संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा पलटवार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तानी सेना ही देश की वास्तविक शक्ति और वास्तविक शासक है, तथा वहां की तथाकथित 'फॉर्म 47 सरकार' में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह सेना के निर्देशों को दरकिनार कर सके। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यक मुद्दों पर विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद सत्र के दौरान भारत ने यह कड़ा रुख अपनाया। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि पड़ोसी देश अपनी घरेलू असफलताओं और आंतरिक अराजकता से पूरी दुनिया का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और अर्थव्यवस्था पर प्रहार
रघु पुरी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की पोल खोलते हुए बताया कि वहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा चुकी है और देश में चारों तरफ अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन तमाम घरेलू संकटों और विफलताओं को छिपाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरान लगातार भारत के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं और उसकी छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने की कोशिश में लगे हैं। पुरी ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की पूरी राजनीतिक व्यवस्था में केवल सशस्त्र बलों के हितों को सर्वोपरि रखा जाता है और देश के शासन पर सेना का सीधा और निर्णायक प्रभाव रहता है।
क्या है फॉर्म 47 सरकार का असली मतलब?
इस संबोधन के दौरान चर्चा में आए 'फॉर्म 47' शब्द को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया गया। फॉर्म 47 दरअसल पाकिस्तान का वह आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है जिसमें किसी भी निर्वाचन क्षेत्र के मतदान के अनंतिम और समेकित नतीजे दर्ज किए जाते हैं। फरवरी 2024 में संपन्न हुए देश के आम चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताएं देखने को मिली थीं, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों और आलोचकों द्वारा वर्तमान आधिकारिक नतीजों पर सवाल उठाने के लिए इसी फॉर्म 47 शब्द का खुलकर इस्तेमाल किया जाता है। रघु पुरी ने इसी संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी पृष्ठभूमि से बनी सरकार कभी भी सेना के प्रभाव से बाहर नहीं जा सकती और न ही उसकी अवहेलना कर सकती है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन पर घेराव
पाकिस्तान द्वारा अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर भारत को घेरने की नाकाम कोशिशों के बीच भारत ने उसी के रिकॉर्ड की याद दिलाई। रघु पुरी ने कहा कि यह जगजाहिर तथ्य है कि पाकिस्तान में देश की आजादी के बाद से लेकर अब तक अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी में भारी गिरावट आई है, जो उनके हनन का स्पष्ट प्रमाण है। भारत ने आग्रह किया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने ही नागरिकों की भलाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अल्पसंख्यक मुद्दों के विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए यह भी कहा गया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना संबंधित देशों की अपनी संप्रभु जिम्मेदारी होती है और आंतरिक मामलों को देश के नियमों के तहत ही सुलझाया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर और विविधता पर भारत का दोटूक रुख
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार जम्मू-कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। अब वहां केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली कराया जाना ही शेष बचा है। रघु पुरी ने गर्व के साथ कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुभाषी समाज है जहां विविधता सभ्यता के मूल में है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति दयनीय है। इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में भारत की तरफ से प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई थी और कारगिल युद्ध का जिक्र किया था।
























