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प्रशांत महासागर का एल नीनो मचाएगा तबाही, 2027 में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्डदुनिया
5 सित॰ 2026, 11:18 pm (9 दिन पहले)· 2

प्रशांत महासागर का एल नीनो मचाएगा तबाही, 2027 में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि तेजी से मजबूत हो रहा एल नीनो आने वाले समय में इतिहास का सबसे शक्तिशाली रूप ले सकता है, जिससे दुनिया भर में सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी का संकट गहरा सकता है।

दुनिया एक बार फिर मौसम के एक बेहद खतरनाक और अनिश्चित दौर की तरफ बढ़ रही है, जहां प्रकृति का यह बड़ा बदलाव दुनिया भर के करोड़ों लोगों की दिनचर्या और जीवन पर सीधा असर डालने की पूरी क्षमता रखता है। मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें इस समय पूरी तरह से प्रशांत महासागर पर टिकी हुई हैं, जहां एक प्राकृतिक जलवायु घटना बहुत तेजी से मजबूत होती जा रही है और आने वाले महीनों में यह इतिहास के सबसे शक्तिशाली एल नीनो के रूप में उभर सकती है। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के तमाम मौसम विशेषज्ञों ने इस बात की कड़ी चेतावनी दी है कि इस मौसमी बदलाव का प्रभाव केवल बढ़ते हुए तापमान तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसकी वजह से धरती के कई अलग-अलग हिस्सों में गंभीर सूखा, भयंकर बाढ़, जंगलों में भीषण आग, झुलसा देने वाली गर्मी और अत्यंत असामान्य चक्रवातों की आवृत्ति में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

एल नीनो की प्रक्रिया और इस बार का असाधारण पैटर्न

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एल नीनो मूल रूप से प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान और वहां चलने वाली हवाओं के रुख में होने वाले बदलाव से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना होती है। लेकिन मौजूदा समय में वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता इसके होने मात्र से नहीं है, बल्कि इसकी असामान्य गति और इसकी अप्रत्याशित तीव्रता को लेकर है। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि बीते अगस्त के महीने में इसका सापेक्ष तापमान सूचकांक सामान्य से लगभग 2.3 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा चुका है। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि एल नीनो का मुख्य चरम आमतौर पर साल के नवंबर से जनवरी के बीच के महीनों में आता है, जबकि इस बार यह तय समय से काफी पहले ही बेहद असाधारण रूप से ताकतवर रूप में सामने आता दिखाई दे रहा है।

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जलवायु परिवर्तन और तापमान मापने की नई चुनौतियां

वैज्ञानिकों के लिए मौजूदा समय में एल नीनो की असली ताकत का सटीक अनुमान लगाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल वार्मिंग यानी जलवायु परिवर्तन है। चूंकि दुनिया भर के समुद्र पहले से ही अपनी सामान्य सीमा से कहीं ज्यादा गर्म हो चुके हैं, इसलिए अब केवल समुद्र के तापमान में होने वाली मामूली वृद्धि को देखकर इस मौसमी परिघटना की तीव्रता का आकलन करना बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब ऐसे विशेष सापेक्ष सूचकांकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं, जो यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि पहले से ही लगातार गर्म होती जा रही इस दुनिया में तापमान की मौजूदा यह वृद्धि कितनी ज्यादा असामान्य और चिंताजनक है।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर मंडराते हुए गंभीर खतरे

इस संभावित रूप से रिकॉर्ड तोड़एल नीनो के शुरुआती स्पष्ट संकेत अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं, और प्रशांत महासागर के आसपास स्थित देशों पर इसका सबसे गहरा और बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। इसका एक बड़ा उदाहरण इंडोनेशिया में देखने को मिला है, जहां बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लगने की कई खतरनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, और वहां के वैज्ञानिक इन सभी घटनाओं को लगातार बढ़ती हुई भयंकर गर्मी तथा शुष्क मौसम की परिस्थितियों से सीधे तौर पर जोड़कर देख रहे हैं। इसके अलावा चक्रवातों के बनने और उनके आगे बढ़ने के पैटर्न में भी बहुत ही असामान्य और डरावने बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं, जो आने वाले दिनों के लिए एक बड़ा संकेत हैं।

चक्रवातों की बढ़ती गतिविधि और ऑस्ट्रेलिया का हाल

मौजूदा स्थिति यह है कि प्रशांत महासागर में जापान के पास के समुद्री इलाके से लेकर हवाई क्षेत्र तक एक साथ कई सक्रिय उष्णकटिबंधीय चक्रवात मौजूद हैं, जबकि सामान्य और पारंपरिक परिस्थितियों में एक ही समय में इतनी व्यापक चक्रवाती गतिविधि होना बेहद असामान्य माना जाता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि एल नीनो समुद्र के गर्म पानी को मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की तरफ तेजी से धकेलता है, जिसकी वजह से इन विशिष्ट क्षेत्रों में चक्रवाती गतिविधियां बहुत ज्यादा तीव्र हो जाती हैं। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया में भी आने वाले आगामी महीनों में इसका प्रभाव बहुत अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की पूरी आशंका है, क्योंकि वहां के कई इलाकों में तापमान पहले ही अपने सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच चुका है और वहां का मौसम लगातार ज्यादा शुष्क होता जा रहा है, जबकि उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में तो तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

2027 में टूट सकते हैं गर्मी और मौसम के सारे पुराने रिकॉर्ड

इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ी और डरावनी चिंता की बात यह है कि एल नीनो का यह पूरा प्रभाव जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया से अलग हटकर काम नहीं कर रहा है, बल्कि यह उसके साथ मिलकर और अधिक खतरनाक रूप ले रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि पहले से ही लगातार गर्म हो रही इस दुनिया में एक बेहद शक्तिशाली एल नीनो वैश्विक तापमान को और भी अधिक ऊंचाइयों पर धकेल सकता है। वैज्ञानिकों को इस बात की प्रबल आशंका सता रही है कि इसका परिणाम साल 2027 में वैश्विक तापमान के अब तक के सारे पुराने रिकॉर्ड टूटने के रूप में सामने आ सकता है। एल नीनो की यह परिघटना आमतौर पर दुनिया के तमाम हिस्सों में होने वाली बारिश के चक्र और पैटर्न को पूरी तरह से उलट-पुलट कर रख देती है, जिससे किसी इलाके में सामान्य से बहुत कम बारिश होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक मूसलाधार बारिश की वजह से भयंकर बाढ़ का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।

भारत और दक्षिण एशिया पर पड़ने वाला इसका दूरगामी असर

भारत जैसे विशाल देशों के लिए जो अपनी कृषि और आजीविका के लिए पूरी तरह से मानसून पर निर्भर रहते हैं, एल नीनो की ये तमाम गतिविधियां बेहद महत्वपूर्ण और चिंता का विषय होती हैं। प्रशांत महासागर की सतह पर होने वाले ये बड़े बदलाव हजारों किलोमीटर की दूरी पर स्थित दक्षिण एशिया के बारिश के चक्र और तापमान के पूरे मिजाज को बुरी तरह प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस समय पूरी दुनिया के सामने चिंता सिर्फ किसी एक साधारण या सामान्य मौसमी घटना के आने की नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों की नजर ऐसे एल नीनो पर पूरी तरह से गड़ी हुई है जो न सिर्फ असाधारण रूप से बहुत जल्दी मजबूत हुआ है, बल्कि अभी अपने पूर्ण चरम पर पहुंचना बाकी है। यदि आने वाले आगामी महीनों में इसकी यह तीव्रता इसी तरह बढ़ती रही, तो साल 2027 मानवता और इस धरती के लिए सिर्फ एक नया कैलेंडर वर्ष साबित नहीं होगा, बल्कि मौसम के इतिहास में यह सबसे नए और सबसे खतरनाक रिकॉर्ड बनाने वाला साल भी साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

एल नीनो क्या है?
एल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान और हवाओं में होने वाले बदलाव से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है।
इस बार एल नीनो क्यों चिंता का विषय है?
इस बार एल नीनो अपनी सामान्य अवधि से काफी पहले और बेहद असाधारण तीव्रता के साथ मजबूत हो रहा है, जिससे वैश्विक तापमान में भारी वृद्धि की आशंका है।
अगस्त में इसका तापमान सूचकांक कितना दर्ज किया गया था?
अगस्त में एल नीनो का सापेक्ष तापमान सूचकांक सामान्य से करीब 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था।
वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी के रिकॉर्ड कब टूट सकते हैं?
वैज्ञानिकों को आशंका है कि इस शक्तिशाली एल नीनो के प्रभाव से साल 2027 में वैश्विक तापमान के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
एल नीनो का मुख्य असर दुनिया पर क्या होगा?
इसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़, जंगलों में भीषण आग, भयंकर गर्मी और असामान्य चक्रवात जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

यह जलवायु संकट अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति, खाद्य सुरक्षा और सरकारी नीतियों के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। आने वाले वर्षों में संभावित सूखे और बाढ़ से निपटने के लिए सरकारों को तुरंत अपनी आपदा प्रबंधन रणनीतियों और कृषि नीतियों की समीक्षा करनी होगी, अन्यथा यह आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से इस भीषण प्राकृतिक आपदा और जलवायु संकट का सीधा असर सामाजिक स्थिरता पर पड़ेगा। गंभीर सूखा, विस्थापन और खाद्य सुरक्षा का संकट भविष्य में बड़े पैमाने पर नागरिक अशांति, जल विवाद और संगठित अपराधों को जन्म दे सकता है। प्रशासनिक स्तर पर आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को अभी से दीर्घकालिक रणनीतिक योजना तैयार करनी होगी ताकि बढ़ती अराजकता को रोका जा सके।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यदि हम ऊर्जा बाज़ार और भू-राजनीतिक संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से देखें, तो यह जलवायु संकट केवल आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। भीषण सूखा और तापमान में असाधारण वृद्धि का सीधा दबाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल एवं गैस उत्पादक क्षेत्रों में जल संकट और अत्यधिक गर्मी के कारण ऊर्जा उत्पादन की लागत बढ़ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अस्थिरता और कूटनीतिक तनाव गहराने की पूरी आशंका है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·9 दिन पहले

प्रशांत महासागर में अल नीनो का यह असामान्य और समय से पहले उभार एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा भू-राजनीतिक और आर्थिक संकट खड़ा कर रहा है। कृषि उत्पादन में भारी गिरावट, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एशियाई देशों को क्षेत्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन और आपातकालीन रणनीतियों को तुरंत मजबूत करना होगा, अन्यथा महंगाई और सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

यूकी तनाका के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा यह एल नीनो और समुद्र के बढ़ते तापमान का यह चक्र वैश्विक जलवायु प्रणाली के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। वैश्विक औसत तापमान पहले ही बढ़ चुका है और इस असाधारण मौसमी घटना के कारण आने वाले वर्षों में सूखा, बाढ़ और चक्रवातों का जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा। यदि इस अनिश्चित और खतरनाक दौर से निपटने के लिए समय रहते पुख्ता रणनीतिक कदम नहीं उठाए गए, तो दुनिया भर में कृषि, अर्थव्यवस्था और मानव जीवन पर इसके अत्यधिक विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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