पश्चिम बंगाल में शिक्षा और संस्कृति से जुड़े मामलों में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने मदरसों में राष्ट्रीय गीत के गायन को अनिवार्य बना दिया है। इस बदलाव के तहत अब राज्य के सभी रजिस्टर्ड मदरसों और शैक्षणिक संस्थानों में 'वंदे मातरम्' गाना ज़रूरी होगा। यह अहम घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री दत्तात्रेय होसबोले भी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे, जिनकी राष्ट्र-निर्माण में भूमिका की मुख्यमंत्री ने खुलकर सराहना की।
सीमा सुरक्षा और डेमोग्राफ़ी बदलने के आरोप
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती प्रशासन के दौरान राज्य में अवैध घुसपैठ को बढ़ावा मिला, जिसके कारण स्थानीय डेमोग्राफ़ी यानी जनसांख्यिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों को आश्वस्त किया कि वर्तमान में सत्ता में एक राष्ट्रवादी सरकार है जो स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के प्रति पूरी तरह समर्पित है। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में राज्य की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा और हर एक घुसपैठिये की पहचान कर उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
सनातन संस्कृति और पिछली सरकारों की नीतियों पर निशाना
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर सनातन धर्म के अनुयायियों के खिलाफ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भारतीय जनता पार्टी और अन्य हिंदुत्व संगठनों को 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर 'शौर्य दिवस' मनाने की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंदिर के विरोध में रैलियां निकालने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया था। अधिकारी का कहना था कि वाम मोर्चे और टीएमसी दोनों के लंबे शासनकाल में सनातनियों को लगातार निशाना बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल को बचाने और ऐतिहासिक योगदान का स्मरण
राज्य की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने अब यह दृढ़ संकल्प ले लिया है कि वे अपने प्रदेश को किसी भी कीमत पर 'वेस्ट बांग्लादेश' नहीं बनने देंगे। उन्होंने देश के विभाजन के वक्त पश्चिम बंगाल को एक सुरक्षित हिंदू होमलैंड के रूप में स्थापित करने में महान हिंदुत्व विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान को याद किया और उनकी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा और अपनी प्राचीन जड़ों से जुड़े रहना होगा।
गौ सुरक्षा, भगवा का सम्मान और सड़कों के नाम में बदलाव
गाय की सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार गौवंश की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में कड़े कानून लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने 'भगवा' रंग के अपमान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने किसी राजनीतिक प्रदर्शन को गलत तरीके से 'भगवा तांडव' बताया था, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक दलों का आंदोलन कहा जा सकता है लेकिन भगवा की शान पर सवाल उठाना उसकी बेअदबी है। इसके अलावा, राज्य की विरासत और आध्यात्मिक अतीत से जुड़ी महान हस्तियों के सम्मान में सड़कों के नाम बदले जा रहे हैं, जिसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया गया है।
धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रा सर्किट के लिए बजट
धार्मिक आयोजनों और परंपराओं के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि दुर्गा पूजा जैसे बड़े अवसरों पर हमारे पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीएमसी शासन के विपरीत अब 'पितृ पक्ष' के दौरान ही धार्मिक और शुभ कार्यों की शुरुआत पर रोक जैसी स्थितियां नहीं रहेंगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े पैमाने पर प्रयास करते हुए उन्होंने घोषणा की कि तारापीठ से तारकेश्वर तक एक नया तीर्थयात्रा सर्किट विकसित किया जाएगा, जिसके लिए सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन करार दिया जो हिंदुत्व के मूल्यों को संरक्षित रखने का कार्य कर रहा है।



















