ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने अधिकृत वेस्ट बैंक में इजराइली अवैध बस्तियों के खिलाफ सरकार द्वारा घोषित प्रतिबंधों का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने यूके के मुख्य रब्बी सर एफ्रैम मिर्विस के उस दावे को साफ तौर पर खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस नीतिगत फैसले से ब्रिटेन में रहने वाले यहूदी समुदाय के लिए खतरा बढ़ जाएगा। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि एक गौरवान्वित ब्रिटिश यहूदी होने के नाते वे मुख्य रब्बी के विचारों से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, यहूदी विरोधी भावनाओं से मुकाबला करने के साथ-साथ लोकतांत्रिक और ब्रिटिश मूल्यों के लिए आवाज उठाना पूरी तरह से संभव और आवश्यक है।
धार्मिक नेतृत्व और ब्रिटिश सरकार के बीच मतभेद
यूके सरकार द्वारा वेस्ट बैंक की बस्तियों के साथ व्यापारिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाने के बाद देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। मुख्य रब्बी सर एफ्रैम मिर्विस ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए इसे एक बेहद निराशाजनक कदम बताया था। उनका मानना था कि इस तरह की दंडात्मक नीतियां मूल समस्या को हल करने के बजाय चरमपंथ को बढ़ावा देंगी और इजराइल विरोधी उग्र बयानबाजी को ताकत प्रदान करेंगी।
इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए एड मिलिबैंड ने कहा कि वे मुख्य रब्बी का व्यक्तिगत रूप से गहरा सम्मान करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनका दृष्टिकोण अलग है। बीबीसी रेडियो 4 के एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने रेखांकित किया कि इजराइली सरकार के फैसलों या नीतियों के लिए ब्रिटेन अथवा दुनिया भर के यहूदियों को जवाबदेह ठहराना पूरी तरह से गलत और यहूदी विरोधी मानसिकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए खड़े होना किसी समुदाय की सुरक्षा से समझौता करना नहीं है।
ब्रिटेन में बढ़ती नफरत और सुरक्षा व्यवस्था
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिटेन में यहूदी विरोधी घटनाओं के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। यहूदी समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने वाली संस्था कम्युनिटी सिक्योरिटी ट्रस्ट (CST) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में नफरती अपराधों के 1,926 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है, जो समुदाय में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
आगामी धार्मिक त्योहार रोश हशाना को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस के चीफ सुपरिटेंडेंट डेव मीनी ने जानकारी दी है कि यहूदी उच्च पवित्र दिनों के दौरान संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त और विजिबिलिटी बढ़ाई जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे स्थानीय यहूदी बस्तियों और प्रार्थना स्थलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहे हैं ताकि हर नागरिक निडर होकर अपने पर्व मना सके।
संसद में प्रधानमंत्री का रुख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
संसद में इस नीति का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री एंडी बर्नम ने कहा कि ब्रिटेन को अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ हमेशा स्पष्ट रुख अपनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब लोगों को उनके घरों से जबरन बेदखल किया जाता है, तो ब्रिटेन हमेशा कमजोर और पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा रहेगा। वहीं दूसरी ओर, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने ब्रिटेन के इस कदम का स्वागत किया है और इसे इजराइल के औपनिवेशिक ढांचे और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है।
हालांकि, यहूदी समुदाय के भीतर इस मुद्दे पर कई तरह की राय देखने को मिल रही है। जूइश लीडरशिप काउंसिल (JLC) ने चिंता जताई है कि बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला व्यावहारिक रूप से इजराइल के बहिष्कार जैसा रूप ले सकता है। इसके विपरीत, 'नाआमॉड' नामक यहूदी संगठन ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इजराइल को लेकर पूरे यहूदी समुदाय की एक समान राय नहीं है और इन प्रतिबंधों से यहूदी विरोध बढ़ने की आशंका निराधार है। मूवमेंट फॉर प्रोग्रेसिव जुदैज्म ने भी कहा कि अवैध बस्तियों के खिलाफ उठाए गए कदमों को यहूदी समुदाय पर हमला नहीं माना जाना चाहिए।
इजराइल का कड़ा राजनयिक जवाब और गैर-सरकारी संगठनों पर सख्ती
ब्रिटेन के इस कदम से दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव गहरा गया है। प्रतिक्रिया स्वरूप इजराइल ने पूर्वी यरूशलेम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया है और ब्रिटेन के 11 सांसदों व एक सामाजिक कार्यकर्ता के देश में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, इजराइल के डायस्पोरा मंत्री अमिचाई शिकली ने सीमा नियंत्रण अधिकारियों से सिफारिश की है कि ब्रिटेन से जुड़े कई प्रमुख मानवीय और सहायता संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इजराइल आने से रोका जाए।
जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की गई है, उनमें ऑक्सफैम, सेव द चिल्ड्रन, नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल, इस्लामिक रिलीव वर्ल्डवाइड और मेडिकल एड फॉर फिलिस्तीनियन्स शामिल हैं। इजराइली प्रशासन का तर्क है कि इन संगठनों की गतिविधियां और नीतियां इजराइल के हितों के खिलाफ माहौल तैयार करती हैं।
प्रतिबंधों के दायरे और भावी कार्यान्वयन की योजना
हाउस ऑफ कॉमन्स में नए नियमों की जानकारी देते हुए एड मिलिबैंड ने बताया कि विवादित E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट की वजह से नए कड़े कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। यह निर्माण परियोजना वेस्ट बैंक को पूर्वी यरूशलेम से काटती है और फिलिस्तीनी क्षेत्र को दो हिस्सों में विभाजित कर देती है। उन्होंने सदन को बताया कि अधिकृत वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों में फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से खदेड़ने की घटनाएं सामने आई हैं, जिस पर इजराइली प्रशासन आंखें मूंदे रहा।
ब्रिटेन द्वारा तैयार किए गए नए प्रतिबंधों के तहत उन कंपनियों और व्यक्तियों को निशाना बनाया जाएगा जो अवैध बस्तियों के निर्माण, वित्तपोषण या व्यावसायिक सेवाएं प्रदान करने में शामिल हैं। साथ ही, ब्रिटेन के भीतर अवैध बस्तियों से जुड़े विज्ञापनों पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। इन उपायों को पूरी तरह लागू होने में नौ महीने तक का समय लग सकता है। गौरतलब है कि ब्रिटेन के अलावा कनाडा और फ्रांस ने भी अपने मित्र देशों के साथ मिलकर अवैध बस्तियों से आने वाले सामानों पर पाबंदी लगाने की दिशा में कदम उठाए हैं।



















