नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के नजदीक आते ही क्षेत्र में एक बेहद भावुक और अनोखा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार मिलन प्रधान वर्तमान में जेल में बंद हैं, जिसके कारण उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने चुनाव प्रचार की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली है। इस विपरीत परिस्थिति ने स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर दिया है और क्षेत्र में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है। इसके चलते पश्चिम बंगाल के इस ऐतिहासिक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव अब केवल राजनीतिक मुकाबला न रहकर न्याय और राजनीतिक प्रतिशोध की लड़ाई में तब्दील हो गया है।
नंदीग्राम की सड़कों पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
उम्मीदवार के प्रति एकजुटता दिखाने और मतदाताओं को जागरूक करने के लिए, शुक्रवार को पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में नंदीग्राम की सड़कों पर एक विशाल अभियान मार्च निकाला गया। इस रैली में कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य जनता के सामने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के मुद्दे को उठाना था। इस शक्ति प्रदर्शन से पहले मिलन प्रधान की हिरासत और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला भी आया था, जिसने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को एक कानूनी मोड़ दे दिया है। इस अभियान मार्च में प्रदेश नेतृत्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अर्पिता प्रधान ने मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और अपने पति के पक्ष में मतदान करने की भावुक अपील की।
अर्पिता प्रधान ने राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप
प्रचार अभियान के दौरान मीडिया और जनता से बात करते हुए अर्पिता प्रधान काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने पति के लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए बताया कि मिलन प्रधान अपने कॉलेज के दिनों से ही कांग्रेस पार्टी के एक वफादार सिपाही रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए राजनीतिक विरोधियों ने साजिश रचकर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया है। अर्पिता ने कहा कि इस घटनाक्रम से उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और उनका परिवार भारी तनाव से गुजर रहा है, लेकिन फिर भी वे अपने पति के अधिकारों की रक्षा के लिए चुनावी मैदान में उतरने को अपना कर्तव्य मानती हैं।
ऐतिहासिक भूमि आंदोलन की यादें हुईं ताजा
अर्पिता ने मिलन प्रधान की वैचारिक निष्ठा की तुलना उनके पुराने साथियों से करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉलेज के दिनों में मिलन के साथ काम करने वाले कई दोस्त पैसों और सत्ता के लालच में दूसरी राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गए। इसके विपरीत, मिलन बाबू ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादार बने रहे। जब उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ने का फैसला किया, तो उन्हें रोकने के लिए यह दमनकारी कदम उठाया गया। अर्पिता का दावा है कि उनके पति को जेल में रखने का एकमात्र उद्देश्य उन्हें मतदाताओं के बीच जाने और नंदीग्राम के विकास के लिए अपनी बात रखने से रोकना है।
इस चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की यादें भी एक बार फिर ताजा हो गई हैं। अर्पिता ने याद दिलाया कि मिलन प्रधान उस ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे आगे खड़े थे और उन्होंने किसानों की उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष किया था। उस संघर्ष के दौरान मिलन बाबू और उनके कई साथी कार्यकर्ताओं पर तत्कालीन सरकार द्वारा कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। उन्होंने बेहद निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आज वही पुराने साथी समाज में बेहद प्रभावशाली हो चुके हैं और उनमें से कुछ तो राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं, लेकिन उनके पति आज भी जेल की सलाखों के पीछे रहने को मजबूर हैं।
इंसाफ और सच्चाई की जीत के लिए जनता से गुहार
न्याय व्यवस्था और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर सवाल उठाते हुए अर्पिता ने नंदीग्राम की जनता की अंतरात्मा से अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि अंततः सच्चाई की ही जीत होगी और नंदीग्राम के लोग अपने मतों के माध्यम से एक ऐसा फैसला सुनाएंगे जो उनके पति को बेगुनाह साबित करेगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे मिलन प्रधान की जीत सुनिश्चित करें, जो कि केवल एक चुनावी जीत नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ जनता का करारा जवाब होगी। कांग्रेस समर्थकों ने भी इस अभियान को और तेज कर दिया है और वे घर-घर जाकर मतदाताओं को इस संघर्ष के बारे में जागरूक कर रहे हैं।



















