खाड़ी देशों में एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और इस क्षेत्र में एक नए युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि इन सैन्य कार्रवाइयों को 27 अक्टूबर को निर्धारित इज़राइली चुनावों से पहले ही अंजाम दिया जा सकता है। राजनयिक रास्ते पूरी तरह से बंद हो चुके हैं और कूटनीतिक प्रयास ठप पड़े हैं, जिसके चलते मध्य पूर्व के हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिकी सैन्य संपत्तियों की इस क्षेत्र में हो रही भारी हलचल ने क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
सैन्य संसाधनों की तैनाती और तैयारियां
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों को दोबारा शुरू करने के लिए युद्ध स्तर पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने में जुटा हुआ है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रम्प से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाइयों को फिर से हरी झंडी मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते जमीनी और सामरिक स्तर पर संसाधन जुटाए जा रहे हैं। हालांकि शुरुआती दौर में यह आशंका जताई गई थी कि सभी संसाधनों की मु मुकम्मल तैयारी के बिना ही 'एपिक फ्यूरी' जैसी रणनीतिक शुरुआत कर दी गई थी।
इस बीच, अमेरिकी नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए 'यूएसएस थियोडोर रूज़वेल्ट' एयरक्राफ्ट कैरियर और 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट युद्ध क्षेत्र की तरफ तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इस बेड़े के साथ लगभग 10,000 अतिरिक्त नाविक और मरीन सैनिक भी इस क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका के दो अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से ही अरब सागर के जलक्षेत्र में तैनात हैं, जो किसी भी बड़े आदेश के लिए पूरी तरह मुस्तैद स्थिति में हैं।
व्हाइट हाउस का खंडन और कूटनीतिक गतिरोध
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन की तरफ से इन तमाम दावों को सिरे से खारिज किया गया है। व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका देश के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी भी तरह का हमला नहीं करेगा। प्रशासन का यह आधिकारिक रुख सामरिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जमीनी स्तर पर हो रही सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
कूटनीतिक मोर्चे पर बातचीत के दरवाजे बंद होने के लिए तेहरान सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार मान रहा है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान की तरफ से रखे गए शांति प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत पूरी तरह से ठप हो गई है। कूटनीति के रास्ते बंद होने के बाद अब सैन्य संघर्ष की आशंकाएं सबसे प्रबल हो गई हैं।
ईरान की कड़ी चेतावनी और जवाबी क्षमता
ईरान ने भी अमेरिका और इज़राइल की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी जनरल मोहसेन रेज़ाई ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि तेहरान के पास इस पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाने के लिए आधुनिक मिसाइलें और ड्रोन बड़े पैमाने पर मौजूद हैं।
जनरल मोहसेन रेज़ाई ने जोर देकर कहा कि यदि संघर्ष की शुरुआत दोबारा होती है, तो ईरान के पास एक व्यापक और प्रभावी योजना तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के विरुद्ध कोई भी कदम उठाने पर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीति के जरिए इस बात को समझा जा सके, तो तेहरान आज भी कूटनीतिक संवाद को ही प्राथमिकता देगा, लेकिन अगर युद्ध थोपा गया तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देने में सक्षम है।
भीषण तबाही की आशंका
ईरान के खुफिया आकलन के मुताबिक, इज़राइल में मतदान प्रक्रिया संपन्न होने से ठीक पहले भारी बमबारी किए जाने की प्रबल संभावना है। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस बार यदि युद्ध छिड़ता है, तो जान-माल का नुकसान पिछले संघर्षों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होगा।
ईरान के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र के देशों में जिस प्रकार अमेरिकी सेना की तैनाती की गई है और उनके तौर-तरीके हैं, उसे देखते हुए अमेरिकी पक्ष को होने वाला नुकसान दस गुना अधिक हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में मंडरा रहे इस युद्ध के सायों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है।






















