सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगेदीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलन
पितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणउत्तराखंड
30 सित॰ 2026, 9:31 pm (20 मिनट पहले)· 1

पितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारण

पितृ पक्ष के दौरान लोहे का इस्तेमाल और दान करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा और पितृ दोष को बढ़ा सकता है।

हिंदू पंचांग के मुताबिक भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक का समय पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है। इस पावन कालखंड में लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान तथा तर्पण जैसे जरूरी कर्मकांड संपन्न करते हैं। धार्मिक आस्था है कि इन दिनों किए गए विधिवत अनुष्ठानों से पूर्वज संतुष्ट होकर अपने वंशजों को संपन्नता और शांति का वरदान प्रदान करते हैं। हालांकि, इन कर्मकांडों को पूरा करने के लिए शास्त्रों में बेहद स्पष्ट और कड़े नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन न करने पर अनुष्ठान का पूरा फल व्यर्थ हो सकता है।

पितृ कर्म में लोहे के उपयोग पर निषेध

हरिद्वार स्थित नारायणी शिला के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, पितृ पक्ष की पूरी अवधि में लोहे से निर्मित किसी भी प्रकार की वस्तु का न तो उपयोग करना चाहिए और न ही उसका दान करना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यताओं में लोहे का संबंध शनि और राहु जैसे ग्रहों से जोड़ा गया है। इसके अलावा, लोहे को तामसिक ऊर्जा तथा नकारात्मक प्रभावों का प्रतीक माना जाता है। चूंकि श्राद्ध कर्म एक अत्यंत सात्विक और देवतुल्य आराधना की श्रेणी में आता है, इसलिए तामसिक मानी जाने वाली इस धातु का स्पर्श या प्रयोग अनुष्ठान की मूल भावना के प्रतिकूल बैठता है।

ये भी पढ़ें

भोजन और तर्पण में अशुद्धि का खतरा

पंडित मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि अगर कोई जातक इन दिनों लोहे के बर्तनों में पितरों के लिए भोजन तैयार करता है, खाना परोसता है या फिर लोहे के पात्रों का दान करता है, तो इससे पितर अप्रसन्न हो जाते हैं। परंपरा के अनुसार, श्राद्ध अथवा तर्पण के समय लोहे के संपर्क में आने से अन्न और जल अशुद्ध तथा दूषित माने जाते हैं। ऐसा भोजन पितर स्वीकार नहीं करते और अतृप्त अवस्था में ही अपने लोक वापस लौट जाते हैं, जिसके चलते परिवार में पितृ दोष और अन्य परेशानियां उत्पन्न होने की आशंका रहती है।

किन धातुओं के बर्तनों का करें चयन

पितरों की तृप्ति और पूजा की पवित्रता बनाए रखने के लिए केवल शुद्ध धातुओं का ही चयन करने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज के लिए तांबा, पीतल, चांदी अथवा कांसा जैसी धातुओं से बने बर्तनों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। इन पावन धातुओं के पात्रों के माध्यम से अर्पित किया गया जल और अन्न सीधे पितरों को तृप्त करता है और जातक को दीर्घकालिक पुण्य फल प्राप्त होता है।

सवाल-जवाब

पितृ पक्ष कब से कब तक मनाया जाता है?
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है।
पितृ पक्ष में लोहे का उपयोग क्यों वर्जित है?
लोहे को शनि और राहु से जुड़ा तथा तामसिक माना गया है, जिससे पूजा में नकारात्मकता आ सकती है।
श्राद्ध कर्म में किन धातुओं के पात्रों का इस्तेमाल करना चाहिए?
श्राद्ध और तर्पण के लिए तांबा, पीतल, चांदी और कांसा जैसी शुद्ध धातुओं के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए।
लोहे के बर्तनों में भोजन बनाने से क्या नुकसान बताया गया है?
मान्यता है कि लोहे के बर्तनों में बना भोजन अशुद्ध हो जाता है जिसे पितर स्वीकार नहीं करते और नाराज हो जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp