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ईरान की आर्थिक घेराबंदी की तैयारी में अमेरिका, डॉलर के इस्तेमाल पर पाबंदी का ऐलानदुनिया
25 अग॰ 2026, 12:31 am (21 दिन पहले)· 3

ईरान की आर्थिक घेराबंदी की तैयारी में अमेरिका, डॉलर के इस्तेमाल पर पाबंदी का ऐलान

अमेरिका ने ईरान और उसके सहयोगियों पर शिकंजा कसने के लिए नया आर्थिक कदम उठाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान की वित्तीय मदद करने वाले देशों और संस्थाओं को डॉलर प्रणाली से बाहर किया जाएगा।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक रणनीतियों को और अधिक आक्रामक बनाते हुए एक नया और कड़ा कदम उठाया है। इस ताजा पहल के तहत, ईरान या उसके वित्तीय लेन-देन में सहयोग करने वाले किसी भी बैंक, देश या संस्थान को अमेरिकी डॉलर प्रणाली से पूरी तरह बाहर करने की योजना तैयार कर ली गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को इस बात का स्पष्ट ऐलान किया है कि ईरान की मदद करने वालों को अब गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इस नीति का सीधा मतलब यह है कि जो भी देश ईरान की आर्थिक तौर पर सहायता करेगा, वह भविष्य में अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं कर पाएगा। बेसेंट ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में लिप्त पाई जाने वाली प्रत्येक संस्था को डॉलर आधारित वित्तीय नेटवर्क से निष्कासित कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस दिशा में सख्त कार्रवाई का दौर अब शुरू हो चुका है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा।

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ईरान की अर्थव्यवस्था को कुचलने की यह रणनीति बेहद सुनियोजित ढंग से बनाई गई है। अमेरिकी प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन सभी वित्तीय और आर्थिक रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है, जिनके जरिए ईरान तक धन पहुंचता है। इस विशेष अभियान को ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का नाम दिया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार, अमेरिका वैश्विक स्तर पर ईरान को मिलने वाली हर उस आर्थिक कड़ी को काटना चाहता है जो तेहरान सरकार को जीवित रखती है।

यह पाबंदियां और सख्त रुख तब तक जारी रहने वाला है जब तक कि ईरानी सरकार को पूरी तरह से आर्थिक रूप से अलग-थलग नहीं कर दिया जाता। बेसेंट ने उन तमाम देशों और निजी कंपनियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जो ईरान के साथ किसी भी प्रकार का व्यापारिक और आर्थिक लेन-देन जारी रखे हुए हैं। ऐसे कारोबारियों और राष्ट्रों पर अब अमेरिकी पाबंदियों की तलवार लटक रही है और कार्रवाई का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

इन नई और व्यापक पाबंदियों का दायरा केवल छोटी-मोटी कंपनियों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि बड़े वित्तीय संस्थानों को भी इसके दायरे में लाया गया है। अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के दिग्गज बैंकों और वित्तीय घरानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। बेसेंट ने जानकारी दी कि इसी सप्ताह के अंत तक किसी एक बड़े वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध लगाए जाने की पूरी संभावना है, हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों या रणनीतिक वजहों से उस विशिष्ट संस्था का नाम उजागर नहीं किया है।

इस पूरी रणनीति का एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिका ने चीन के बैंकों को भी स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी है। बेसेंट ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले किसी भी बैंक या संस्थान को अमेरिकी प्रतिबंधों के नियमों से ऊपर नहीं समझा जाएगा, चाहे वह किसी भी देश का हो।

अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पांच प्रमुख क्षेत्रों को अपनी इस नई कार्रवाई के दायरे में विशेष रूप से शामिल किया है। इन पांच क्षेत्रों में डिजिटल संपत्ति, उन्नत तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन को रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का यह गंभीर आरोप है कि ईरान इन सभी क्षेत्रों का उपयोग अपनी लगातार कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था को जीवित रखने और सहारा देने के लिए कर रहा है।

हालांकि, यह नई पाबंदियां दुनिया भर में एक साथ और तुरंत लागू नहीं की जा रही हैं। अमेरिका ने कुछ चुनिंदा कंपनियों और कारोबारियों को अपनी नीतियां बदलने और अपना रास्ता सुधारने के लिए थोड़ी सी मोहलत देने की बात कही है। लेकिन इसके साथ ही बेसेंट ने यह भी चेतावनी दी है कि यह राहत बहुत लंबी अवधि की नहीं होगी। उनका साफ कहना है कि पूरी कार्रवाई बहुत तीव्र गति से आगे बढ़ाई जाएगी और इस मामले में अमेरिकी सरकार पूरी तरह से गंभीर है।

मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर होने वाले तेल कारोबार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान के साथ चल रहे तनाव को छह महीने का समय बीत चुका है और इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को दोबारा सुचारू रूप से खोलने को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल अटकी हुई है। यही प्रमुख कारण है कि अमेरिकी आर्थिक रणनीति के तहत तेल, जहाजरानी और वित्तीय लेन-देन को सीधे तौर पर निशाना बनाना एक बेहद बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कौन सी नई रणनीति शुरू की है?
अमेरिका ने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया है, जिसके तहत ईरान की मदद करने वालों को अमेरिकी डॉलर प्रणाली से बाहर किया जाएगा।
इस नई नीति की घोषणा किसने की है?
इस नई नीति की घोषणा अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को की है।
किन पांच क्षेत्रों को अमेरिका की नई कार्रवाई के दायरे में रखा गया है?
अमेरिकी वित्त विभाग ने डिजिटल संपत्ति, तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन को इस दायरे में शामिल किया है।
ईरान के साथ तनाव के बीच कौन सा समुद्री मार्ग सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है?
होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री मार्ग वर्तमान तनाव के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·20 दिन पहले

अमेरिका की 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नीति और डॉलर प्रणाली से बाहर करने की चेतावनी का सीधा असर दक्षिण एशिया और क्षेत्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। चीनी बैंकों को दी गई सीधी चेतावनी से बीजिंग और वाशिंगटन के बीच आर्थिक तनाव और बढ़ सकता है। ईरान के साथ ऊर्जा और सीमावर्ती व्यापार में उलझे पड़ोसी देशों के लिए यह स्थिति कूटनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि वित्तीय अलगाव की इस रणनीति से क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होने का पूरा खतरा है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·21 दिन पहले

ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की यह घोषणा केवल तेहरान पर दबाव बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को हथियार बनाने की एक बड़ी रणनीति है। डॉलर प्रणाली से बाहर करने की यह चेतावनी और चीनी बैंकों को सीधा संदेश इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन और बीजिंग के बीच भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। डिजिटल एसेट्स, सोना और ऊर्जा से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों पर कड़ा शिकंजा कसने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गहरा असर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

मेरी जाँच और कानूनी-वित्तीय मामलों के विश्लेषण के अनुसार, डॉलर प्रणाली से बाहर करने और डिजिटल एसेट्स, सोना तथा विमानन जैसे पाँच प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाने का यह कदम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे को पूरी तरह बदल देगा। जब अमेरिका जैसी महाशक्ति बड़े वित्तीय संस्थानों और चीनी बैंकों पर सीधे प्रतिबंध लगाने की चेतावनी देती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार अनुबंधों, बैंकिंग अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय कानून पर पड़ेगा। इस सप्ताह के अंत तक किसी बड़े संस्थान पर संभावित कार्रवाई यह तय करेगी कि वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क अमेरिकी नियमों के तहत किस हद तक झुकने को मजबूर होता है।

Li Wei@li-wei·21 दिन पहले

अमेरिका का यह नया 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और विशेष रूप से चीनी बैंकों को दी गई सीधी चेतावनी वैश्विक भू-राजनीति में तनाव को और बढ़ाएगी। चूंकि डॉलर प्रणाली से बाहर करने की नीति का सीधा असर बीजिंग और तेहरान के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा, आने वाले दिनों में चीन की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक रुख इस पूरे आर्थिक संघर्ष की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

अर्जुन मेहता का विश्लेषण: अमेरिका द्वारा 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत डिजिटल परिसंपत्तियों, उन्नत तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाना और इस सप्ताह के अंत तक किसी बड़े वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध की संभावना यह दर्शाती है कि यह नीति केवल कूटनीतिक चेतावनी नहीं है, बल्कि तत्काल और आक्रामक कार्रवाई है। यदि बीजिंग अपनी वित्तीय और व्यापारिक प्राथमिकताओं के तहत इन पाबंदियों को नजरअंदाज करता है, तो वाशिंगटन और बीजिंग के बीच द्वितीयक प्रतिबंधों (सेकेंडरी सैंक्शंस) को लेकर टकराव वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक नया भू-राजनीतिक संकट खड़ा कर सकता है।

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