प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरे का आखिरी दिन यानी 10 जुलाई 2026 बेहद खास रहा। इस यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, व्यापारिक और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कई बड़े और अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं। दोनों देशों ने आपसी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए रक्षा सहयोग, यूरेनियम की आपूर्ति और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण में द्विपक्षीय संबंधों में खेल कूटनीति का एक नया और उत्साहजनक अध्याय जुड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और वहां के पूर्व दिग्गज क्रिकेट कप्तान स्टीव वॉ के साथ दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल स्टेडियमों में से एक, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड का दौरा किया। इस शानदार कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे, जो तकरीबन चालीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होने जा रही है।
रणनीतिक समझौतों से मजबूत हुए द्विपक्षीय संबंध
प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच केवल सांस्कृतिक संबंध बढ़ाना ही नहीं था, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित करना भी था। इसी कड़ी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों के साथ-साथ यूरेनियम आपूर्ति की निरंतरता को सुनिश्चित करने वाले समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त, आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आवश्यक रेयर अर्थ मिनरल्स की निर्बाध आपूर्ति के लिए भी दोनों देशों ने एक मजबूत रोडमैप तैयार किया है। ये समझौते आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने में भी मील का पत्थर साबित होंगे। इन गंभीर राजनीतिक चर्चाओं के बाद दोनों नेताओं ने खेलों के माध्यम से दोनों देशों की जनता को जोड़ने का प्रयास किया।
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेल कूटनीति का नजारा
दुनिया भर में अपनी भव्यता और समृद्ध इतिहास के लिए जाने जाने वाले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी ने एक अद्भुत दृश्य पेश किया। इस अवसर पर उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के महान पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद थे, जिन्होंने अपनी आक्रामक और अनुशासित कप्तानी से क्रिकेट की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां मौजूद कई युवा खिलाड़ियों से बेहद गर्मजोशी के साथ मुलाकात की। उन्होंने इन उभरते हुए खिलाड़ियों के साथ बातचीत की, उनके खेल के बारे में जाना और उन्हें अपने ऑटोग्राफ देकर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद थे, जो पूरे समय मुस्कुराते हुए इस अनूठे पलों का आनंद लेते नजर आए। यह दृश्य दोनों देशों के बीच गहरी आत्मीयता और मैत्रीपूर्ण संबंधों का जीवंत उदाहरण था।
'भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन' की शुरुआत
इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए 'भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन' को लॉन्च करने की घोषणा की। इस साझेदारी की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच खेलों के क्षेत्र में यह आपसी सहयोग भविष्य में एक नया आयाम स्थापित करेगा। एमसीजी में आयोजित खिलाड़ियों, खेल प्रशिक्षकों और युवा खेल प्रेमियों की एक विशेष सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह मैदान केवल कंक्रीट और घास से बना एक स्टेडियम नहीं है, बल्कि यह खेल भावना, कड़े अनुशासन, अटूट समर्पण और मानवीय उत्कृष्टता का एक जीवंत प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने इस बेहतरीन मेजबानी के लिए अपने समकक्ष एंथनी अल्बनीज का दिल से आभार व्यक्त किया और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने खेल से दुनिया भर की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
खेलों का व्यापक महत्व और राष्ट्रीय पहल
अपने प्रेरक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि खेल का दायरा केवल मैदान पर होने वाली जीत या हार तक ही सीमित नहीं होता है। उन्होंने कहा कि खेल हमें टीम भावना, आपसी सम्मान, कड़ा अनुशासन और जीवन के कठिन संघर्षों से सीखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री ने युवा एथलीटों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए, उनके लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और खेल भावना को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार द्वारा देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं जैसे 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' अभियानों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने देश के कोने-कोने से युवा प्रतिभाओं को तलाशने, उन्हें विश्व स्तरीय प्रशिक्षण देने और नागरिकों को एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का काम किया है, जिसके परिणाम आज वैश्विक खेल मंचों पर दिखाई दे रहे हैं।
वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण मंच का उपयोग वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती खेल महत्वाकांक्षाओं को साझा करने के लिए भी किया। उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही, भारत वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की भव्य मेजबानी का अधिकार प्राप्त करने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन बड़े खेल आयोजनों की तैयारियों के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के पास अपने अनुभवों को साझा करने, तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने और संयुक्त रूप से बुनियादी ढांचे के विकास पर काम करने के बेहतरीन अवसर होंगे। उन्होंने कहा कि 'भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन' के तहत दोनों देशों के पास आने वाले वर्षों में एक-दूसरे से सीखने और साथ मिलकर खेलों को बढ़ावा देने के कई बेहतरीन मौके होंगे।
नया साझा मंत्र: लेट अस प्ले टुगेदर, लेट अस ड्रीम टुगेदर
अपने ऐतिहासिक भाषण के समापन पर प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के युवाओं और खेल प्रेमियों को 'लेट अस प्ले टुगेदर, लेट अस ड्रीम टुगेदर' का एक नया साझा मंत्र दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध केवल औपचारिक राजनीतिक समझौतों, रणनीतिक संधियों या व्यापारिक लेनदेन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल एक ऐसा बेहद मजबूत और भावनात्मक सेतु है जो दोनों देशों की जनता को आपस में जोड़ता है। विशेष रूप से क्रिकेट ने दोनों देशों के नागरिकों के दिलों में एक विशेष आत्मीयता और सम्मान की भावना पैदा की है। प्रधानमंत्री के इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में यह खेल सहयोग दोनों देशों के आपसी संबंधों को और भी प्रगाढ़ और ऐतिहासिक बनाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों ने खेल के विकास के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और खेल के जरिए दुनिया में शांति का संदेश दिया।











