पश्चिम बंगाल की दो चर्चित विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने निर्णायक बढ़त बना ली है. नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में जहां हसीरानी रथ अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर हजारों वोटों का फासला बना चुकी हैं, वहीं मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट पर सखारोव सरकार ने भी बड़ी बढ़त दर्ज की है. सुबह आठ बजे शुरू हुई इस मतगणना प्रक्रिया के दौरान दोनों ही केंद्रों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रही. डाक मतपत्रों की गिनती के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के वोटों की गिनती जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इन दोनों चुनावी क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण और दावों-प्रतिदावों का दौर तेज होता गया.
नंदीग्राम में हसीरानी रथ की मजबूत स्थिति और शुरुआती रुझान
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती भूपतिनाथ प्रधान मेमोरियल रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी में जिला पुलिस और केंद्रीय बलों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई. मतगणना के पहले राउंड से ही बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने अपनी बढ़त का सिलसिला शुरू कर दिया. पहले राउंड की गिनती पूरी होने पर उन्हें 11,965 वोट मिले और उन्होंने 9,644 मतों की शुरुआती बढ़त हासिल की. इसके बाद जैसे-जैसे चक्र आगे बढ़े, उनका अंतर बढ़कर 19,291 वोटों तक पहुंच गया. हसीरानी रथ बीजेपी के दिवंगत सहयोगी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं. इस बढ़त की खबर मतगणना केंद्र से बाहर आते ही इलाके में मौजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया और उन्होंने इस बढ़त का जश्न मनाना शुरू कर दिया.
रेजीनगर में सखारोव सरकार की 30 हजार वोटों की बढ़त
मुर्शिदाबाद जिले के तहत आने वाले रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में भी मुकाबला काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. चौथे राउंड की मतगणना पूरी होने तक बीजेपी प्रत्याशी सखारोव सरकार ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर 30,000 से अधिक मतों की बड़ी बढ़त हासिल कर ली. लगभग 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता आबादी वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी की इस बढ़त को लेकर सखारोव सरकार ने कहा कि अभी शुरुआती दौर है और वह ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन अल्पसंख्यक वोटरों ने भी दिखा दिया है कि वे सरकार के साथ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि अगर हम जीतते हैं तो वे आएंगे, और लोगों ने बंगाल में मुख्यमंत्री के विकास के वादे पर भरोसा जताया है. सखारोव सरकार ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि नंदारानी उनका मुख्य लक्ष्य हैं, जिन्हें बंगाल में सबसे ज्यादा वोट मिले थे. उन्होंने कहा कि लोगों ने केवल उन्हें ही नहीं बल्कि बीजेपी को भी वोट दिया है और नतीजों के मौजूदा रुझानों से साफ है कि सियासी धारा बदल रही है.
मुर्शिदाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस निगरानी
मतगणना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुर्शिदाबाद जिले में प्रशासन की ओर से व्यापक बंदोबस्त किए गए. जिले के पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कड़ स्वयं मतगणना केंद्र पर उपस्थित रहे और उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कड़ ने बताया कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है और वह खुद मतगणना केंद्र पर पहुंचकर इन व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं. केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के जवानों ने मतगणना केंद्र के चारों तरफ कड़ा पहरा लगा रखा था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या हंगामे से बचा जा सके.
कांग्रेस उम्मीदवारों और नेताओं के गंभीर आरोप
मतगणना के इन रुझानों के सामने आने के बाद कांग्रेस खेमे की तरफ से कड़ा विरोध और गंभीर आरोप सामने आए हैं. रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफ़ी ने नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नतीजे बिल्कुल वैसे ही हैं जैसी मुख्यमंत्री ने भविष्यवाणी की थी कि वे 1,20,000 वोटों के अंतर से जीतेंगे. अब्दुल्लाहिल काफ़ी ने दावा किया कि हर मतदान केंद्र पर बीजेपी और कांग्रेस को कितने वोट मिलेंगे, इसका हिसाब-किताब पहले ही तय हो चुका था और यह वोटों की गिनती में सुनियोजित हेरफेर तथा धांधली को दर्शाता है. वहीं नंदीग्राम में कांग्रेस नेता पूजा रॉय चौधरी ने मतदान के दिन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोटिंग के दिन चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुआ और वोटों की लूट हुई. उन्होंने कहा कि प्रचार के दौरान लोगों ने बीजेपी को पसंद नहीं किया था और उन्हें उम्मीद है कि जनता ने कांग्रेस का साथ दिया है.
राज्य कांग्रेस नेतृत्व और एआईसीसी प्रभारी का रुख
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पश्चिम बंगाल प्रभारी प्रकाश जोशी ने भी नंदीग्राम चुनाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया. प्रकाश जोशी ने कहा कि नंदीग्राम में बूथ लूटे गए, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पिटाई हुई, दुकानों में आग लगाई गई, घरों पर हमले हुए और प्रचार वाहनों में तोड़फोड़ की गई. उन्होंने कहा कि सुवेंदु अधिकारी को यह डर तभी लगा जब उन्होंने देखा कि चुनाव उनके हाथ से निकल रहा है. जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की मदद से वोटरों को डराया-धमकाया गया और चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नजर नहीं आई. वहीं पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर पुनर्मतदान की मांग की. शुभंकर सरकार ने कहा कि बीजेपी की सोच मनुवादी विचारधारा को दिखाती है और चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के बीच मिलीभगत से असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिससे वे मतदान करने से वंचित रह गए. उन्होंने कहा कि अगर मतदान बिना किसी डर के निष्पक्ष होता तो नतीजे अलग होते.
उपचुनाव की पृष्ठभूमि और राजनीतिक समीकरण
इन दोनों सीटों पर यह उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट के बजाय भवानीपुर को अपनी प्राथमिकता के रूप में चुना, जिसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हो गई थी. वहीं रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर द्वारा नौदा सीट चुनने के कारण रिक्त हुई थी. रेजीनगर सीट पर हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. नंदीग्राम की लड़ाई इसलिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है क्योंकि पूर्व में यहां ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी के मुकाबले कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा था. इस उपचुनाव में बीजेपी ने जहां चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ पर भरोसा जताया, वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान को ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस गुट का समर्थन मिला. प्रचार अभियान के दौरान नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और बाद में उन्हें मिली जमानत को लेकर भी खासा विवाद देखने को मिला था. डाक मतपत्रों के बाद ईवीएम के जरिए वोटों की गिनती जैसे-जैसे अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है, दोनों ही सीटों पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं.


















