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कंधार के 12 फीट ऊंचे रहस्यमयी विशालकाय जीव का दावा फिर चर्चा में, जानें क्या है इस दास्तान की पूरी सच्चाईदुनिया
19 अग॰ 2026, 5:04 am (27 दिन पहले)· 3

कंधार के 12 फीट ऊंचे रहस्यमयी विशालकाय जीव का दावा फिर चर्चा में, जानें क्या है इस दास्तान की पूरी सच्चाई

अफगानिस्तान के कंधार में 12 फीट लंबे और छह उंगलियों वाले एक रहस्यमयी जीव के साथ अमेरिकी सैनिकों की मुठभेड़ का दो दशक पुराना दावा जो रोगन के पॉडकास्ट के बाद फिर सुर्खियों में आ गया है।

अफगानिस्तान के बीहड़ इलाकों में दो दशक पुरानी एक बेहद विचित्र और सनसनीखेज कहानी एक बार फिर से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी तेजी से वायरल हो रही है। यह पूरा मामला कंधार के एक दुर्गम गुफा क्षेत्र से जुड़ा हुआ बताया जाता है, जहां कथित तौर पर अमेरिकी सेना के विशेष दस्ते का सामना करीब 12 फीट लंबे एक बेहद विशालकाय जीव से हुआ था। इस विचित्र प्राणी को लेकर किए जा रहे दावों में बताया गया है कि उसका वजन लगभग 500 किलोग्राम के आसपास था और उसके दोनों हाथों तथा दोनों पैरों में छह-छह उंगलियां मौजूद थीं। इसके साथ ही, उसके शरीर पर लाल या हल्के भूरे रंग के लंबे बाल और बेहद मजबूत बनावट थी। यह कहानी लंबे समय से इंटरनेट और ऑडियो शो का हिस्सा रही है, लेकिन अब एक लोकप्रिय पॉडकास्ट में इसका जिक्र आने के बाद लोगों के बीच इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई है कि क्या वाकई में कंधार में किसी ऐसे भीमकाय इंसान जैसे जीव का अस्तित्व मौजूद था या फिर यह महज एक मनगढ़ंत अफवाी दास्तान है।

कंधार की गुफा में अमेरिकी सैनिकों से मुठभेड़ की दास्तान

इस रहस्यमयी घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त की बताई जाती है जब अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों की एक गश्ती टीम अचानक गायब हो गई थी। लापता सैनिकों का सुराग लगाने और उनकी तलाश करने के लिए सेना के एक अन्य दस्ते को संबंधित इलाके में रवाना किया गया। जब यह खोजी दल पहाड़ों के बीच स्थित एक गुफा के प्रवेश द्वार के पास पहुंचा, तब वहां से अचानक एक विशालकाय इंसान जैसा प्राणी बाहर निकला और उसने तुरंत सैनिकों पर हमला कर दिया। दावों के मुताबिक, इस अचानक हुए हिंसक हमले में एक अमेरिकी सैनिक की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद स्थिति को संभालते हुए बाकी सैनिकों ने रक्षात्मक रुख अपनाया और उस विशालकाय प्राणी पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिससे वह वहीं ढेर हो गया।

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सैनिकों के बयानों का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस जीव की ऊंचाई लगभग 10 से 12 फीट के बीच थी और उसकी शारीरिक संरचना सामान्य इंसानों से काफी अलग और विशाल थी। उसकी त्वचा का रंग काफी सफेद या हल्का था, जबकि उसके बाल लाल और भूरे रंग के मिश्रित थे। इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला विवरण यह दिया गया कि उस जीव के प्रत्येक हाथ में पांच के बजाय छह उंगलियां थीं और इसी तरह उसके पैरों में भी छह-छह उंगलियां मौजूद थीं।

सैन्य विमान से शव हटाने का दावा और पायलट का बयान

घटना के बाद उस रहस्यमयी जीव के शव के निपटारे को लेकर भी कई दावे किए जाते रहे हैं। रीसर्चर टिमोथी अल्बेरिनो ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए एक अमेरिकी सैन्य विमान के पायलट के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया। उस पायलट का दावा था कि उसने सैन्य परिवहन विमान में एक बहुत बड़े मानव शरीर को तिरपाल से ढका हुआ देखा था। तिरपाल के नीचे से उस शरीर के हाथ, पैर और सिर का कुछ हिस्सा बाहर दिखाई दे रहा था, जिससे यह साफ लग रहा था कि वह कोई सामान्य इंसान का शरीर नहीं है।

पायलट के अनुसार, उस लपेटे हुए शरीर के सिर पर लाल बाल और हाथों-पैरों में छह-छह उंगलियां स्पष्ट नजर आ रही थीं। विमान में चढ़ाने से पहले उस शव को पैलेट सहित तौला गया था, जहां कुल वजन लगभग 1500 पाउंड यानी करीब 680 किलोग्राम दर्ज हुआ था। जब पैलेट का अपना वजन उसमें से घटाया गया, तब उस अज्ञात जीव का खुद का वजन लगभग 500 किलोग्राम के आसपास आंका गया था। हालांकि, इस पूरे दावे में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस बयान को देने वाले पायलट की वास्तविक पहचान कभी सार्वजनिक नहीं की गई और न ही स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि हो पाई है।

जो रोगन के पॉडकास्ट पर चर्चा और अन्य रहस्यमयी दावे

जुलाई 2026 में टिमोथी अल्बेरिनो ने मशहूर पॉडकास्टर जो रोगन के शो में हिस्सा लिया और इस पुरानी कहानी को एक बार फिर से प्रमुखता के साथ उठाया। बातचीत के दौरान जो रोगन ने भी स्वीकार किया कि अल्बेरिनो द्वारा साझा की गई तमाम रहस्यमयी कहानियों में कंधार के इस विशालकाय जीव की दास्तान ने उनका विशेष ध्यान खींचा। अल्बेरिनो ने दावा किया कि उन्होंने अफगानिस्तान में सेवाएं दे चुके कई सैन्य कर्मियों और नागरिकों से इस बारे में बात की है, जिन्होंने क्षेत्रों में प्रचलित विशाल जीवों से जुड़ी कहानियों को पूरी तरह खारिज नहीं किया।

अल्बेरिनो ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी से कंधार के इस जीव के बारे में सीधा सवाल पूछा, तो वह अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ रहा। इसके अलावा, उन्होंने मामले को और बड़ा रूप देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक अकेले जीव का मामला नहीं था, बल्कि इसे कंधार के जायंट्स कहा जाना चाहिए क्योंकि अमेरिकी सेना को ऐसे कई जीवों की मौजूदगी की जानकारी थी। हालांकि, इन सभी गंभीर दावों को सिद्ध करने के लिए आज तक कोई आधिकारिक सैन्य दस्तावेज, तस्वीर या सबूत प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

दो दशकों से इंटरनेट पर तैरती कहानी और ठोस सबूतों का अभाव

कंधार के विशालकाय जीव की यह कहानी कोई नई घटना नहीं है, बल्कि इसका इतिहास कम से कम 2005 से देखने को मिलता है। उस दौरान रीसर्चर स्टीव क्वेल ने अमेरिकी वायुसेना के एक अधिकारी के हवाले से इंटरनेट और रेडियो कार्यक्रमों में अफगानिस्तान में विशालकाय जीव मिलने का दावा सबसे पहले किया था। इसके बाद साल 2008 में भी एक सैन्य पायलट के नाम से जारी बयानों के जरिए इस मुद्दे को दोबारा हवा दी गई थी। अब जुलाई 2026 में जो रोगन के शो पर हुई बातचीत के बाद यह पुरानी दास्तान नए सिरे से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी है।

इन तमाम दावों और आकर्षक कहानियों के बावजूद, इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि 12 फीट लंबे इस कथित जीव की मौजूदगी का कोई भी प्रमाणिक या वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है। पूरी कहानी केवल अनाम लोगों के कथित बयानों, सुनी-सुनाई बातों और बिना किसी दस्तावेजी पुष्टि वाले दावों पर टिकी हुई है, जिसे अधिकांश सैन्य विश्लेषक और शोधकर्ता एक शहरी किंवदंती या इंटरनेट अफवाह ही मानते हैं।

सवाल-जवाब

कंधार का जायंट क्या है?
यह एक 20 साल पुराना दावा है जिसमें कहा जाता है कि अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान के कंधार में 12 फीट लंबे और 500 किलो वजनी छह उंगलियों वाले एक विशालकाय जीव को मारा था।
क्या कंधार के विशालकाय जीव की मौजूदगी का कोई सबूत है?
नहीं, इस दावे का समर्थन करने वाला कोई भी सैन्य दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड या भौतिक सबूत मौजूद नहीं है।
जुलाई 2026 में यह कहानी दोबारा क्यों चर्चा में आई?
रीसर्चर टिमोथी अल्बेरिनो ने जुलाई 2026 में जो रोगन के पॉडकास्ट पर इस कहानी का जिक्र किया, जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
इस कहानी की शुरुआत कब हुई थी?
यह कहानी कम से कम 2005 से इंटरनेट और रेडियो कार्यक्रमों में स्टीव क्वेल और अन्य लोगों के माध्यम से घूम रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·26 दिन पहले

यह वायरल कहानी सोशल मीडिया के एल्गोरिदम और डिजिटल एंगेजमेंट का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भू-राजनीतिक संघर्ष क्षेत्रों से जुड़े दशकों पुराने मिथकों को नया जीवन देती है। अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के संदर्भ में ऐसे सनसनीखेज दावे अक्सर वास्तविक सुरक्षा वार्ताओं और इतिहास से जनता का ध्यान भटकाने का काम करते हैं। डिजिटल युग में इस तरह की अप्रमाणित और अलौकिक कथाओं का बार-बार उभरना यह दर्शाता है कि इंटरनेट पर सनसनीखेज सामग्री कितनी तेजी से मुख्यधारा की बहस पर हावी हो जाती है, जिससे तार्किक विश्लेषण की जगह अवास्तविक अटकलों को बढ़ावा मिलता है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·26 दिन पहले

ऐसी सनसनीखेज लोककथाओं और इंटरनेट की कहानियों का बार-बार वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सूचना के खालीपन का उपयोग किस तरह भ्रामक नैरेटिव गढ़ने के लिए किया जाता है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के दौर में जब आधिकारिक जानकारी सीमित होती है, तो इस प्रकार के मिथक न केवल डिजिटल स्पेस में ध्यान आकर्षित करते हैं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का काम भी करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

संघर्ष क्षेत्रों में इस तरह की अलौकिक कहानियों का वायरल होना एक खतरनाक मनोवैज्ञानिक पैटर्निंग को दर्शाता है, जहाँ युद्ध की कठोर वास्तविकताओं से ध्यान भटकाने के लिए सुनियोजित तरीके से भ्रामक कथाएं गढ़ी जाती हैं। एक अपराध और सुरक्षा मामलों के संवाददाता के रूप में मेरा अनुभव यह बताता है कि ऐसे अनवेरिफाइड दावों का उपयोग अक्सर सूचना युद्ध का हिस्सा बनकर जनमानस में अनावश्यक सनसनी फैलाने और गंभीर सामरिक सच को छिपाने के लिए किया जाता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

ऐसी अलोकप्रिय और पौराणिक कथाओं का सोशल मीडिया पर बार-बार उभरना इस बात का संकेत है कि जनता युद्धग्रस्त क्षेत्रों से जुड़ी कल्पित कहानियों और सैन्य रहस्यों के प्रति कितनी आकर्षित होती है। मुख्यधारा की राजनीति और कूटनीति के बीच, इस तरह के डिजिटल नैरेटिव अक्सर वास्तविक भू-राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम करते हैं, हालांकि ये इंटरनेट संस्कृति का एक दिलचस्प हिस्सा बन चुके हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

अर्जुन मेहता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि ऐसे सनसनीखेज दावे सोशल मीडिया के एल्गोरिदम पर कैसे पलते हैं। जब उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में डिजिटल साक्षरता और सोशल मीडिया की पैठ तेजी से बढ़ रही है, तब इस तरह की बिना पुष्टि वाली कहानियाँ बहुत कम समय में वायरल हो जाती हैं। इससे न केवल तथ्यात्मक पत्रकारिता प्रभावित होती है, बल्कि जनता का ध्यान वास्तविक और गंभीर मुद्दों जैसे बुनियादी ढांचे, शासन और सामाजिक सरोकारों से भटक जाता है। डिजिटल युग में यह प्रवृत्ति गंभीर मीडिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी है कि वह पाठकों को सनसनी से दूर रखकर प्रामाणिक सूचनाओं से जोड़े रखे।

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