स्विट्जरलैंड के जेनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान वैश्विक मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। 7 सितंबर से शुरू हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने दुनिया भर में नागरिक अधिकारों की वर्तमान स्थिति पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों, विशेष रूप से युवाओं और छात्रों के आंदोलनों को संभालने की प्रशासनिक रणनीति की सराहना की। वोल्कर तुर्क ने स्पष्ट किया कि जब देश का युवा सड़कों पर उतरता है, तो अत्यधिक पुलिस बल का प्रयोग स्थिति को और बिगाड़ सकता है। भारत द्वारा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान अपनाए गए बातचीत के तरीके को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अनुकरणीय मिसाल के रूप में रेखांकित किया गया।
जंतर मंतर आंदोलन और भारत की संवाद प्राथमिकता नीति
किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए नागरिकों का असंतोष एक संवेदनशील चुनौती होता है। नई दिल्ली में आयोजित बड़े छात्र प्रदर्शनों के दौरान भारतीय अधिकारियों ने दमनकारी कदम उठाने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं को चर्चा की मेज पर आमंत्रित किया और उनकी चिंताओं को गंभीरतापूर्वक सुना। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि असंतोष व्यक्त कर रहे युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करना लाठीचार्ज या बल प्रयोग की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ और प्रभावी समाधान प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण न केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि नागरिकों और शासन के बीच पारस्परिक विश्वास को भी सुदृढ़ करता है।
पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति और हिंसक कार्रवाई पर चिंता
भारत के संवाद मॉडल की सराहना करने के साथ ही यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लगातार हो रहे उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान में जब नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो वहां की सरकार और सुरक्षा बल अक्सर अत्यधिक और घातक बल प्रयोग करते हैं। PoK और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार करने तथा आवाज दबाने की घटनाएं सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के इस हिंसक रवैये को मौलिक नागरिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।
चीन के शिनजियांग और तिब्बत में प्रशासनिक दमन का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र की इस समीक्षा बैठक में चीन का मानवाधिकार रिकॉर्ड भी प्रमुखता से उठाया गया। वोल्कर तुर्क ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र में स्थित डिटेंशन सेंटरों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की, जहां उइगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को कड़े प्रशासनिक प्रतिबंधों के तहत रखा जा रहा है। यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने चीन सरकार से अपने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सख्त कानूनों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि इन कानूनों की आड़ में आम नागरिकों के बुनियादी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त तिब्बत में सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण को समाप्त करने तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।
दुनिया भर में नागरिक स्वतंत्रता पर मंडराता संकट
वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए यूएन प्रमुख ने कई अन्य देशों में नागरिक अधिकारों के संकुचन पर भी ध्यान आकर्षित किया। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के बढ़ते प्रयोग और फांसी की सजा में आई तेजी को अत्यंत चिंताजनक बताया गया। इसी तरह रूस सहित कई अन्य क्षेत्रों में सार्वजनिक असंतोष को दबाने की प्रवृत्तियों पर यूएनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी जारी की। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है।



















