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पाकिस्तान की सैन्य मदद रोके अमेरिका और चीन, बलूचिस्तान के नेताओं की डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग से गुहारदुनिया
17 अग॰ 2026, 8:01 pm (2 घंटे पहले)· 1

पाकिस्तान की सैन्य मदद रोके अमेरिका और चीन, बलूचिस्तान के नेताओं की डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग से गुहार

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुला खत लिखकर पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य और आर्थिक मदद रोकने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान इन विदेशी हथियारों का इस्तेमाल बलूच नागरिकों के दमन और हवाई हमलों में कर रहा है।

पाकिस्तान के नियंत्रण से बलूचिस्तान को मुक्त कराने की मांग उठाने वाले रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान संगठन ने अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व के नाम एक खुला और साझा पत्र जारी किया है। इस खत के जरिए संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से गंभीर अपील की है कि वे पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य सहायता और आर्थिक मदद पर तत्काल रोक लगाएं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी प्रशासन इन विदेशी हथियारों और संसाधनों का उपयोग बलूच राष्ट्र के खिलाफ सैन्य अभियानों को अंजाम देने के लिए कर रहा है।

सुराब में हवाई हमलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप

पत्र में पाकिस्तान की सेना पर बलूचिस्तान के भीतर क्रूर सैन्य कार्रवाई करने और निर्दोष नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का संगीन इल्जाम लगाया गया है। संगठन ने विशेष रूप से 12 अगस्त 2026 की एक घटना का हवाला दिया है, जब बलूचिस्तान के सुराब इलाके में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने बमबारी की थी। इन हवाई हमलों में महिलाओं और मासूम बच्चों समेत कुल 30 बेकसूर बलूच नागरिकों की जान चली गई थी। इसके साथ ही, रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तानी सैन्य तंत्र ने इन हमलों से साफ तौर पर इनकार कर दुनिया के सामने झूठी और भ्रामक जानकारी पेश की है।

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अमेरिका को अतीत में गुमराह करने का इतिहास

संगठन ने अपने पत्र में याद दिलाया कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान ने पूर्व में भी अमेरिकी प्रशासनों को धोखे में रखा है। इसमें जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसके दौरान पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन की उपस्थिति और उसकी हरकतों को लेकर अमेरिका से सच्चाई छिपाई थी। बलूच प्रतिनिधियों का मानना है कि पाकिस्तान वैश्विक ताकतों को गुमराह करने में माहिर रहा है और अब वक्त आ गया है कि इस दोहरे रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाए।

चीन और CPEC की वास्तविक जमीनी स्थिति पर पर्दा डालने का दावा

केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि चीन को लेकर भी पाकिस्तान पर गंभीर आरोप मढ़े गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान बीजिंग प्रशासन को बलूचिस्तान के हालात और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC की जमीनी हकीकत के बारे में लगातार अंधेरे में रख रहा है। संगठन के मुताबिक, हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शाम 6 बजे के बाद पाकिस्तान की सेना के लिए बलूचिस्तान की सड़कों पर सफर करना तक मुमकिन नहीं रह गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे बलूचिस्तान क्षेत्र में जमीन पर अपनी पकड़ पूरी तरह खो दी है।

अमेरिकी सैन्य उपकरणों और एफ-16 विमानों का इतिहास

खुले पत्र में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को अतीत में दिए गए भारी-भरकम सैन्य साजो-सामान का पूरा लेखा-जोखा रखा गया है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के अनुसार, वाशिंगटन ने 1983 से 1987 के बीच पीस गेट I और II कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान की वायु सेना को 40 F-16A/B लड़ाकू विमान सौंपे थे। इसके अलावा, साल 2006 में अमेरिकी प्रशासन ने एक और बड़ा रक्षा पैकेज मंजूर किया था। इस पैकेज के तहत 18 F-16C/D Block 52 विमान दिए गए, 34 पुराने F-16 विमानों का एमएलयू प्रोग्राम के जरिए आधुनिकीकरण किया गया, साथ ही AIM-120C मिसाइलें, कलपुर्जे, तकनीकी सहायता और इंजन सपोर्ट मुहैया कराया गया। इस व्यापक और महंगे रक्षा पैकेज की कुल कीमत करीब 5 अरब डॉलर आंकी गई थी।

चीन के साथ दशकों पुराने सैन्य और सामरिक संबंध

चीनी सहयोग का जिक्र करते हुए पत्र में बताया गया है कि बीजिंग ने 1960 के दशक से ही पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर हथियार और सैन्य साजो-सामान मुहैया कराना शुरू कर दिया था। उस शुरुआती दौर में लगभग 165 MiG-19 लड़ाकू विमानों समेत तमाम हथियार और सैन्य उपकरण पाकिस्तान को दिए गए थे, जिनकी कुल कीमत 1970 के दशक के शुरुआती सालों तक करीब 20 करोड़ डॉलर आंकी गई थी। इन पुराने विमानों का इस्तेमाल कोहिस्तान मरी और झलावान क्षेत्रों में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने के लिए धड़ल्ले से किया गया था। वक्त के साथ चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा रक्षा साझीदार बन गया और उसने एफ-7, ए-5, के-8 विमानों के साथ-साथ मिसाइलें और आधुनिक नौसैनिक प्रणालियां भी प्रदान कीं। दोनों देशों ने मिलकर JF-17 Thunder विमान भी विकसित किया। इसके अलावा, साल 2015 में चीन ने पाकिस्तान को आठ Yuan-class पनडुब्बियां देने का बड़ा समझौता किया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 अरब डॉलर बैठती है।

युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि विदेशी ताकतों से मिलने वाले हथियार, विमान और लॉजिस्टिक समर्थन का इस्तेमाल पाकिस्तान बलूच राष्ट्र के खिलाफ दमनकारी अभियानों में करता आया है। संगठन का कड़ा रुख है कि पाकिस्तान और बलूचिस्तान दो बिल्कुल अलग राष्ट्र हैं और इस्लामाबाद का बलूचिस्तान की जमीन, उसके समुद्री इलाकों और हवाई क्षेत्र पर कोई कानूनी या वैध अधिकार नहीं बनता। बलूच प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से अपील की है कि वे पाकिस्तान को सैन्य मदद जारी रखने के भयानक परिणामों पर गंभीरता से विचार करें। सुराब में हाल ही में हुए हवाई हमलों के वीडियो और तमाम रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि महिलाओं और बच्चों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन है और स्वतंत्र जांच के बाद ऐसे कृत्य युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

वैध निवेश और आर्थिक सहयोग का स्वागत, लेकिन शर्तों के साथ

अपने पत्र के अंत में रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने यह महत्वपूर्ण बात भी साफ कर दी है कि उनका संगठन किसी भी तरह के वैध अंतरराष्ट्रीय निवेश, आपसी व्यापार, आर्थिक सहयोग या बुनियादी विकास का विरोधी नहीं है। हालांकि, उनका स्पष्ट कहना है कि यदि अमेरिका, चीन या दुनिया का कोई भी अन्य देश बलूचिस्तान की धरती के प्राकृतिक संसाधनों, आधारभूत ढांचे, बंदरगाहों, एयरबेस, ऊर्जा भंडारों या बाजारों तक पहुंच बनाना चाहता है, तो यह सब सीधे तौर पर बलूच जनता और उनके प्रामाणिक राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ पारदर्शी बातचीत के जरिए ही होना चाहिए। पाकिस्तान की सैन्य हुकूमत को हथियार या आर्थिक मदद देकर बलूचिस्तान के संसाधनों पर कब्जा जमाने की कोशिशों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सवाल-जवाब

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने किन नेताओं को खुला पत्र लिखा है?
संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को यह खुला संयुक्त पत्र भेजा है।
पत्र में पाकिस्तान पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाया गया है?
पत्र में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान विदेशी सैन्य सहायता का उपयोग बलूचिस्तान में नागरिकों के दमन और सैन्य कार्रवाइयों के लिए कर रहा है।
सुराब इलाके की घटना में कितने लोगों की मौत हुई थी?
12 अगस्त 2026 को सुराब इलाके में हुए हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 30 निर्दोष नागरिक मारे गए थे।
चीन और पाकिस्तान के बीच पनडुब्बी सौदे की कीमत कितनी बताई गई है?
साल 2015 में हुए समझौते के तहत चीन द्वारा आठ Yuan-class पनडुब्बियां देने के सौदे की कीमत करीब 5 अरब डॉलर थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·1 घंटे पहले

यह खुला खत अमेरिका और चीन के बीच एक अनोखा भू-राजनीतिक दबाव बिंदु बनाता है। बलूच नेतृत्व द्वारा वाशिंगटन और बीजिंग को एक मंच पर लाना यह दर्शाता है कि CPEC और रणनीतिक गलियारों की सुरक्षा अब कितनी अस्थिर हो चुकी है। यदि महाशक्तियां इस अपील पर विचार करती हैं, तो इस्लामाबाद के लिए अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ आ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

यह अपील केवल मानवीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक बड़ा संदेश देती है। जब बलूच संगठन अमेरिका और चीन जैसी दो प्रतिद्वंद्वी महाशक्तियों को एक साथ संबोधित करता है, तो यह CPEC परियोजना की सुरक्षा और चीन के रणनीतिक हितों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि इस दबाव के चलते सैन्य सहायता पर पुनर्विचार होता है, तो इस्लामाबाद की आंतरिक सुरक्षा नीति और बाहरी गठबंधनों में गंभीर अस्थिरता आ सकती है, जो दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।

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