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ईरान पर मदद मांगने पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप को किम जोंग उन ने कहा नो थैंक्स, दक्षिण कोरिया के बहाने निकाला गुस्सादुनिया
25 अग॰ 2026, 10:59 pm (20 दिन पहले)· 2

ईरान पर मदद मांगने पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप को किम जोंग उन ने कहा नो थैंक्स, दक्षिण कोरिया के बहाने निकाला गुस्सा

डोनॉल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि किम जोंग उन से ईरान के मुद्दे पर मदद मांगी गई थी, लेकिन उत्तर कोरियाई तानाशाह ने साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई है।

डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों को लेकर लगातार दावे कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक और नया पोस्ट साझा किया है, जिससे साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर उन्हें एक बड़ा झटका लगा है। ट्रंप का कहना है कि जब उन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह के सामने ईरान से जुड़े मामले में सहयोग का प्रस्ताव रखा, तो उन्हें बेहद कड़ा और दो टूक जवाब मिला। किम जोंग उन ने इस अपील को सिरे से खारिज करते हुए सीधे शब्दों में मदद करने से मना कर दिया।

दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप

अपनी इस कूटनीतिक नाकामी के पीछे ट्रंप ने एक अजीब तर्क पेश किया है। उनका मानना है कि किम जोंग उन इस बात से नाराज हैं कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया लंबे समय से आपस में संयुक्त सैन्य अभ्यास करते आ रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि इन सैन्याभ्यास में पानी की तरह पैसा बहाया जाता है और इसका अधिकांश वित्तीय बोझ हमेशा अमेरिका को ही सहन करना पड़ता है। उनके मुताबिक, जब तक वह व्हाइट हाउस में थे, तब तक उत्तर कोरिया की तरफ से कभी कोई आक्रामक तेवर नहीं दिखाए गए और हमेशा पूरा सम्मान दिया गया।

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युद्ध सचिव को दिए गए बड़े निर्देश

ट्रंप ने अपने पोस्ट में इस बात का भी खुलासा किया कि दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले इन अभ्यासों को पूरी तरह से रद्द करना अब संभव नहीं था, क्योंकि इसमें काफी देर हो चुकी थी। इसके बावजूद, उन्होंने अपने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को यह सख्त निर्देश दिया कि इन संयुक्त सैन्याभ्यास के दायरे और आकार को काफी हद तक सीमित कर दिया जाए। रक्षा रणनीतिकारों के लिए ट्रंप का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि एशिया के क्षेत्र में अमेरिका की ताकत और प्रभाव को बनाए रखने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ यह सैन्य अभ्यास सबसे मजबूत आधार माना जाता है।

ईरान के मुद्दे पर मिला No Thanks का जवाब

एक तरफ दक्षिण कोरिया के साथ ड्रिल पर अपनी खीझ निकालते हुए ट्रंप ने यह सफाई दी कि इसी वजह से किम जोंग उन भड़के हुए हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उत्तर कोरियाई शासक से यह सवाल किया कि क्या वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने या उससे निपटने में अमेरिका का साथ देना चाहेंगे, तो इसका बहुत ही ठंडा और सपाट जवाब सामने आया। किम जोंग उन की तरफ से बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे तौर पर No Thanks कह दिया गया, जिसने अमेरिकी नेतृत्व की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान और उत्तर कोरिया की पुरानी धमक और चीन की चाल

भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपनी इस नाकामी का ठीकरा दक्षिण कोरिया पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान और उत्तर कोरिया के बीच के रिश्ते बहुत पुराने और गहरे हैं। दोनों देशों के बीच की यह साझेदारी दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है की तर्ज पर काम करती है। पश्चिमी देशों और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहे ये दोनों राष्ट्र लंबे समय से मिसाइल तकनीक, सैन्य साजो-सामान और कच्चे तेल के व्यापार में एक-दूसरे का संबल बनते आए हैं। इस पूरे समीकरण के पीछे चीन एक बहुत बड़ा और मौन खिलाड़ी है, जो इन दोनों देशों को आर्थिक और राजनीतिक रूप से पर्दे के पीछे से ढाल देता है ताकि वैश्विक राजनीति में अमेरिका का ध्यान हमेशा बंटा रहे।

सवाल-जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन से किस मुद्दे पर मदद मांगी थी?
डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता से ईरान के मुद्दे पर सहयोग करने को कहा था।
किम जोंग उन ने ट्रंप के प्रस्ताव पर क्या जवाब दिया?
किम जोंग उन ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर No Thanks कहकर मदद से इनकार कर दिया।
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास के बारे में क्या निर्देश दिए?
ट्रंप ने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को संयुक्त सैन्य अभ्यासों के आकार और दायरे को काफी हद तक कम करने का निर्देश दिया।
उत्तर कोरिया और ईरान के बीच किस तरह के संबंध हैं?
दोनों देश पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना करते हुए मिसाइल तकनीक, सैन्य तकनीक और कच्चे तेल के कारोबार में एक-दूसरे की मदद करते आए हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप का किम जोंग उन से ईरान पर मदद मांगना और दक्षिण कोरियाई सैन्य अभ्यासों को सीमित करना अमेरिकी कूटनीति के बदलते रुख को दर्शाता है। उत्तर कोरिया और ईरान के बीच गहरे होते भू-राजनीतिक संबंध और चीन की पृष्ठभूमि में मौजूदगी यह बताती है कि वाशिंगटन के पारंपरिक गठबंधनों के लिए आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने ईरान पर उत्तर कोरिया से मदद मांगी थी और किम जोंग उन ने इसे ठुकरा दिया, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में वाशिंगटन के घटते प्रभाव को स्पष्ट करता है। दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों को सीमित करने का निर्देश अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे एशिया में दीर्घकालिक सुरक्षा समीकरणों और प्रतिरोधक क्षमता पर गहरा असर पड़ सकता है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·20 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि प्योंगयांग और तेहरान के बीच यह असहयोग केवल एक राजनयिक अस्वीकृति नहीं है, बल्कि पश्चिमी प्रतिबंधों से घिरे देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल का परिणाम है। वाशिंगटन द्वारा दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों को कमजोर करना एशिया में अमेरिकी सुरक्षा साख को नुकसान पहुँचा सकता है, जबकि दूसरी ओर ईरान और उत्तर कोरिया का यह अनौपचारिक गठजोड़ ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय भू-राजनीति में नए समीकरण तैयार कर रहा है, जिसका सीधा असर वैश्विक कूटनीति पर पड़ेगा।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·20 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप का उत्तर कोरिया से ईरान पर मदद मांगना और किम जोंग उन द्वारा इसे ठुकराया जाना यह साबित करता है कि पश्चिमी प्रतिबंधों से घिरे देशों का यह गठबंधन कितना मजबूत हो चुका है। दक्षिण कोरिया के साथ सैन्याभ्यास का आकार छोटा करने का निर्देश देने से एशियाई सुरक्षा क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप का उत्तर कोरिया से ईरान पर मदद मांगना और किम जोंग उन द्वारा इसे ठुकराया जाना यह साबित करता है कि पश्चिमी प्रतिबंधों से घिरे देशों का यह गठबंधन कितना मजबूत हो चुका है। दक्षिण कोरिया के साथ सैन्याभ्यास का आकार छोटा करने का निर्देश देने से एशियाई सुरक्षा क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा। इस घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि प्योंगयांग और तेहरान के बीच आपसी कूटनीतिक और रणनीतिक तालमेल अब अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

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