ माना गया है।
क्या मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगा सकते हैं?
हां, वास्तु अनुसार घर के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाना अत्यंत शुभ होता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
विद्यार्थियों के लिए पंचमुखी हनुमान जी का कौन सा रूप विशेष माना गया है?
पंचमुखी हनुमान जी का ऊपर की ओर रहने वाला हयग्रीव (अश्व) मुख ज्ञान, बुद्धि और शिक्षा में सफलता का प्रतीक माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR