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पीओके में सुरक्षाबलों की हिंसा पर पर्दा डालने की कोशिश, अंतरराष्ट्रीय चैनल अल-जजीरा पर भी पाकिस्तान में लगा बैनदुनिया
4 अग॰ 2026, 5:20 am (42 दिन पहले)· 1

पीओके में सुरक्षाबलों की हिंसा पर पर्दा डालने की कोशिश, अंतरराष्ट्रीय चैनल अल-जजीरा पर भी पाकिस्तान में लगा बैन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भी शिकंजा कसने लगा है। अल-जजीरा की वेबसाइट ब्लॉक होने की खबरों के साथ ही मानवाधिकार संगठन ने हिंसा में 80 लोगों की मौत का दावा किया है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई के बीच अब गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं कि इस्लामाबाद प्रशासन हकीकत को दुनिया की नजरों से छिपाने की कोशिश में जुटा है। स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के पहरे के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित समाचार चैनल अल-जजीरा इंग्लिश की वेबसाइट तक देश के विभिन्न हिस्सों में एक्सेस नहीं हो पा रही है। इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस वैश्विक न्यूज नेटवर्क को आमतौर पर मुस्लिम दुनिया और वहां के समुदायों से जुड़े मुद्दों की व्यापक कवरेज के लिए पहचाना जाता है। हालांकि, पाकिस्तानी हुकूमत ने अभी तक इन पाबंदियों को लेकर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

वेबसाइट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती पाबंदियां

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइटों की एक्सेस बाधित की गई है, वे हाल के दिनों में पीओके के भीतर चल रहे जन-आंदोलनों, सुरक्षा बलों की दमनकारी नीतियों और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों को प्रमुखता के साथ प्रसारित कर रही थीं। इसी दौर में कई क्षेत्रीय डिजिटल चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी कथित तौर पर नकेल कसी गई। यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की कार्रवाई की गई हो, क्योंकि इससे पहले अदालत के आदेश का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, उनकी पार्टी और हुकूमत की मुखालफत करने वाले कई स्वतंत्र पत्रकारों के यूट्यूब चैनलों पर भी शिकंजा कसने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। खुद अल-जजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि ऐसे 27 कंटेंट क्रिएटर्स को कानूनी नोटिस थमाए गए थे।

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हिंसा में मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मानवाधिकार रिपोर्ट

इस बीच, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी एचआरसी-पीओजेके द्वारा जारी किए गए ताजा और डरावने आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम और झड़पों के दौरान अब तक कुल 80 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। इन आंकड़ों के अनुसार, इस तबाही में 27 जुलाई से पहले जान गंवाने वाले 33 नागरिक शामिल हैं, जबकि 27 जुलाई के बाद रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में 43 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा इस संघर्ष की चपेट में आकर जान गंवाने वाले 4 पुलिसकर्मी भी इन आंकड़ों का हिस्सा बताए गए हैं, जिससे इलाके के हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गोलीबारी और प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार के आरोप

हालात उस वक्त और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी ने एक वीडियो सार्वजनिक किया। इस वीडियो के जरिए यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि सुरक्षाबलों के साथ सादे कपड़ों में घूम रहा एक संदिग्ध व्यक्ति सीधे तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाते हुए साफ नजर आ रहा है। एक्शन कमेटी ने प्रशासन पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए कहा कि सड़कों पर उतरे निहत्थे आम नागरिकों को बेरहमी से घसीटा गया और उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई, जिससे जनता का गुस्सा और अधिक भड़क गया है।

सवाल-जवाब

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल कितनी मौतें दर्ज की गई हैं?
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक कुल 80 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
किन वेबसाइटों पर रोक लगाने की खबरें सामने आई हैं?
रिपोर्टों के मुताबिक, अल जजीरा इंग्लिश जैसी अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट और कई स्थानीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की एक्सेस प्रभावित हुई है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने वीडियो में क्या दावा किया है?
समिति ने दावा किया है कि सुरक्षाबलों के साथ मौजूद सादे कपड़ों में एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता दिखाई दे रहा है।
क्या पाकिस्तानी सरकार ने इन प्रतिबंधों की पुष्टि की है?
नहीं, पाकिस्तान सरकार ने इन वेबसाइट्स या प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंधों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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