ब्राजील के हालिया राष्ट्रपति चुनाव में पराजय झेलने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो अपने परिवार के साथ अमेरिका के मियामी पहुंच गए हैं। वहां कदम रखते ही उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए और खुद को राष्ट्र का वास्तविक प्रतिनिधि करार दिया। उनके इस अप्रत्याशित कदम और बयानों ने ब्राजील के राजनीतिक गलियारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। देश छोड़ने के फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी डर से नहीं भागे हैं, बल्कि राष्ट्रहित और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। अब वे अमेरिका की धरती पर रहकर ही स्वदेश में विपक्षी आंदोलन की कमान संभालने की योजना बना रहे हैं।
चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप और विपक्ष का नेतृत्व
मियामी पहुंचने के उपरांत फ्लावियो बोल्सोनारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर चुनावी जनादेश चुराने और देश में तानाशाही थोपने का गंभीर आरोप लगाया। शुरुआत में खुद को चुना हुआ राष्ट्रपति बताने के बाद, उन्होंने अपने रुख में थोड़ा बदलाव करते हुए स्वयं को मुख्य विपक्षी नेता के रूप में पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि वे विदेश में रहकर ही ब्राजील के विपक्षी खेमे का मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वदेश में वे लगातार राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हो रहे थे, जिसके चलते उन्हें अपनी पत्नी और बेटियों की हिफाजत के लिए देश छोड़ना पड़ा।
डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया और चुनाव परिणाम का ब्योरा
इस पूरे मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने पुष्टि की कि फ्लावियो और उनके परिजनों को कानूनी इमीग्रेशन नियमों के तहत अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी गई है। उन्होंने ब्राजील में संपन्न हुए मतदान को काफी विचित्र करार दिया और यह माना कि बोल्सोनारो परिवार के साथ ठीक बर्ताव नहीं हुआ है। हालांकि, जब उनसे फ्लावियो के राष्ट्रपति पद के दावे के संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने कोई भी सीधा बयान देने या हस्तक्षेप करने से पूरी तरह परहेज किया।
ब्राजील में हुए इस कड़े मुकाबले में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने 51.8 फीसदी वोट प्राप्त कर दोबारा सत्ता हासिल की थी। दूसरे चरण के इस चुनाव में लूला ने फ्लावियो को 40 लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। इस परिणाम को ब्राजील की सर्वोच्च चुनाव अदालत ने भी पूरी तरह वैध ठहराया था। दोबारा सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति लूला ने फ्लावियो के इस तरह अचानक देश छोड़कर चले जाने के तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया है।
जांच के बीच पासपोर्ट रद्द और निजी विमान से रवानगी
अमेरिका पहुंचने से पहले कई दिनों तक फ्लावियो के ठिकाने को लेकर रहस्य बना हुआ था। दरअसल, ब्राजील में वे वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित आपराधिक मामलों की जांच का सामना कर रहे हैं। जांच एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का कड़ा निर्देश जारी किया था। जब दी गई मियाद के भीतर उन्होंने अपना यात्रा दस्तावेज जमा नहीं कराया, तो मंगलवार को प्रशासन ने उनका पासपोर्ट आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया। साथ ही सीमा चौकियों और हवाई अड्डों पर पुलिस को उनकी आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
इन तमाम पाबंदियों के बावजूद, फ्लावियो अपनी पत्नी और बेटियों के साथ एक निजी विमान में सवार होकर मियामी के निकट ओपा-लोका हवाई अड्डे पर उतरे। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने यह साफ किया कि परिवार को वैध इमीग्रेशन नियमों के तहत देश में दाखिल होने दिया गया है। वहीं ब्राजील पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति में उन्हें आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है।


















