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उदयपुर में 50 दिव्यांग व निर्धन जोड़ों ने लिए सात फेरे, नारायण सेवा संस्थान ने रचाया सामूहिक विवाहराजस्थान
20 सित॰ 2026, 10:26 pm (23 मिनट पहले)· 0

उदयपुर में 50 दिव्यांग व निर्धन जोड़ों ने लिए सात फेरे, नारायण सेवा संस्थान ने रचाया सामूहिक विवाह

उदयपुर के सेवा महातीर्थ बड़ी में 19 और 20 सितंबर को आयोजित 47वें सामूहिक विवाह में 50 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक-दूसरे का हाथ थामा। नवदंपतियों को गृहस्थी बसाने के लिए जरूरी घरेलू सामान और सहायक उपकरण भी भेंट किए गए।

उदयपुर स्थित सेवा महातीर्थ, बड़ी के प्रांगण में एक प्रेरक और भावनात्मक उत्सव के बीच 50 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर अपने वैवाहिक जीवन का आरंभ किया। 19 और 20 सितंबर को संपन्न हुए 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 वर-वधु शामिल हुए। जीवन की अनगिनत शारीरिक चुनौतियों और आर्थिक कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए इन जोड़ों ने वैदिक परंपरा और मंगलगीतों की गूंज के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इनमें से किसी ने बैसाखी के सहारे चलना सीखा था, तो कोई कृत्रिम अंगों की मदद से अपने पैरों पर खड़ा हुआ था। इस गरिमामय आयोजन ने साबित कर दिया कि हौसला और परस्पर विश्वास हर बाधा पर विजय पा सकता है।

उपचार केंद्र से जीवनसाथी तक का भावनात्मक सफर

इस दो दिवसीय आयोजन की सबसे अनूठी बात यह रही कि परिणय सूत्र में बंधने वाले कई युवक-युवतियों का पहले इसी परिसर में इलाज, ऑपरेशन या कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण हुआ था। नारायण सेवा संस्थान में स्वास्थ्य लाभ और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थी अब वहीं से अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे लोग शामिल थे जो सड़क हादसों या गंभीर बीमारियों के बाद दोबारा संभले, जबकि कुछ जन्मजात दिव्यांगता के बावजूद निरंतर आत्मनिर्भर बनने के प्रयास में जुटे रहे। विवाह मंडप में शारीरिक सीमाओं की जगह उनका दूल्हा और दुल्हन का रूप ही सबसे प्रमुख पहचान बना रहा।

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घरेलू सामान और आवश्यक उपकरणों से दी गई नई शुरुआत

नवविवाहित जोड़ों को नए घर की नींव रखने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आयोजकों ने गृहस्थी से जुड़ी तमाम आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराईं। नवदंपतियों को भेंट किए गए सामानों में पलंग, गद्दे, बिस्तर सेट, अलमारी, गैस चूल्हा, सिलेंडर, किचन सेट, प्रेशर कुकर, तवा, कढ़ाई, पंखा, सिलाई मशीन और मजबूत ट्रॉली बैग शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, जिन वर-वधुओं को शारीरिक रूप से आवश्यकता थी, उन्हें व्हीलचेयर और अन्य विशेष सहायक उपकरण भी प्रदान किए गए ताकि वे स्वाभिमान के साथ अपनी दिनचर्या आगे बढ़ा सकें।

22 वर्षों में 2,582 जोड़ों का कराया गया विवाह

समारोह के दौरान संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगजनों को किसी की दया या सहानुभूति की जरूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें समाज में बराबरी का सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने इस सामाजिक अभियान के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि बीते 22 वर्षों में इस मंच के जरिए कुल 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस आयोजन में ऐसे प्रेरक जोड़े भी शामिल रहे, जहां किसी सक्षम व्यक्ति ने दिव्यांग साथी को जीवनभर का साथ निभाने के लिए चुना, अथवा किसी दिव्यांग ने सामान्य साथी के साथ दांपत्य की शुरुआत की।

संतों और अतिथियों का मिला शुभाशीष

विवाह के दौरान पूरे परिसर में भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक अनुष्ठान निरंतर चलते रहे। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों, समाजसेवियों, जन प्रतिनिधियों तथा देश-विदेश के आमंत्रित अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। कई गणमान्य नागरिकों ने भावुक होकर कन्यादान की रस्म में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। समारोह में समाज सेवा के उल्लेखनीय कार्यों के लिए जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस मौके पर यश मेहता, पलक अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, सहसंस्थापिका कमला देवी अग्रवाल तथा संस्थापक कैलाश मानव ने उपस्थित रहकर वर-वधुओं के सुखद दांपत्य की कामना की।

सवाल-जवाब

यह सामूहिक विवाह समारोह कहां और कब आयोजित किया गया?
यह 47वां सामूहिक विवाह समारोह उदयपुर के सेवा महातीर्थ, बड़ी में 19 और 20 सितंबर को आयोजित किया गया था।
इस समारोह में कितने जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ?
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 युवक-युवतियों ने 50 जोड़ों के रूप में विवाह किया।
नवदंपतियों को गृहस्थी शुरू करने के लिए क्या उपहार दिए गए?
उन्हें पलंग, गद्दे, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, बर्तन, पंखा, सिलाई मशीन, बैग और आवश्यकतानुसार व्हीलचेयर व सहायक उपकरण दिए गए।
नारायण सेवा संस्थान अब तक कितने ऐसे विवाह करा चुका है?
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के अनुसार, पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह कराए जा चुके हैं।
समारोह में किस विशिष्ट अतिथि को सम्मानित किया गया?
जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को उनकी उत्कृष्ट सेवा भावना के लिए समारोह में सम्मानित किया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·4 मिनट पहले

नारायण सेवा संस्थान का यह 47वां सामूहिक विवाह सिर्फ एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का एक प्रभावी मॉडल है। चिकित्सा सहायता के बाद विवाह के इस चरण तक पहुँचना यह दर्शाता है कि कौशल प्रशिक्षण और कृत्रिम अंगों का समर्थन समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने में कितना सक्षम है। पिछले 22 वर्षों में 2,582 जोड़ों का यह सफर बताता है कि संस्थागत सहयोग से दिव्यांगजनों के जीवन में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि इस प्रकार के बड़े सामूहिक आयोजनों में सुरक्षा, पारदर्शिता और सुचारू प्रबंधन कानून-व्यवस्था और प्रशासन के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जब देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, तो इस तरह के कल्याणकारी और पुनर्वासित कार्यक्रम सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ-साथ अपराध और उपेक्षा के जोखिमों को कम कर एक सुरक्षित समाज के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।

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