पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में पिछले दो महीनों से लगातार हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा अपनाई जा रही हिंसक नीतियों के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। इन खूनी झड़पों में लगभग सौ लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। पीओके की सड़कों पर गिर रहे इस बेकसूर खून को देखकर अब आतंकवादियों के आकाओं की नींद उड़ गई है और हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया सैयद सलाहुद्दीन शांति की भीख मांगने के लिए मजबूर हो गया है।
संयुक्त जिहाद काउंसिल के प्रमुख की अपील
हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के चेयरमैन सैयद सलाहुद्दीन ने एक विशेष संदेश जारी करते हुए पाकिस्तान सरकार और जॉइंट एक्शन कमेटी से तत्काल प्रभाव से आमने-सामने की जंग और टकराव को बंद करने का आग्रह किया है। उसने दोनों पक्षों से बिना किसी छल-कहम के ईमानदारी के साथ वार्ता की मेज पर बैठने और इस गंभीर संकट का कोई शांतिपूर्ण हल निकालने की पुरजोर गुजारिश की है।
आतंकी सरगना ने क्यों बजाई खतरे की घंटी?
सैयद सलाहुद्दीन ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि पीओके में पिछले दो महीनों से जारी हिंसा, अंधाधुंध गोलीबारी और संघर्ष ने पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल खोल दी है। जिस क्षेत्र को भाषणों में आजाद कहा जाता है, वहां इस तरह का नरसंहार वैश्विक मंच पर भारी शर्मिंदगी का कारण बन रहा है। उसने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि लगातार हो रही मौतों और संपत्ति के भारी नुकसान से न सिर्फ आम जनता का हौसला पस्त हो रहा है, बल्कि पिछले सात दशकों से कश्मीर के लोगों के मन में जो उम्मीदें पल रही थीं, उन्हें भी तगड़ा झटका लग रहा है।
पारस्परिक टकराव को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
हिजबुल प्रमुख ने सख्त लहजे में सवाल किया कि क्या आपसी विवादों को हल करने का एकमात्र रास्ता केवल हिंसा और लाठी-गोली चलाना ही रह गया है? उसने इस बात पर चिंता जताई कि यह आंतरिक संघर्ष ऐसे नाजुक दौर में हो रहा है जब सीमाओं पर बाहरी खतरे और घुसपैठ का खतरा चरम पर है। ऐसी स्थिति में घर के अंदर चल रहा यह खूनी संघर्ष देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
संयम बरतने और बातचीत की नसीहत
अपने इस संदेश के समापन पर सैयद सलाहुद्दीन ने सभी संबंधित पक्षों से किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी से तौबा करने और हालात को और अधिक बिगड़ने से रोकने की अपील की है। उसने पाकिस्तानी प्रशासन के साथ-साथ जॉइंट एक्शन कमेटी से भी एक कदम पीछे हटने, आपसी विश्वास का माहौल फिर से कायम करने और संवाद के जरिए ही हर समस्या का समाधान खोजने का अनुरोध किया है।
गंभीर होते हालात का संकेत
हिजबुल सरगना की यह शांति अपील ऐसे वक्त में सामने आई है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले इस क्षेत्र में आर्थिक बदहाली, प्रशासनिक खामियों और राजनीतिक उपेक्षा को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। जानकारों का मानना है कि एक खूंखार आतंकी सरगना का इस तरह सामने आकर शांति की अपील करना यह साबित करने के लिए काफी है कि पीओके के मौजूदा हालात नियंत्रण से बाहर और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुके हैं।



















