प्रशांत महासागर के मध्य में स्थित हवाई द्वीप समूह कुदरत के एक भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है। चक्रवाती तूफान लाला ने क्षेत्र से गुजरते हुए ऐसी विनाशकारी तबाही मचाई है कि मुख्य राजमार्ग उखड़ गए हैं और कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं। लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से आए इस तूफान ने सीधे जमीन से न टकराने के बावजूद बुनियादी ढाँचे को तहस नहस कर दिया है। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब समुद्र से नमी सोखकर लाला एक बार फिर प्रचंड हरिकेन में बदल गया, जबकि मैक्सिको के तटीय इलाकों के पास दो नए समुद्री बवंडर तेजी से आकार ले रहे हैं।
हवाई के बिग आइलैंड पर बारिश का कहर और बुनियादी ढांचे की तबाही
भले ही चक्रवाती तूफान लाला का केंद्र हवाई की जमीन से सीधे न टकराया हो, लेकिन द्वीप समूह इसके सबसे खतरनाक और विनाशकारी हिस्से के प्रभाव में आ गया। इसके कारण हवाई के बिग आइलैंड पर कुदरत का भयंकर कहर देखने को मिला है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के चलते पक्की सड़कें और मुख्य राजमार्ग ताश के पत्तों की तरह उखड़ गए और कई इलाकों में सड़कों के ऊपर नदियां बहने लगीं।
नेशनल वेदर सर्विस द्वारा जारी किए गए बारिश के आंकड़े इस तबाही की गंभीरता को दर्शाते हैं। लौपाहोएहोए इलाके में सबसे ज्यादा तबाही हुई, जहां रिकॉर्ड 43.55 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा नाहुकू में 37.27 इंच, नेने केबिन में 37.20 इंच और मौना लोआ के पहाड़ी इलाके में 26.42 इंच पानी बरसा। हीलो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी 14.21 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। तुलनात्मक रूप से होनोलूलू में 5.35 इंच बारिश दर्ज की गई, जो इन विशाल आंकड़ों के सामने भले कम लगे, लेकिन सामान्य जनजीवन को अस्त व्यस्त करने के लिए काफी थी। बिग आइलैंड के कई हिस्सों में 3 फीट से ज्यादा पानी बह निकला, जिससे पूरा परिवहन तंत्र ठप्प हो गया।
ओरोग्राफिक एन्हांसमेंट: पहाड़ों की वजह से क्यों हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश
तूफान के सीधे न टकराने के बावजूद इस स्तर की तबाही और रिकॉर्ड तोड़ बारिश के पीछे मुख्य कारण ओरोग्राफिक एन्हांसमेंट नामक भौगोलिक और मौसम वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब तूफान से उठने वाली नमी से लदी हवाएं हवाई की ऊंची ज्वालामुखीय पहाड़ियों से टकराईं, तो वे तेजी से ऊपर की ओर उठीं। ऊपर जाकर यह नमी अत्यधिक ठंडी हुई और पहाड़ों की ओर वाली ढलान पर मूसलाधार बारिश के रूप में बरस पड़ी।
इस प्रक्रिया के कारण पहाड़ी इलाकों और मुख्य मार्गों पर पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि सड़क का नामो निशान मिट गया। दूसरी ओर, पहाड़ों के विपरीत ढलान वाले रेन शैडो क्षेत्र में बारिश का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा। इसी तरह के खतरनाक भौगोलिक प्रभाव ने वर्ष 2024 में आए तूफान हेलेन के दौरान भी व्यापक विनाश फैलाया था।
225 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं और शिखरों पर बर्फबारी
तूफान लाला ने केवल जल प्रलय ही नहीं लाया, बल्कि हवा की प्रचंड गति ने भी भारी तबाही मचाई। मौना केआ के शिखर पर हवा के झोंके 225 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंच गए। द्वीप के निचले इलाकों में भी 105 से 146 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिससे हजारों घरों की बिजली आपूर्ति ठप्प हो गई, बड़े पेड़ उखड़ गए और प्रमुख सड़कें बाधित हो गईं।
तबाही के बीच एक असामान्य नजारा यह देखने को मिला कि जहां निचले इलाकों में सड़कें बाढ़ के पानी में बह रही थीं, वहीं मौना केआ और मौना लोआ की ऊंची चोटियों पर तापमान अचानक गिर जाने के कारण भारी बर्फबारी दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि लाला ने यह साबित कर दिया है कि किसी चक्रवात का सीधे तट से टकराना ही तबाही की एकमात्र शर्त नहीं है, बल्कि पास से गुजरता तूफान भी पूरे बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर सकता है।
समुद्र से ऊर्जा खींचकर फिर मजबूत हुआ लाला और मैक्सिको के पास नए खतरे
हवाई द्वीप समूह को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम की दिशा में बढ़ते ही तूफान लाला ने समुद्र के गर्म पानी से नमी और ऊर्जा खींचकर खुद को एक बार फिर शक्तिशाली हरिकेन में बदल लिया है। फॉक्स फॉरकास्ट सेंटर के अनुसार, प्रशांत महासागर में मौसमी हलचल लगातार उग्र होती जा रही है।
नेशनल हरिकेन सेंटर अब मैक्सिको के तट के पास पूर्वी प्रशांत महासागर में बन रहे दो नए तूफानी चक्रवातों पर निगरानी रख रहा है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इनमें से एक बवंडर आने वाले दिनों में और अधिक शक्तिशाली होकर हवाई द्वीप समूह की ओर बढ़ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो हवाई के निवासियों को लाला के मलबे से उबरने से पहले ही एक और चक्रवाती तूफान का सामना करना पड़ेगा।
अल नीनो का साया: प्रशांत महासागर में तूफानों का बढ़ता प्रकोप
तूफानों की इस श्रृंखला के पीछे मुख्य कारक प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो मौसमी पैटर्न है। अटलांटिक महासागर की तुलना में प्रशांत महासागर में अल नीनो के सक्रिय होने पर चक्रवाती तूफानों की संख्या और उनकी तीव्रता में भारी वृद्धि होती है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए का अनुमान है कि यह अल नीनो चक्र अब तक के इतिहास के सबसे मजबूत चक्रों में से एक हो सकता है। अल नीनो के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, जो तूफानों को ईंधन प्रदान कर रहा है। इसी कारण आने वाले दिनों में प्रशांत महासागर क्षेत्र में और अधिक तीव्र तूफानों के उठने की आशंका जताई जा रही है।























