कनाडा की धरती पर मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के कत्ल को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद एक नए मोड़ पर आ गया है। इस हत्याकांड के पीछे भारत सरकार का हाथ होने के तमाम दावे किए गए थे, लेकिन अब एक वायरल ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद पूरी कहानी बदलती हुई नजर आ रही है। इस ऑडियो में गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और एक अन्य खालिस्तानी आतंकी परमजीत पम्मा के बीच बातचीत रिकॉर्ड है, जिसमें गोल्डी बराड़ खुद कबूल कर रहा है कि हरदीप सिंह निज्जर को उसी ने मौत के घाट उतारा है। इस खुलासे के बाद कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो द्वारा भारत पर लगाए गए गंभीर इल्जामों की पोल पूरी तरह खुल गई है और वे वैश्विक स्तर पर कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
ड्रग्स नेटवर्क और आपसी रंजिश बनी कत्ल की वजह
वायरल हो रही ऑडियो रिकॉर्डिंग में गोल्डी बराड़ खुलकर बता रहा है कि हरदीप सिंह निज्जर को क्यों निशाना बनाया गया था। उसके मुताबिक, इस हत्या के पीछे कोई राजनीतिक साजिश नहीं बल्कि ड्रग्स नेटवर्क और अवैध गतिविधियों का काला कारोबार था। बातचीत में यह दावा किया गया है कि कम उम्र के लड़कों को नशीले पदार्थों के जाल में फंसाकर और उन्हें ब्लैकमेल करके उनके खिलाफ मामले तैयार किए जा रहे थे। इस सिंडिकेट को चलाने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही थी और मुखबिरी का खेल भी चल रहा था। गोल्डी बराड़ का कहना है कि इन तमाम गतिविधियों को हरदीप सिंह निज्जर द्वारा मजबूत किया गया था ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके। इस ऑडियो में चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत करेगा, तो उसे भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
जस्टिन ट्रुडो के बयानों से उपजा कूटनीतिक तनाव
इस पूरे मामले की शुरुआत 18 सितंबर 2023 को हुई थी, जब उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री पद पर काबिज जस्टिन ट्रुडो ने देश की संसद में खड़े होकर भारत सरकार पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े थे। उनका कहना था कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारतीय एजेंटों की संलिप्तता हो सकती है। इस बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बयान के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए थे और राजनयिक दूरियां काफी बढ़ गई थीं। हालांकि, अब गोल्डी बराड़ के इस कबूलनामे वाले ऑडियो के सामने आने के बाद जस्टिन ट्रुडो के वे तमाम दावे झूठे साबित हो रहे हैं, जिनका इस्तेमाल उन्होंने भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर धूमिल करने के लिए किया था।
कौन था हरदीप सिंह निज्जर और क्या था उसका इतिहास
मूल रूप से पंजाब के जालंधर जिले के रहने वाले हरदीप सिंह निज्जर ने साल 1997 में देश छोड़ा था और कनाडा की नागरिकता हासिल कर ली थी। विदेश की जमीन पर रहकर वह लगातार खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और देशविरोधी षड्यंत्रों में सक्रिय रूप से शामिल रहा था। भारत सरकार ने उसे प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स यानी केटीएफ का प्रमुख घोषित कर रखा था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, निज्जर कई हिंसक और अलगाववादी वारदातों का मुख्य मास्टरमाइंड था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की वांटेड सूची में उसका नाम काफी ऊपर था और उसके खिलाफ कई संगीन मामलों में जांच चल रही थी। उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया गया था, जो साबित करता है कि वह सिर्फ एक समर्थक नहीं बल्कि एक वांटेड अपराधी था।
ब्रिटिश कोलंबिया में हुई थी सनसनीखेज वारदात
18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह शहर के एक गुरुद्वारे परिसर से बाहर आ रहा था, तभी घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इस दुस्साहसिक वारदात ने न सिर्फ कनाडाई प्रशासन बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया था। घटना के तुरंत बाद जस्टिन ट्रुडो ने संसद में बयान देकर बिना किसी ठोस सबूत के सारा ठीकरा भारत के सिर फोड़ दिया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था।
विदेश से आपराधिक साम्राज्य चला रहा है गोल्डी बराड़
गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का नाता पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब और फरीदकोट क्षेत्र से माना जाता है। वर्ष 2017 में वह छात्र वीजा के जरिए कनाडा गया था और वहीं से उसने पंजाब में जघन्य अपराधों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया। जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका गिरोह रंगदारी वसूलने, व्यापारियों को धमकी देने और हिंसक वारदातों को अंजाम देने में लिप्त रहा है। देश से दूर बैठकर आपराधिक सिंडिकेट संचालित करने के कारण वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी और लगातार बनी रहने वाली चुनौती है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 29 मई 2022 को मानसा जिले में हुई हत्या के बाद गोल्डी बराड़ का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया था, जब उसने सोशल मीडिया के जरिए इस कत्ल की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद से वह एनआईए और अन्य जांच एजेंसियों के रडार पर है और भारत सरकार ने उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित कर रखा है।





















