पश्चिम बर्धमान जिले के कांकसा थाना क्षेत्र में पानागढ़ बाजार हिंदी हाई स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्कूल की एक शिक्षिका छुट्टी होने के बाद परिसर के भीतर ही करीब एक घंटे तक बंद रहीं। शिक्षिका कृष्णा वर्मन ने आसपास के लोगों और कुछ अभिभावकों को फोन करके मदद मांगी, तब कहीं जाकर गेट का ताला खोला गया और उन्हें बाहर निकाला जा सका। घटना की जानकारी मिलते ही आक्रोशित अभिभावक स्कूल पहुंच गए और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
आखिर स्कूल के अंदर कैसे फंसीं शिक्षिका?
जानकारी के मुताबिक, शिक्षिका कृष्णा वर्मन स्कूल की मॉर्निंग शिफ्ट में पढ़ाती हैं। उनका कहना है कि मॉर्निंग सत्र खत्म होने के बाद जब वह स्कूल से निकलने के लिए गेट की तरफ बढ़ीं तो देखा कि परिसर के भीतर वाले गेट पर बाहर से ताला जड़ा हुआ था। उन्होंने स्कूल के कई कर्मचारियों और साथियों को आवाज लगाकर मदद के लिए बुलाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया। करीब एक घंटे तक अकेले परिसर में बंद रहने के बाद उन्होंने आसपास रहने वाले लोगों और कुछ छात्रों के अभिभावकों को फोन लगाकर पूरी घटना बताई। फोन पर खबर मिलते ही अभिभावक तुरंत स्कूल की ओर दौड़ पड़े। मौके पर पहुंचकर उन्होंने काफी देर तक हंगामा किया, जिसके बाद ही गेट का ताला खोला जा सका और शिक्षिका को बाहर निकाला गया।
प्रधानाध्यापक पर शिक्षिका ने लगाए ये आरोप
कृष्णा वर्मन ने इस पूरे मामले के लिए स्कूल के प्रधान शिक्षक जयंत कुमार पांडा को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि प्रधान शिक्षक ने हाल ही में स्कूल में समय को लेकर बेहद सख्त नियम लागू कर दिए हैं और तय समय होते ही गेट पर ताला जड़ दिया जाता है, चाहे अंदर कोई मौजूद हो या नहीं। शिक्षिका के मुताबिक इस सख्ती की वजह से पहले भी कई बार शिक्षकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ चुका है, लेकिन इस बार मामला इतना बढ़ गया कि उन्हें खुद घंटेभर परिसर में कैद होकर फोन के सहारे मदद मांगनी पड़ी।
भाजपा कार्यकर्ताओं की एंट्री से बढ़ा तनाव, पुलिस को बुलाना पड़ा
इस बीच खबर फैलते ही इलाके के कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक भी स्कूल परिसर में पहुंच गए और प्रधान शिक्षक के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इससे स्कूल परिसर में माहौल और तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद कांकसा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। इसके बाद पुलिस, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच आपस में बैठक हुई, जिसमें बातचीत के जरिए मामला शांत कराया गया।
प्रधान शिक्षक बोले, आरोप पूरी तरह गलत
वहीं स्कूल के प्रधान शिक्षक जयंत कुमार पांडा ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि एक ही परिसर में तीन अलग-अलग स्कूल चलते हैं, इसलिए विद्यार्थियों खासकर छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मॉर्निंग सत्र खत्म होते ही भवन का मुख्य गेट बंद कर दिया जाता है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति अंदर दाखिल न हो सके। प्रधान शिक्षक का कहना है कि शिक्षिका को इस स्थिति में सीधे उन्हें फोन करके सूचित करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उन्होंने बाहर के अन्य लोगों को बुला लिया, जिसकी वजह से पूरा मामला गलतफहमी में उलझकर बड़ा बन गया। उन्होंने अभिभावकों और स्टाफ को भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्कूल में इस पर चर्चा कर उचित और स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाएगी।











