अ अक्तूबर 2023 में इजरायल की सरजमीं पर हमास की तरफ से किए गए भीषण हमलों के बाद से ही इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए गाजा पट्टी को मलबे के ढेर में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस बीच, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार का हिस्सा एक कड़े तेवर वाले दक्षिणपंथी नेता और मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर एक ऐसा बयान दे डाला है जिससे नया विवाद पैदा हो गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमर बेन-ग्विर ने एक चर्चा के दौरान कहा है कि गाजा में हर रात 30 से 40 लोगों को मौत के घाट उतारा जाना चाहिए। उनके इस सनसनीखेज बयान के सामने आने के बाद फलस्तीनी मीडिया से लेकर वैश्विक मंचों तक भारी हलचल मच गई है और इसकी तीखी आलोचना की जा रही है।
पॉडकास्ट के दौरान सामने आया विवादित बयान
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब इतमर बेन-ग्विर ने रोम ब्रास्लाव्स्की के पॉडकास्ट में हिस्सा लिया। रोम ब्रास्लाव्स्की वही शख्स हैं जिन्हें पूर्व में बंधक बनाया गया था। दोनों लोग सात अक्तूबर, 2023 को हुए हमास के हमलों के बाद पैदा हुए सुरक्षा हालातों और मौजूदा रणनीतियों पर खुलकर बात कर रहे थे। इसी बातचीत के दौरान मंत्री महोदय ने गाजा में हाल के दिनों में इजरायली वायु सेना द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों में आई सुस्ती पर खुलकर असंतोष जताया। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि प्रधानमंत्री के साथ उनके मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं और उनकी साफ सोच यह है कि गाजा के भीतर सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाया जाना चाहिए।
जीने के लायक नहीं हैं कई लोग
अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए इतमर बेन-ग्विर ने कहा कि केवल उन लोगों को ही निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए जो तुरंत या सीधा खतरा पेश कर रहे हैं, बल्कि गाजा में कई ऐसे लोग भी मौजूद हैं जिन्हें जिंदा रहने का कोई हक नहीं है और उन्हें जीवित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि हर रात कम से कम 30 से 40 लोगों को इस तरह के हमलों का शिकार बनाया जाना चाहिए। हालांकि मंत्री के पास सीधे तौर पर सेना को युद्धक्षेत्र में हमले का आदेश देने की आधिकारिक शक्ति नहीं है, लेकिन वे देश के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली राजनेताओं की फेहरिस्त में शुमार हैं। उनके नियंत्रण में देश की जेलों का प्रबंधन और राष्ट्रीय पुलिस जैसे बेहद संवेदनशील सुरक्षा तंत्र आते हैं।
अंतरराष्ट्रीय अदालतों में पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इतमर बेन-ग्विर और उनके जैसे अन्य इजरायली हुक्मरानों के भड़काऊ और आक्रामक बयान पहले भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आलोचना का केंद्र रहे हैं। कई मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों ने ऐसे बयानों को सबूत के तौर पर संयुक्त राष्ट्र की विश्व अदालत के सामने पेश किया है ताकि यह साबित किया जा सके कि वहां नरसंहार जैसी मंशा के तहत कार्रवाइयां हो रही हैं। हालांकि, इजरायली सरकार ने गाजा में नरसंहार या किसी भी तरह के मानवाधिकार हनन के तमाम आरोपों को हमेशा सिरे से खारिज किया है। एक तरफ गाजा में सैन्य कार्रवाई के चलते अब तक भारी जानी नुकसान हुआ है, तो दूसरी तरफ इस खूनी संघर्ष को रोकने और युद्धविराम कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी लगातार जारी हैं।



















