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दीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलनभारत
30 सित॰ 2026, 8:46 pm (37 मिनट पहले)· 1

दीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली से पहले स्पष्ट किया है कि देश भर में पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी, बल्कि समय सीमा और अनुमति योग्य किस्मों को तय करके संतुलित हल निकाला जाएगा।

दीपावली के त्योहार से पहले आतिशबाजी को लेकर देश की शीर्ष अदालत का एक महत्वपूर्ण रुख सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरे देश में पटाखों पर मुकम्मल रोक लगाने का उसका कोई इरादा नहीं है। अदालत का मानना है कि इस संवेदनशील विषय पर फैसला लेते समय धार्मिक आस्था और जनस्वास्थ्य व पर्यावरण दोनों के बीच एक ठोस तालमेल बैठाना बेहद जरूरी है। अदालत ऐसा रास्ता निकालना चाहती है जिससे परंपराओं का सम्मान भी बना रहे और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

धार्मिक भावनाओं और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन का प्रयास

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने इस पूरे विवाद पर व्यवहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि देश भर में आतिशबाजी पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है, तो इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। अदालत पूर्ण पाबंदी का समर्थन नहीं करती, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि दिन-रात अनियंत्रित तरीके से आतिशबाजी की छूट दे दी जाए।

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जस्टिस सुंदरेश ने अपनी टिप्पणी में कहा, "हम पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन हम कहीं भी 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति भी नहीं देंगे, क्योंकि इससे बीमार, बुजुर्गों और बच्चों पर असर पड़ता है."

समय सीमा और पटाखों की किस्मों का निर्धारण

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर एक संतुलित समाधान की दिशा में काम कर रही है। अदालत एक ऐसा ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है जिसमें त्योहार के दौरान आतिशबाजी के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा कि नागरिक किस तरह के पटाखे खरीद और जला सकेंगे। जिन पटाखों से अत्यधिक प्रदूषण होता है, उन पर रोक सुनिश्चित की जाएगी और केवल निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पटाखों को ही हरी झंडी दी जाएगी।

बेरियम जांच और आवाज के स्तर का परीक्षण

पर्यावरण और ध्वनि प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने वैज्ञानिक जांच पर विशेष जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और केंद्र सरकार को पटाखों में बेरियम की मौजूदगी का पता लगाने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक परीक्षण पूरे करने की मोहलत दी है। इसके अलावा, पटाखों के संयुक्त फायर टेस्ट आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनसे निकलने वाली ध्वनि की तीव्रता यानी डेसिबल स्तर को सही तरीके से मापा जा सके। इस परीक्षण का उद्देश्य यह समझना है कि आतिशबाजी से कितना शोर उत्पन्न होता है और वह लोगों की शारीरिक व मानसिक सेहत को किस हद तक प्रभावित करता है।

अक्टूबर के मध्य में होगी अगली सुनवाई

इस पूरे मामले की अगली तारीख 15 अक्टूबर तय की गई है। तब तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्र सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तथा सभी वैज्ञानिक परीक्षणों के आंकड़े अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। हर वर्ष दीपावली के मौसम में राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बेहद चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाती है, जिसके चलते बार-बार पटाखों पर पूर्ण पाबंदी लगाने की मांग उठती है। हालांकि, दूसरी तरफ त्योहार से जुड़ी सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की यह संतुलित पहल काफी अहम मानी जा रही है।

सवाल-जवाब

क्या सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि वह पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है।
अदालत ने 24 घंटे पटाखे फोड़ने को लेकर क्या टिप्पणी की?
जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि अदालत कहीं भी 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं देगी क्योंकि इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों पर असर पड़ता है।
अदालत किस तरह का समाधान तलाशने की योजना बना रही है?
अदालत पटाखे चलाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने और केवल अनुमत किस्मों के पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति देने पर विचार कर रही है।
सीपीसीबी और केंद्र सरकार को अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं?
उन्हें पटाखों में बेरियम की मौजूदगी की जांच करने और ध्वनि स्तर मापने के लिए संयुक्त फायर टेस्ट करने का समय दिया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की है।
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