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वेनेजुएला में सब कुछ तबाह होने के बाद कोलंबिया पहुंचे दो किशोर भाई, वहां भी विनाशकारी भूकंप की चपेट में आएदुनिया
14 अग॰ 2026, 8:10 pm (31 दिन पहले)· 1

वेनेजुएला में सब कुछ तबाह होने के बाद कोलंबिया पहुंचे दो किशोर भाई, वहां भी विनाशकारी भूकंप की चपेट में आए

वेनेजुएला में आए भयंकर भूकंप में अपनी मां, दादी और छोटे भाई को खोने वाले दो भाइयों को कोलंबिया शिफ्ट होने के तीन दिन बाद ही एक और शक्तिशाली भूकंप का सामना करना पड़ा।

कुदरत का कहर कभी-कभी एक ही परिवार का पीछा इस कदर करता है कि संभलने का मौका तक नहीं मिलता। वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप में अपना घर, अपनी मां, दादी और छोटे भाई को हमेशा के लिए खो देने वाले दो किशोर भाई किसी तरह अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए कोलंबिया पहुंचे थे। लेकिन वहां कदम रखे अभी तीन ही दिन बीते थे कि धरती एक बार फिर कांप उठी। काली शहर में आए इस नए भूकंप ने उन घावों को फिर से हरा कर दिया, जिन्हें दोनों भाई भूलने की कोशिश कर रहे थे। 15 साल के देइवी डेलफिन और उनके 17 साल के बड़े भाई विंडर के लिए यह एक ऐसा खौफनाक अनुभव है, जिससे उनका बचपन हमेशा के लिए छिन गया है।

वेनेजुएला के ला गुएरा में 39 सेकेंड के भीतर आए दो भयंकर भूकंप

इस दुखद दास्तान की शुरुआत 24 जून को हुई थी। वेनेजुएला का तटीय इलाका ला गुएरा दो शक्तिशाली भूकंपीय झटकों से थर्रा उठा। पहला झटका 7.2 तीव्रता का था और इसके ठीक 39 सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया। उस समय देइवी और विंडर कैरेबियाई तट के पास समुद्र किनारे गए हुए थे। विंडर चाहते थे कि उनका 10 साल का छोटा भाई मोइसेज़ भी उनके साथ चले, लेकिन उनकी मां युस्मानी ने उसे बाहर जाने की इजाजत नहीं दी। विंडर ने मां को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मां अपने फैसले पर अडिग रहीं।

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शाम के समय जब दोनों भाई अपने घर की तरफ लौट रहे थे, तभी जमीन जोर-जोर से हिलने लगी। दहशत के मारे दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को गले से लगा लिया और अपनी आंखें बंद कर लीं। जब कुछ देर बाद उन्होंने आंखें खोलीं, तो हर तरफ धूल का गुबार और मलबे का ढेर लगा हुआ था। जब वे अपने पते पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी 12 मंजिला ऊंची इमारत पूरी तरह ढह चुकी थी। कंक्रीट के उस विशाल पहाड़ के नीचे उनकी मां युस्मानी, दादी कारमेन और छोटा भाई मोइसेज़ दब चुके थे। वेनेजुएला सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तबाही में 6,300 से अधिक लोगों की जान चली गई, जबकि लापता लोगों की कोई सटीक संख्या आज तक सामने नहीं आ सकी है।

मलबे में अपनों की तलाश और एक महीने का लंबा संघर्ष

भूकंप के बाद के तीन दिन दोनों भाइयों के लिए किसी नरक से कम नहीं थे। उनके पास न तो सोने की कोई जगह थी और न ही खाने के लिए एक निवाला। उस समय उनके पिता देविद काम के सिलसिले में कोलंबिया में थे। वे जैसे-तैसे वेनेजुएला पहुंचे, लेकिन तीन दिनों तक अपने बेटों की तलाश में भटकते रहे। जब पिता और बेटों का मिलन हुआ, तो उन्होंने मलबे में दबे अपने परिवार को ढूंढने का जोखिम भरा अभियान शुरू किया, जो लगभग एक महीने तक चला।

देविद जानते थे कि ढह चुकी इमारत के खतरनाक मलबे में उतरना जानलेवा हो सकता है, लेकिन देइवी और विंडर पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उम्र कम होने के कारण उनके शरीर पतले और लचीले थे, जिससे वे कंक्रीट की संकरी परतों के बीच आसानी से रेंगकर अंदर जा सकते थे। मोबाइल फोन और टॉर्च की मद्धम रोशनी के सहारे दोनों भाई खतरनाक दरारों में घुसते थे और बाहर खड़े राहत कर्मियों को संकेत देते थे कि कहां खुदाई करनी है। इस खौफनाक मंजर ने दोनों भाइयों से उनका बचपन छीन लिया। मलबे की परतों के नीचे खोजबीन के दौरान उन्हें धीरे-धीरे अपने पारिवारिक जीवन के अवशेष मिलने लगे। पहले मोइसेज़ का हाफ पैंट मिला, फिर मां युस्मानी की बाइबिल और एक अधूरी खरीदारी की सूची। इन चीजों ने संकेत दिया कि वे अपने उस घर के करीब पहुंच रहे हैं, जो कभी खुशियों से भरा हुआ था।

मां और भाई के शवों को निकालने की दर्दनाक दास्तान

खोज अभियान के अगले दिन देइवी ने मलबे के बीच कपड़े का एक टुकड़ा देखा। उन्होंने तुरंत पहचान लिया कि वह उनकी दादी कारमेन का फूलों वाला स्कर्ट है। कुछ ही देर में दमकलकर्मियों ने वहां से एक महिला का शव बरामद होने की पुष्टि कर दी। इसके बाद विंडर ने अपनी मां के पार्थिव शरीर को पहचाना। जब दोनों भाई घर से निकले थे, तब उनकी मां अपने बालों में डाई लगा रही थीं और उनके सिर पर प्लास्टिक की थैली बंधी हुई थी। मलबे के नीचे भी उनके सिर पर वह प्लास्टिक की थैली वैसे ही लगी हुई थी। विंडर जितने करीब जा सकते थे गए और अपनी मां के पास कुछ पल गुजारे।

हालांकि, भारी कंक्रीट सिलियों के नीचे दबे होने के कारण मां के शरीर को तुरंत बाहर नहीं निकाला जा सका। जब रेस्क्यू टीम ने कंक्रीट की उस सिली को हटाया, तो उसके ठीक नीचे छोटा भाई मोइसेज़ दिखाई दिया। 10 साल का मासूम मोइसेज़ अपनी मां का हाथ थामे हुए उसी अवस्था में दबा हुआ था। अपने छोटे बच्चे का यह हाल देखकर पिता देविद हिम्मत हार गए और वहीं रो पड़े। जब मोइसेज़ का छोटा सा सिर देविद के हाथों में आया, तो वे पूरी तरह टूट गए। अपने तीनों प्रियजनों को सुपुर्दे खाक करने के बाद, पिता अपने दोनों बेटों को लेकर कोलंबिया चले गए।

कोलंबिया के काली शहर में नई शुरुआत और फिर आया 7.4 का भूकंप

वेनेजुएला का सब कुछ पीछे छोड़कर यह परिवार कोलंबिया के काली शहर के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित एक साधारण कामकाजी इलाके में रहने लगा। छोटे-छोटे मकानों वाले इस मोहल्ले में देइवी और विंडर अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे। दोनों भाइयों का सपना था कि वे जी-तोड़ मेहनत करेंगे और पढ़ाई पूरी करेंगे ताकि उनकी दिवंगत मां को उन पर गर्व हो सके। पिता देविद ने वहीं एक नाई की दुकान यानी बारबरशॉप में काम करना शुरू कर दिया था।

लेकिन नए आशियाने में बसे अभी कुछ ही दिन हुए थे कि सोमवार को कोलंबिया में इस सदी का सबसे विनाशकारी भूकंप आ गया। 7.4 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, जिसमें कई सौ लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग लापता हो गए। काली शहर एक बार फिर इस आपदा का प्रमुख केंद्र बन गया। जब झटके शुरू हुए, तब देइवी सो रहे थे। शुरुआत में जब हल्की हलचल हुई तो उन्हें लगा कि वे कोई सपना देख रहे हैं। लेकिन जैसे ही इमारतें तेजी से हिलने लगीं, वे बिस्तर से उठे और नीचे की तरफ भागे। विंडर भी उनके पीछे दौड़े। घर से बाहर निकलकर दोनों भाइयों ने सड़क किनारे लगे लोहे के एक गेट को कसकर पकड़ लिया और झटके थमने का इंतजार करने लगे।

नाई की दुकान के बाहर पिता और बेटों का भावुक मिलन

भूकंप के वक्त पिता देविद सड़क पर थे। जैसे ही उन्होंने जमीन को कांपते हुए महसूस किया, उनके दिमाग में सिर्फ अपने बेटों का ख्याल आया। वे बदहवास होकर अपने घर की ओर दौड़े, लेकिन जब वहां पहुंचे तो दोनों बेटे गायब थे। एक पड़ोसन ने देविद को बताया कि उसने लड़कों को बाहर भागते हुए देखा था। इसके बाद देविद गलियों में अपने बच्चों को पागलों की तरह ढूंढने लगे। काफी तलाश के बाद वे उस नाई की दुकान के बाहर पहुंचे जहां वे काम करते थे, और वहीं उन्हें देइवी और विंडर मिल गए।

अपने पिता को घबराया हुआ देखकर दोनों बेटों ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे इस तरह के खौफनाक मंजर से पहले भी गुजर चुके हैं। प्राकृतिक आपदाओं के इस दोहरे थपेड़े ने इन दो युवा भाइयों को उम्र से पहले बड़ा कर दिया है, लेकिन वे आज भी एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की उम्मीद में हर दिन संघर्ष कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

वेनेजुएला में आए भूकंप की तीव्रता कितनी थी?
वेनेजुएला के ला गुएरा में 39 सेकेंड के भीतर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे।
वेनेजुएला के भूकंप में कितना नुकसान हुआ था?
वेनेजुएला सरकार के अनुसार इस आपदा में 6,300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और देइवी व विंडर का 12 मंजिला अपार्टमेंट पूरी तरह ढह गया था।
दोनों भाई वेनेजुएला से कोलंबिया क्यों गए थे?
भूकंप में अपनी मां, दादी और छोटे भाई को खोने के बाद दोनों भाई अपने पिता के साथ रहने के लिए कोलंबिया के काली शहर चले गए थे।
कोलंबिया में आए भूकंप की तीव्रता कितनी थी?
कोलंबिया में सोमवार को 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जो इस सदी में देश का सबसे शक्तिशाली भूकंप था।
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टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

यह हृदयविदारक घटना वेनेजुएला के चरमराते बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक नाकामी और आपदा प्रबंधन की विफलता को उजागर करती है। 6,300 से अधिक मौतों और लापता लोगों के आंकड़े सरकार की उस पोल खोलते हैं जहाँ आर्थिक संकट के बीच नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और कोलंबिया सरकार पर शरणार्थी बच्चों के पुनर्वास की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·30 दिन पहले

यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह लातिन अमेरिका में बढ़ते प्रवासन संकट और शरणार्थी परिवारों की मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब आपदाओं के कारण विस्थापन बढ़ता है, तब पड़ोसी देशों पर मानवीय सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का भारी दबाव आ जाता है। यदि क्षेत्रीय सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन उजड़े हुए परिवारों के पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक समर्थन के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस तरह के हालात आने वाले समय में एक गहरा सामाजिक संकट पैदा कर सकते हैं।

Li Wei@li-wei·30 दिन पहले

यह घटना लातिन अमेरिका में मानवीय सहायता के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है। आपदा प्रबंधन और सीमा पार पुनर्वास नीतियों के बीच समन्वय के अभाव में ऐसे विस्थापित परिवार दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को केवल तात्कालिक राहत से आगे बढ़कर भू-राजनीतिक स्तर पर एक स्थायी शरणार्थी सहायता तंत्र विकसित करना होगा, अन्यथा सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता और गहरी हो सकती है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·31 दिन पहले

यह मार्मिक घटना दक्षिण अमेरिका में बढ़ते मानवीय संकट और शरणार्थी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे वेनेजुएला से पलायन कर कोलंबिया पहुंचे इन किशोरों का दोबारा प्राकृतिक आपदा की चपेट में आना यह दर्शाता है कि शरणार्थी परिवारों के लिए विस्थापन के बाद का जीवन कितना अनिश्चित और जोखिम भरा होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

यह मार्मिक मामला स्पष्ट रूप से यह उजागर करता है कि किस प्रकार प्राकृतिक आपदाएं और विस्थापन मिलकर शरणार्थियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को पूरी तरह तहस-नहस कर देते हैं। एक तरफ जहां वेनेजुएला के इन किशोरों ने अपने स्वजन और घर को खोने का भीषण आघात झेला, वहीं कोलंबिया में नए सिरे से बसने के प्रयास के दौरान आए भूकंप ने उनके पुनर्वास की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ऐसी परिस्थितियों में शरणार्थी परिवारों के लिए आपातकालीन मनोवैज्ञानिक सहायता और सुरक्षित बुनियादी ढांचे का निर्माण बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि आपदा प्रभावित लोग दोबारा इस तरह की गहरी त्रासदी का शिकार न हों।

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