पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगातार गहराते तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर कूटनीतिक पहल के तहत ईरान की राजधानी पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें तीखी निराशा और अपमानजनक अनुभव का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अमेरिका की तरफ से एक कड़ा संदेश लेकर तेहरान पहुंचे थे, जिसका उद्देश्य ईरान को बातचीत के मोर्चे पर झुकाना था। हालांकि, ईरानी नेतृत्व ने उनकी एक भी बात सुनने से इनकार कर दिया और उन्हें साफ शब्दों में अपनी शर्तें मानने से मना कर दिया। हालात इतने तल्ख बताए जा रहे हैं कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें उनके विमान से ही तुरंत वापस लौटने तक का कड़ा संकेत दे दिया, जिससे पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को भारी बेइज्जती के साथ स्वदेश लौटना पड़ा।
मोहसेन रजाई के साथ तीखी और औपचारिक मुलाकात
अपनी इस यात्रा के दौरान असीम मुनीर की मुलाकात ईरान के नवनियुक्त सुरक्षा परिषद प्रमुख मोहसेन रजाई के साथ हुई, जो बेहद संक्षिप्त और पूरी तरह से औपचारिक दायरे तक सीमित रही। सामान्य कूटनीतिक दौरों में दो देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच जिस गर्मजोशी और शिष्टाचार की उम्मीद की जाती है, वह इस बैठक से पूरी तरह नदारद था। मीडिया विश्लेषण और सामने आए वीडियो फुटेज में दोनों नेताओं के हाव-भाव तनावपूर्ण नजर आए। जब पाकिस्तानी सेना प्रमुख अपनी बात रखने के लिए आगे बढ़े, तो मोहसेन रजाई बेहद सख्त और सतर्क मुद्रा में बैठे दिखाई दिए, जबकि असीम मुनीर उनकी तरफ थोड़ा झुके हुए नजर आए। इस पूरी मुलाकात के दौरान न तो दोनों के बीच कोई लंबी हाथ मिलाने की तस्वीर सामने आई और न ही कूटनीतिक शिष्टाचार के तहत गले मिलने जैसी कोई सहजता दिखाई दी।
अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम छोड़ने का अल्टीमेटम
लेबनान के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, असीम मुनीर ने मोहसेन रजाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद सख्त संदेश सौंपा। इस संदेश में ईरान से उसके संपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करने की सीधी मांग रखी गई थी। रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया गया कि मुनीर ने तेहरान पर दबाव बनाने की कोशिश की कि उसे परमाणु गतिविधियों पर बातचीत के दौरान अधिक लचीला रुख अपनाना चाहिए। इस पर ईरान की तरफ से प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कर दिया गया कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। ईरान की तरफ से कहा गया कि अमेरिकी नौसेना और प्रशासन को पहले ईरान की तयशुदा सात शर्तों को पूरा करना होगा, और उसके बाद ही किसी भी प्रकार की बातचीत संभव हो सकती है। तेहरान ने दो टूक शब्दों में यह भी स्पष्ट किया कि संवर्धित परमाणु सामग्री का एक छोटा सा कण भी ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा।
अन्य ईरानी नेताओं से भी दो-टूक बातचीत
मोहसेन रजाई के अलावा पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ से भी उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में भी पाकिस्तान के पाले से कोई सकारात्मक नतीजा बाहर नहीं आ सका। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने दो-टूक अंदाज में साफ कर दिया कि ईरान के पास इस विषय पर दोहराने के लिए अब कुछ भी नया नहीं है। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि असीम मुनीर ने तेहरान के सामने अमेरिका की अंतिम चेतावनी का जिक्र किया। इस चेतावनी में कहा गया था कि यदि ईरान ने वाशिंगटन की मांगें नहीं मानीं, तो उसके प्रमुख परमाणु ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए जा सकते हैं, जिसमें पिकैक्स माउंटेन जैसे संवेदनशील ठिकाने भी शामिल बताए गए हैं। इन तमाम धमकियों के बावजूद तेहरान अपने रुख पर पूरी तरह अडिग रहा।
पाकिस्तान सरकार को देनी पड़ी सफाई
ईरान के साथ इस तनावपूर्ण कूटनीतिक ड्रामे के बीच पाकिस्तान के भीतर भी असहज करने वाली स्थिति पैदा हो गई, जिसके चलते इस्लामाबाद को आधिकारिक तौर पर बयान जारी करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जो दावे बड़े पैमाने पर वायरल हो रहे थे, उनमें कहा गया था कि पाकिस्तानी सरकार की अनुमति के बाद अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए पाकिस्तानी जमीनी और सामरिक ठिकानों का इस्तेमाल कर रही है। इन दावों के जोर पकड़ने के बाद पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक हैंडल से इस खबर को सिरे से खारिज किया। मंत्रालय का कहना था कि यह पूरी तरह से बेबुनियाद दुष्प्रचार है, जिसे उत्तर अमेरिका से संचालित होने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए जानबूझकर क्षेत्र में भ्रम और अविश्वास फैलाने के उद्देश्य से फैलाया गया है।





















