इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत में स्थित माउंट सिनाबुंग ज्वालामुखी सोमवार की सुबह अचानक सक्रिय हो गया, जिससे स्थानीय निवासियों और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुबह ठीक 10 बजकर 17 मिनट पर एक जोरदार धमाके के साथ इस प्राकृतिक आपदा की शुरुआत हुई, और देखते ही देखते आसमान में लगभग 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक राख और धुएं का काला गुबार फैल गया। लंबे समय से शांत माने जाने वाले इस ज्वालामुखी के एकाएक फटने से पूरे आसपास के क्षेत्र में दहशत और तनाव का माहौल बन गया है।
प्रशासन की चेतावनी और पाबंदियां
इस खतरनाक विस्फोट के बाद आपदा प्रबंधन और भूवैज्ञानिक अधिकारियों ने तुरंत हरकत में आते हुए स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी है। प्रशासन ने लोगों को ऐसे तमाम गांवों में प्रवेश करने से भी मना किया है जो इस जोखिम भरे दायरे में आते हैं। अधिकारियों ने ज्वालामुखी की मुख्य चोटी से 3 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह की गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व दिशा में 4.5 किलोमीटर तक के भूभाग को भी अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया गया है।
विशेष रूप से नदियों के पास जीवन बिताने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों और अधिकारियों का मानना है कि यदि क्षेत्र में भारी बारिश होती है, तो ज्वालामुखी से निकला हुआ मलबा और भारी राख पानी के साथ मिलकर नीचे मैदानी इलाकों की तरफ बह सकती है, जिसे ठंडे लावे का प्रवाह यानी कोल्ड लावा फ्लो कहा जाता है। यह स्थिति निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों पूरी मुस्तैदी से हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
विस्फोट के तकनीकी आंकड़े और सिस्मोग्राम रिकॉर्ड
इंडोनेशिया की नेशनल जियोलॉजिकल एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने मीडिया को जानकारी दी कि आसमान में उठा हुआ राख का यह गुबार अत्यंत सघन और गहरे काले रंग का था। भूवैज्ञानिकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सिस्मोग्राम यंत्र पर इस विस्फोट की कंपन क्षमता 120 मिलीमीटर दर्ज की गई है। इस प्राकृतिक तांडव का यह सिलसिला बेहद डरावना था, जो बिना रुके पूरे 1 घंटे 1 मिनट और 48 सेकंड तक लगातार जारी रहा और धरती को कंपाता रहा।
माउंट सिनाबुंग का पुराना और खतरनाक इतिहास
समुद्र तल से लगभग 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट सिनाबुंग को सदियों तक एक शांत ज्वालामुखी माना जाता था, लेकिन साल 2010 में इसने अचानक अपनी लंबी खामोशी को तोड़ दिया और इसमें भयानक विस्फोट हुआ। इसके बाद यह पर्वत लगातार सक्रिय स्थिति में बना रहा है। साल 2013 और 2014 के दौरान भी इस ज्वालामुखी ने कई भयंकर रूप दिखाए, जबकि मई 2016 में हुए एक विनाशकारी विस्फोट के दौरान कम से कम 7 लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
विस्फोट से पहले मिल रहे थे खतरे के संकेत
वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार, इस ताजा घटनाक्रम के संकेत काफी पहले से मिलने शुरू हो गए थे। आंकड़े बताते हैं कि गत 1 अगस्त से 12 अगस्त के बीच इस क्षेत्र में गहरे ज्वालामुखीय भूकंपों की आवृत्ति और आंतरिक गैस रिसाव से जुड़ी गतिविधियों में अचानक बहुत तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अब विशेषज्ञों और अधिकारियों की निगाहें माउंट सिनाबुंग की पल-पल की गतिविधि पर टिकी हुई हैं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, ज्वालामुखी से निकलने वाला धुआं और राख और अधिक घनी हो गई और उसका रंग बदलकर धीरे-धीरे ग्रे से सफेद नजर आने लगा। यह नया गुबार भी चोटी से करीब 1 किलोमीटर ऊपर तक आसमान में तैरता दिखाई दिया।



















