बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और आवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने देश से अपने निष्कासन की दूसरी बरसी के अवसर पर समर्थकों को संबोधित किया। इस दौरान अपने विचार साझा करते हुए वे काफी भावुक हो गईं। उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह परिदृश्य उस बांग्लादेश से बिल्कुल अलग है जिसके निर्माण के लिए 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 30 लाख लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस विशेष कार्यक्रम में शेख हसीना के वक्तव्य से पहले आवामी लीग के कई निर्वासित नेताओं ने भी अपनी बात रखी और बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी पर तीखे जुबानी हमले किए।
विरोध प्रदर्शनों के स्वरूप पर सवाल
दो वर्ष पूर्व हुए उपद्रव का जिक्र करते हुए आवामी लीग प्रमुख शेख हसीना ने स्पष्ट किया कि वह कोई साधारण छात्र आंदोलन नहीं था। उनके अनुसार वह एक पूरी तरह सुनियोजित और संगठित विरोध प्रदर्शन था। उन्होंने रेखांकित किया कि 15 जुलाई के बाद से उस आंदोलन का चरित्र पूरी तरह बदल गया था। उस तारीख के बाद प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रूप ले लिया था और सड़कों पर मारकाट तथा सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ शुरू कर दी गई थी।
इंसाफ की मांग और कट्टरवाद का विरोध
कार्यक्रम के दौरान शेख हसीना की सरकार में पूर्व मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवामी लीग का मकसद किसी से बदला लेना नहीं है बल्कि वे केवल इंसाफ की मांग कर रहे हैं। नौफेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि बांग्लादेश के भीतर धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा या समर्थन न दिया जाए। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि आवामी लीग बांग्लादेश को किसी भी सूरत में एक विफल राष्ट्र नहीं बनने देगी।



















