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रूसी तेल खरीद पर भारत और चीन से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पासदुनिया
8 अग॰ 2026, 12:38 pm (48 दिन पहले)· 2

रूसी तेल खरीद पर भारत और चीन से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास

अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत से एक ऐसा कानून पास किया है जो रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत और चीन समेत पांच देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देता है।

अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने रूस से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीदारी करने वाले राष्ट्रों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक व्यापक प्रतिबंध विधेयक पारित किया है। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नाम से लाए गए इस दंडात्मक कानून को सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों के भारी अंतर से स्वीकृति मिली। इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूस की ऊर्जा कमाई पर रोक लगाकर उसे यूक्रेन में जारी सैन्य कार्रवाइयों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने से रोकना है। इस विधेयक में भारत और चीन सहित उन शीर्ष पांच देशों के आयातित उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ थोपने का प्रावधान किया गया है, जो रूसी ऊर्जा क्षेत्र के सबसे बड़े ग्राहक बने हुए हैं।

रूस से तेल आयात करने वाले 5 प्रमुख देश निशाने पर

अमेरिकी सीनेट से पारित हुए इस विधेयक में रूस के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संसाधनों के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है। इन देशों की सूची में भारत और चीन के साथ अजरबैजान, हंगरी तथा स्लोवाकिया शामिल हैं। अमेरिकी सांसदों की दलील है कि इन राष्ट्रों द्वारा रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा की खरीद करने के कारण मास्को को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध को आगे बढ़ाने में किया जा रहा है। इसी व्यापारिक गतिविधि पर अंकुश लगाने की नीयत से यह दंडात्मक टैरिफ व्यवस्था तैयार की गई है।

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500 प्रतिशत टैरिफ का मूल प्रस्ताव और संसदीय अधिकार

रूस के ऊर्जा ग्राहकों पर वित्तीय दबाव बनाने की योजना पहले और भी अधिक कठोर रखी गई थी। पिछले वर्ष अप्रैल महीने में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा पहली बार पेश किए गए शुरुआती मसौदे में रूसी तेल खरीदारों पर 500 प्रतिशत तक का विशाल दंडात्मक टैरिफ लगाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, व्यापक विचार-विमर्श और विधायी संशोधनों के बाद इस शुल्क को घटाकर पांच सबसे बड़े खरीदार देशों के लिए 100 प्रतिशत तय कर दिया गया। अमेरिकी संविधान के प्रावधानों के अनुसार, विदेशी व्यापार तथा किसी भी देश पर आयात शुल्क या कर निर्धारित करने की शक्तियां केवल अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद के पास निहित हैं। जब दोनों सदन इस विधेयक को अंतिम रूप से पारित कर देंगे और राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर देंगे, तो यह एक पूर्ण संवैधानिक व कानूनी अधिकार बन जाएगा।

प्रतिनिधि सभा की मंजूरी और राष्ट्रपति की छूट देने की शक्ति

सीनेट में विधेयक को बहुमत मिलने के बावजूद यह कानून अभी तुरंत प्रभाव से लागू नहीं हुआ है। कानून बनने के लिए इसे अभी अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाकी है, जिसकी नई विधायी बैठक 31 अगस्त से प्रारंभ हो रही है। प्रतिनिधि सभा की हरी झंडी के बाद यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून बनने के बाद भी 100 प्रतिशत टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा। इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को पूर्ण अधिकार दिया गया है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनयिक संबंधों तथा द्विपक्षीय समझौतों को ध्यान में रखते हुए भारत या किसी अन्य देश को इन प्रतिबंधों से छूट प्रदान कर सकते हैं। राष्ट्रपति के पास परिस्थिति अनुसार टैरिफ की दरों में संशोधन करने या भारत जैसे मित्र देश के लिए रियायत देने का भी पूरा नियंत्रण रहेगा।

ईरान प्रतिबंध अधिनियम का विस्तार और रूसी नेतृत्व पर वित्तीय शिकंजा

इस बहुआयामी विधेयक में केवल रूस ही नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ भी प्रतिबंधों की समय-सीमा बढ़ाने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके तहत वर्ष 1996 के ऐतिहासिक 'ईरान प्रतिबंध अधिनियम' की अवधि को आगे बढ़ाकर 2031 तक के लिए विस्तारित कर दिया गया है। इस प्रावधान के लागू होने से ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में पूंजी निवेश करने वाली किसी भी विदेशी कंपनी पर कानूनी व आर्थिक कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, इस विधेयक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अलावा वहां के शीर्ष राजनीतिक नेताओं, प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों, बड़े उद्योगपतियों तथा रूस के मुख्य वित्तीय संस्थानों पर सीधी पाबंदियां लगाने की रूपरेखा तैयार की गई है।

अमेरिकी संसद में विधेयक पर तीखी बहस और राजनीतिक चिंताएं

इस द्विदलीय विधेयक को तैयार करने वाले प्रमुख रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद सह-प्रस्तावक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अपने विचार व्यक्त किए। ब्लूमेंथल ने कहा, "हमने जो किया है, ग्राहम को उस पर गर्व होता।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सख्त दंडात्मक कदम उन सभी पक्षों को रोकेंगे जो यूक्रेन के नागरिकों के खिलाफ जारी युद्ध में सहभागी बने हुए हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सांसद ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर सहित कई विधायकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्यापार नीति में टैरिफ का इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त निरंकुश शक्तियां सौंपेगा, जबकि वे पहले से ही आयात शुल्कों को अपनी वैश्विक आर्थिक नीति का प्रमुख हथियार बनाए हुए हैं।

सवाल-जवाब

अमेरिकी सीनेट में किस विधेयक को मंजूरी दी गई है?
सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' विधेयक को 86 के मुकाबले 11 वोटों से पारित किया है।
इस बिल के तहत किन 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है?
यह बिल रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करने वाले भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
क्या भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है?
नहीं, अभी यह बिल केवल सीनेट में पास हुआ है। इसे प्रतिनिधि सभा से पारित होना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर होना बाकी है।
क्या राष्ट्रपति ट्रंप के पास भारत को टैरिफ से छूट देने का अधिकार है?
हां, कानून बनने के बाद भी राष्ट्रपति राष्ट्रीय हित और राजनयिक संबंधों के आधार पर किसी भी देश को छूट या टैरिफ में राहत दे सकते हैं।
प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक कब शुरू होगी?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का नया विधायी सत्र 31 अगस्त से शुरू होगा।
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