नेपाल में आई तबाही ने चारों तरफ कोहराम मचा दिया है। इस आपदा में अब तक 1 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 4 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे हालात और भी ज्यादा भयावह होते जा रहे हैं। इस भयानक त्रासदी के बीच कुछ ऐसी दिल चीर देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं, जो इंसानों के भीतर खौफ और लाचारी दोनों भर देती हैं। लोग अपनों को अपनी आंखों के सामने इस सैलाब में खो चुके हैं, जिससे उनका पूरा जीवन वीरान हो गया है और वे गहरे सदमे में हैं।
तीर्थयात्रा के दौरान आई आफत
ऐसी ही एक मार्मिक और झकझोर देने वाली दास्तान बद्री प्रसाद देवकोटा ने बयां की है। बद्री प्रसाद देवकोटा अपनी पत्नी और 34 अन्य लोगों के साथ एक बस में सवार होकर नेपाल के रसुवा जिले में स्थित प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल गोसाईंकुंड के दर्शन के लिए जा रहे थे। ये सभी लोग पूरी आस्था और उत्साह के साथ इस पवित्र यात्रा पर निकले थे, लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। इसी दौरान नेपाल के इस पर्वतीय इलाके में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई, जिसने सब कुछ अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया।
बद्री प्रसाद देवकोटा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनकी बस उस समय काफी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। तभी उन्होंने देखा कि कीचड़ से भरा हुआ बाढ़ का सैलाब बहुत तेजी से उनकी बस की तरफ बढ़ रहा है। उस खौफनाक पल में उनकी पत्नी ने उनका हाथ कसकर पकड़ा हुआ था। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने अपनी पत्नी से तुरंत बस से कूदकर अपनी जान बचाने को कहा। लेकिन उनकी पत्नी ने बस से नीचे कूदने से साफ इनकार कर दिया और उनसे अनुरोध किया कि वे बस से बाहर न कूदें। बद्री प्रसाद देवकोटा ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की कि यह बाढ़ का पानी बस को पूरी तरह डुबो देगा और वे सब मारे जाएंगे, लेकिन उनकी पत्नी अपनी जिद पर अड़ी रहीं और बात नहीं मानी।
चलती बस से कूदकर बचाई जान
जब हालात हाथ से निकलते दिखे और कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आया, तो बद्री प्रसाद देवकोटा ने मजबूरी में अपनी पत्नी का हाथ छुड़ा लिया और चलती हुई बस से नीचे छलांग लगा दी। वह नुवाकोट के भैंसे इलाके में पहुंचे, जहां भोटेकोशी नदी की बाढ़ का पानी बेहद तेज रफ्तार से बह रहा था। पानी के उस भयंकर आवेग ने उन्हें खींचकर एक नाली में पहुंचा दिया। गनीमत यह रही कि वहां उन्होंने पहाड़ी पर उग पेड़-पौधों को मजबूती से पकड़ लिया, जिसकी वजह से उनकी जान बाल-बाल बच गई। लेकिन ठीक उसी वक्त, उनकी आंखों के ठीक सामने वह बस जिसमें उनकी पत्नी बैठी हुई थीं, बाढ़ के तूफानी पानी में हमेशा के लिए डूब गई।
इस भयानक हादसे के बाद से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण समूह में से अब तक केवल 2 शव ही बरामद किए जा सके हैं, जबकि बाकी के 28 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें बद्री प्रसाद देवकोटा की पत्नी भी शामिल हैं। हालांकि बद्री प्रसाद देवकोटा अब भी अपनी पत्नी को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं और हरसंभव प्रयास में जुटे हैं, लेकिन जिस तरह से वह बस पानी के अंदर समाई थी, उसमें उनकी पत्नी के जीवित बचने की उम्मीद न के बराबर है। इसके बावजूद, अगर चमत्कार वश उनकी पत्नी उन्हें सकुशल मिल जाती हैं, तो यह किसी बड़े करिश्मे से कम नहीं होगा।
इससे पहले भी इस इलाके से दिल दहला देने वाले मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें एक कमरे से 21 लाशें बरामद हुई थीं और मां की गोद में एक छोटी सी बच्ची चिपकी पाई गई थी, जबकि घर के बाहर भी 2 शव पड़े मिले थे।
इस आपदा की विभीषिका लगातार बढ़ती जा रही है और प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 1003 तक पहुंच चुकी है, और लगभग 4 हजार लोग अब भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है।



















